मंगलवार, 24 सितंबर 2019

*कामला/बिगड़ा हुआ पीलिया , सीरम बिलिरूबिन बढ़ा हुआ हो , हैपेटाइटिस-बी*

*कामला/बिगड़ा हुआ पीलिया , सीरम बिलिरूबिन बढ़ा हुआ हो , हैपेटाइटिस-बी*

दवा-

आरोग्य बर्धनी वटी 4 रत्ती
पुनर्नवादि मंडूर 4 रत्ती
दोनों को मिलाकर एक खुराक बना ले और मूली के 60 ग्राम रस के साथ सुबह ,दोपहर ,व शाम को दे 10 से 15 दिन में रोगी ठीक हो जाएगा । *पर रोगी को नमक न दे* ।

आधे घण्टे बाद फ्लत्रिकादि क्वाथ दिन में तीन बार शहद मिलाकर दे ।

फ्लत्रिकादि क्वाथ - आंवला , बड़ी हरड़, बहेड़ा, गिलोय, बांस के पत्ते ,कुटकी , चिरायता, निम की छाल बराबर लेकर दरदरा कूट ले अब यह चूर्ण 15 से 20 ग्राम की मात्रा में 300 ग्राम पानी मे उबाले आधा बचने पर छान कर रख ले अब इसमें 15 gm शहद मिला कर इसकी 3 खुराक बना ले ।

बैद्य जी का  सम्पर्क सूत्र :-
Whatsup no-9466623519/ 7985817113
Coll - 9466623519

🌹✍🏻  खोखले दांतों को भरना यानी   दांतो का सुराख (cavity) भरना ✍🏻🌹

🌹✍🏻  खोखले दांतों को भरना यानी   दांतो का सुराख (cavity) भरना    ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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दांतो का सुराख (cavity) भरना

दवा: *कपूर, रूमी मस्तगी*

विधि :पहले कपूर को पीस ले!अब रूमी मस्तगी को भी हल्के हाथों से पीस लें!दानों लो अलग अलग शीशीयो में रख लेंजब  दांतो में भरना हो तो दानों को समान मात्रा में लेकर पीना डाल आटे की तरह सख्त गूँध ले अब इसे दाँत के खाली हिस्से में भर दे यह कठोर होकर जम जयेगा!फिर निकलेगा नहीं!जिस दिन दाँत में दवा भरे ,उस दिन खाने के लिए कोई पतला भोजन ले!जिसे  चबाना न पड़े, निगल लिया जाए ! 
विशेष:दाँत भरने से पहले दाँत को अन्दर से खरोच ले या किसी डॉक्टर से साफ करा लें । ये नुक्सा कई रोगियों पर प्रयोग किया गया है सभी पर कामयाब रहा है डेंटिस्ट सोना चाँदी से भरते है जो काफी महंगी चिकित्सा होती है व सभी को शूट नही करती है किसी के मसूड़े व मुँह सूज जाता है व काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है । पर ऊपर दिया गया नुक्सा सरल सुगम सस्ता है इसे गरीव से गरीव व अमीर से अमीर कर सकता है ।

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Note-  *जिन माताओ बहिनों को गर्भाशय के इंफेक्शन हो , गर्भाशय बाहर आ जाता हो , योनि की नसें कमजोर हो गयी हो यानी ढीलापन आ गया हो , स्तन का विकास न हो रहा हो या स्तन लटक गए हो , रसौली हो , शरीर के किसी भी भाग में गांठ हो , शुगर हो , जिनको परिवार नियोजन अपनाना हो बो आपरेशन न कराये दवा ले , मोतियाबिंद , आंखों से चश्मा उतारने की दवा के लिये सम्पर्क करें*
https://youtu.be/N4z7vs6bZGY

*लीवर सिरोसिस,  लिवर बिल्कुल खराब हो गया हो डॉक्टर जबाब दे दिया हो  सम्पर्क करें ,  सोराइसिस कैसी भी कही भी हो ठीक होगी गारन्टी से , सफेद दाग कही हो ठीक होगा , पेट मे इंफेक्शन हो ठीक होगा , किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की  दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा ,हार्ट ब्लॉकेज 2 माह में खत्म , किडनी खराब , डायलेसिस 2 माह में बंद , शुगर 20 दिन में खत्म ,  पित्त की पथरी , गुर्दे की पथरी , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।*
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गुरुवेन्द्र सिंह
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दवा कोरियर , या indianpost से भेजने की सुविधा है व पेमेंट acc में या google play , paytm , phone pay के द्वारा कर सकते है ।
पेमेंट करने के बाद ही दवा भेजने की सुबिधा है कैश ऑन डिलेवरी नही है ।
   
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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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*कान का बहना , कान में शब्द सुनाई देना, बहरापन*

*कान का बहना , कान में शब्द सुनाई देना, बहरापन*

योग- कान साफ करके पा
पंचगुण तेल की 2 से 5 बून्द डाले

तथा खाने को सारिवाद्यादि वटी की 2 गोली दिन में तीन बार दे ।

*Note*- रोगी का पेट साफ रखें , बादी चीजें सेवन न करे , तली भुनी, खट्टी ,अधिक मीठी , तीखी , तैलीय चीजे न ले ।

बैद्य गुरुवेंद्र सिंह
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बुधवार, 14 अगस्त 2019

🌹धनवंतरी वटी 🌹

🌹धनवंतरी वटी 🌹

🌱 हींग 1भाग
🌱 बच 2 भाग
🌱 बाय बिडंग 3 भाग 🌱सेंधा नमक 4 भाग 🌱जीरा 5 भाग
🌱सौंठ 6 भाग
🌱काली मिर्च 7 भाग
🌱पिपली 8 भाग
🌱 कूट 9 भाग
🌱हर्रा 10 भाग
🌱चीता 11 भाग
🌱अजमोद 12 भाग
और
🌱पुराना गुड इन सब से दुगना लेकर
सब पीस छानकर गुड़ मिलाकर छोटी चने के बराबर गोलियां बना लें सुबह-शाम एक-एक गोली गर्म जल के साथ ले
🌹इससे वायु के 84 रोग वात, हर्ष, गुल्म, 20 प्रमेह ह्र्दय रोग , 8 शूल, 18 कोड , संग्रहणी, अग्नि मंदता , पांडुरोग, अरुचि इतने रोग दूर होते हैं
🌹कुछ दिन बराबर सेवन करने से शरीर में बल बुद्धि बढ़ेगी यह औषधि भगवान धन्वंतरि जी ने खास अपने पुत्र को बताइ थी
यह बहुत चमत्कारी औषधि है जरूर प्रयोग करें

गुरुवार, 16 मई 2019

 दमा  

🌹✍🏻    दमा   ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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दमा
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नौसादर 10 ग्राम पीसकर तवे के बीचोबीच रख दें और इसके चारों तरफ 3-4 इंच दूर 200 ग्राम पिसे हुए नमक को गोलाकार में रख दें। तवे को एकत्था बर्तन से ढक दें और तवे को चूल्हे पर चढ़ाकर करीब 1 घंटे तक धीमी आंच पर पका लें। यह एक चुटकी की मात्रा में चीनी के बताशे में रखकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे दमा के दौरे में आराम मिलता है।

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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  खांसी, कफ इन्फेक्शन, पुरानी खांसी तथा कुकुर खांसी   

🌹✍🏻   खांसी, कफ इन्फेक्शन, पुरानी खांसी तथा कुकुर खांसी    ✍🏻🌹

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तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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खांसी, कफ इन्फेक्शन, पुरानी खांसी तथा कुकुर खांसी पर अनुभूत योग
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अक्सर कितने ही इलाज व दवाइयां खाने के बाद भी कुछ लोगों की खांसी कम होने का नाम नहीं लेती कम रोग प्रतिकारक शक्ति, किसी दवाई के साइड इफेक्ट, क्षतिग्रस्त फेफड़े, एलर्जी, धूम्रपान, तथा इन्फेक्शन जैसे कई कारण इसके पीछे हो सकते हैं पुरानी खांसी ना सिर्फ असाध्य होती है लेकिन कष्टदायक भी होती है-

कई बार खास्ते खास्ते रोगी के छाती पीठ व पेट दुखने लगता है और रोगी थकान महसूस करने लगता हैं तथा कफ कि वजह से रोगी अरुचि महसूस करता है तथा धीरे-धीरे रोगी कमजोर होने लगता है ऐसे में आज हम जो नुस्खा आपको बताने वाले हैं यह बहुत अनुभुत तथा अकसीर है-

खासकर के छोटे बच्चों की खांसी या कुकुर खासी में यह बेहद चमत्कारिक लाभ देने वाले नुस्खों में से एक है बच्चों को जब कुकुर खांसी (Whooping cough) हो जाती है तो बच्चे काफी देर तक खांसते रहते हैं व खांसते खांसते उनका दम घुटने लगता है आंखें लाल हो जाती है कई बार बच्चों को व खांसते खांसते उल्टी होने लगती है इससे बच्चों को काफी कष्ट होता है बच्चे हमेशा रोते व चिड़चिडे रहते हैं और उनका यह हाल देखा नहीं जाता ऐसे में यह नुस्खा बेहद लाभदायक है-

यह नुस्खा हमें मुंबई के जड़ी-बूटी शिविर में पिपरिया से आए हुए एक बुजुर्ग वैदजी ने लोक कल्याण हेतु बताया था यह उनका वर्षों से अनुभूत योग है तथा हमारा भी अब अनुभूत योग है-

यह नुस्खा बनाने में बेहद सरल, ससता, निरापद तथा अत्यंत लाभदायक है जिसे कोई भी आसानी से बना कर प्रयोग कर सकता है लोगों को एलोपैथिक दवाई लेकर भी ठीक ना होते हुए देखकर तथा लोगों का ऊर्जा तथा धन व्यय देखकर हमें अत्यंत दुख होता है और इसीलिए आज हम यह नुस्खा लोक कल्याण हेतु यहां लिख रहे हैं-

खांसी-कफ इन्फेक्शन-पुरानी खांसी तथा कुकुर खांसी (whooping cough) पर अनुभूत योग-

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सामग्री-
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कच्ची फिटकरी (Elm) का चूर्ण- 100 ग्राम
सोमलता (Ephedrine) का चूर्ण- 50 ग्राम

बनाने की विधि-
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दोनों चूर्णों को मिलाकर कपड़छन कर कर अच्छे से खरल में घोंट कर मिलाकर रख लें-पुरानी खांसी व कुकुर खांसी (whooping cough), की अवस्था में यह प्रयोग करने से 10 से 15 दिन में आराम हो जाता है-

मात्रा-
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1 से 2 वर्ष के बालक को 2 रत्ती
5 से 6 वर्ष तक के बालक को 3 से 5 रत्ती
बड़े बालों को को 7 से 10 रत्ती-तथा बड़ी उम्र की व्यक्तियों को 10 से 15 रत्ती तक दिन में तीन बार देवें

अनुपान-
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यह योग आप गर्म पानी अथवा शहद में मिलाकर ले सकते हैं छोटे बालों को को उनके उम्र के हिसाब से इस नुस्खे की मात्रा एक चम्मच शहद में अच्छे से मिलाकर चटा देने से 15 दिन में संपूर्ण लाभ हो जाता है-

यह नुस्खा कुत्ता खासी (whooping cough), पुरानी खांसी, कफ इन्फेक्शन (cough infection), अस्थमा, ब्रोंकैटीस (Bronchitis) छाती का भारीपन बढ़ा हुआ ESR (Eosinophilia) जैसी समस्याओं में भी बेहद लाभदायक है यह नुस्खा संपूर्ण निराप्रद है तथा इसे लेने से एलोपैथिक सिरप की तरह नींद नहीं आती और ना ही अन्य कोई साइड इफेक्ट होते हैं-

विशेष टिप-
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खांसी में गेंदे के फूल (Marigold flower) की सारी पंखुड़िया तोड़ कर रात को एक लिटर पानी में भिगो दे सुबह यह पानी पूरे दिन पिए इस प्रयोग से ना सिर्फ खांसी में आराम मिलता हैं बल्कि फेफड़ो को भी शक्ति मिलती हैं तथा जमा हुआ कफ आसानी से निसारण हो जाता हैं-छोटे बच्चो में यह दोनों प्रयोग अवश्य आजमाने चाहिए
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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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सफेद दाग

🌹✍🏻     सफेद दाग ✍🏻🌹
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सफेद दाग काफी लोगों के हाथों पर चेहरे पर पग पर आपने देखा होगा रस माणिक्य 2 ग्राम बाकुची चूर्ण 5 ग्राम मिलाकर पीसकर भर्ती बना लें इसे गोमूत्र में मिलाकर लगाइए लगाने से पहले गाय के गोबर से सफेद दाग को साफ कर ले बाद में यह लेप लगाएं 3 दिन में दाग पर फफोला उठ जाएगा दवा बंद कर दें फफोले पर मक्खन या खोपरे का तेल लगाते रहे दो बार में दाग सामान्य चमड़ी जैसा हो जाता है हरि ओम नमः शिवाय

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गन्धर्व हरीतकी क्या है कैसे बनायें

🌹✍🏻   गन्धर्व हरीतकी क्या है कैसे बनायें   ✍🏻🌹

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गन्धर्व हरीतकी क्या है कैसे बनायें
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हरीतकी (Haritaki) उत्तम टॉनिक होने के साथ-साथ रेचक भी है यह आपके पेट के सभी रोगों में रामबाण है ये आपके लिए कब्ज, पेट दर्द, आफरा, गैस, बदहजमी, लिवर की तकलीफे तथा पाइल्स में यह बेहतरीन औषधि साबित होती है आचार्य भावमिश्र जी अपने भावप्रकाश का आरंभ हरीतकी से करते है-

गन्धर्व हरीतकी (Gandharva Haritaki) क्या है कैसे बनायें-
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आयुर्वेद के ऋषियों ने लिखा है-

    यस्य माता गृहे नास्ति, तस्य माता हरीतकी ।
    कदाचिद् कुप्यते माता, नोदरस्था हरीतकी ॥

भावार्थ-

जिन मनुष्यों के घर माँ नहीं है हरीतकी उनकी माँ समान हित करने वाली है माता तो कभी-कभी नाराज़ भी हो जाती है परन्तु खायी हुई हरड़ कभी भी अपकारी नहीं होती है-

जिसके घर मे माता नहीं है उसकी माता हरीतकी है कभी माता भी कुपित (गुस्सा) हो जाती है परंतु पेट मे गई हुई हरीतकी (हरड़) कुपित नहीं होती है आयुर्वेद के सबसे पुराने व प्रतिष्ठित ग्रंथ चरक संहिता मे महर्षि पुनर्वसु आत्रेय जो औषधि लिखी है उसमे सबसे पहली औषधि हरितकी लिखी है-

आज हम आपको शास्त्रोक्त आयुर्वेद का एक ऐसा ही योग बनाना सीखा रहे है जो कि एक मृदु विरेचन है और पेट के समस्त रोगों तथा अजीर्ण, फ़टी एडिया, मुँह के छाले, जोड़ो के दर्द, कमर दर्द, एड़ी के दर्द, पाइल्स, फिशर और मस्सों पर अधिक लाभदायक है-

इस योग की विशेषता यह है कि यह वात विकार को संतुलित करता है आयुर्वेद के हिसाब से बड़ी आंत वायु शथल है जब वायू कुपित होता है तब बड़ी आंत में ड्रायनेस बढ़ जाती है जिससे जोड़ो के दर्द तथा पाइल्स ओर फिशर फिस्टुला जैसी बीमारी होती है तब यह योग पेट की गंदगी निकालता है और आपके आंतो की सफाई भी करता है ये पेट की गर्मी निकालता है आंतो को अंदर से नरम और इलास्टिसिटी को भी बरकरार रखता है-

गन्धर्व हरीतकी (Gandharva Haritaki) बनाने की विधि-
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बाल हरड़ या छोटी हरड़- 200 ग्राम
एरंडी का तेल- 250 ग्राम

सबसे पहले आप एरंडी के तेल में 5-6 छोटी हरड़ डालकर तल लें चूँकि तले जाने पर हरड़ फूल कर दुगनी हो जाएगी तब इसे कड़ाही से निकाल लें और ऐसे ही सारी हरड़ तल लें तथा अब ठन्ड़ी होने पर मिक्सर में पीस ले अब आप साथ मे 15 ग्राम सेंधा नमक और 15 ग्राम पिपली चूर्ण मिलाए ये आपका गन्धर्व हरीतकी चूर्ण तैयार हो गया है-

कैसे सेवन करें-
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आप इसे रोज रातको सोने से पहले 1-1 चम्मच गर्म पानी से ले।

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 उदर सूल पेट अफारा गैष तेजाब अपचय मंद अग्नि दीपचं पाचन

🌹✍🏻   उदर सूल पेट अफारा गैष तेजाब अपचय मंद अग्नि दीपचं पाचन    ✍🏻🌹
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उदर सूल पेट अफारा गैष तेजाब अपचय मंद अग्नि दीपचं पाचन के लिए इस से उत्तम योग आप को कही नही मिलेगा 5 मिंट में ये अपना प्रभाव दिखा देता है
घटक
गोड तुम्बा 15 ग्राम
अजवायन 20 ग्राम
सॉफ     20
सनाय 20
आक की जड़ की छाल 20 ग्राम
आक के फूल 20
धनिया 20I
पीपल 20
सौंठ  20
पिली हरड़ 20
लौंग 20
दालचीनी 20
काली मिर्च 40
नोसादर 40
सेंधा नमक 40
काला नमक 40
आंवला 40
हिरा हींग अछे वाला 40 ग्राम
सब को कूट पीस कर पॉवडर बना ले 200 से 300 ग्राम भाग का तजा रस निकाल के इस में भावना दे जब भांग रस सुख जाइए तो इस पॉवडर की 2 घण्टे माम् जिस्टे कुटे फिर 400 ग्राम नीबू कर रस में रगड़ाई करे जब रगड़ाई करते करते सूखने लगे तो चने बराबर गोली बना ले और सूखा ले खाना खाने के बाद 1 गोली के सब खाना हजम मात्र 30 मिंट में  इतने कमाल की चीज है किसी भी ग्रन्थ में ये योग नही मिलेगा
जय आयुर्वेद
ये मेहनत खुद करे खुद बनाये पूरी डिटेल दे दी है किसी को बनाने में दिक्कत हो तो फोन से पूछ ले हम हेल्फ करने को तैयार है व बना हुआ भी उपलब्ध है
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विविध पुष्पों से बनने वाले गुलकंद तथा उसके लाभ

🌹✍🏻     विविध पुष्पों से बनने वाले गुलकंद तथा उसके लाभ  ✍🏻🌹
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विविध पुष्पों से बनने वाले गुलकंद तथा उसके लाभ
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प्रकृति में मिलनेवाली हर चीज औषधीय व पौष्टिक गुणों से भरपूर है धान्य, सब्जियां, फल तथा पुष्प उत्तम पोषण का स्त्रोत है यह हमारे शरीर को ना सिर्फ पोषण व बल देते है किंतु मन को भी सुकून तथा आराम प्रदान करते है ज़्यादातर अन्न के बाद सब्जियां तथा फलो का ही भोजन में ज्यादा समावेश प्रचलित है लेकिन अगर आप फूलो की पौष्टिकता तथा औषधीय गुणों को जानेंगे तो बिना चुके हुए इसका प्रतिदिन सेवन करना अवश्य चाहेंगे-

आज इस पोस्ट में हम आपको विविध फूलो से बनते हुए गुलकंद (Gulkand) के बारे में जानकारी देंगे जिसे आप आसानी से घर पर बना कर पूरे साल पुष्पों के औषधीय गुणों का लाभ ले सकेंगे जैसा की हमने गुलाब की लेखनमाला के अंतर्गत गुलकंद बनाने की विधि, गुलकंद के गुण तथा उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी है-

आयुर्वेदनुसार फूलो और शर्करा के योग से बनने वाले पाक को गुलकन्द (Gulkand) कहा जाता है यह एक आयुर्वेदिक अवलेह कल्पना है किसी भी औषधि पुष्प का गुलकंद बनाया जा सकता है लेकिन सिर्फ गुलाब का ही गुलकंद आमतौर पर प्रचलित है-

आयुर्वेदानुसार गुलकंद शीतल, मधुर, रेचक, मूत्रल, तृषा नाशक, पित्त शामक, दाह नाशक तथा मन को शांति तथा ताजगी देनेवाला माना गया है पित्त तथा गर्मी से होनेवाली तकलीफें पाचन संस्था के रोग, अशक्ति, जीर्ण ज्वर, अनिंद्रा, शरीर की आंतरिक गर्मी तथा अन्य रोगों में विविध औषधीय पुष्पों के गुलकंद (Gulkand) बेहद लाभदायी है-

विविध पुष्पों से बनने वाले गुलकंद (Gulkand) तथा उसके लाभ-
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सनाय का गुलकंद (Gulkand) -
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पीले सुनहरे रंग के सनाये के फूल कटु, शीतल,  मल निसारक तथा आंखों के लिए हितकर है-सनाये के फूलों का गुलकंद खाने से मूत्र रोगों में फायदा होता है मूत्र की रुकावट, यूरीन इन्फेक्शन, मूत्र दाह जैसी तकलीफें तथा पाचन सम्बन्धी रोग कब्ज, आँतो की सूजन, बवासीर जैसे रोगो में बेहद गुणकारी है यह गुलकन्द त्वचा रोगों में भी बेहद असरकारक है प्रतिदिन इस गुलकन्द के सेवन से त्वचा का रंग निखरता है तथा दाज खाज खुजली कील मुहाँसे तथा फोड़े फुंसी भी दूर होते है-

नारियल के फूलों का गुलकन्द (Gulkand)-
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नारियल मधुर, शीतल, बलवर्धक है नारियल के ताजे फूल ले कर शास्त्रोक्त विधि से उसका गुलकन्द (Gulkand) सिद्ध करे यह गुलकन्द चंदन के पानी के साथ पीने से उबकाई, वमन, अतिसार, मुँह के छाले तथा तृषा रोग मिटते है यह गुलकन्द प्रतिदिन खाने से लूं लगने से होने वाली तकलीफें चककर, उल्टी तथा शारीरिक दुर्बलता मिटती है-

महुआ के फूलों का गुलकन्द (मोहाकन्द)-
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आयुर्वेद के मत अनुसार महुआ के फूल स्वाद में मधुर पचने में भारी, शीतल, पुष्टिदायक, बल तथा वीर्य वर्धक, वायु और पित्त नाशक तथा पौष्टिक है महुआ के फूल तथा शक्कर समान भाग ले कर मिला कर हाथों से अच्छी तरह मसल लें अब इस मिश्रण को कांच की बरणी में भर कर 40 दिन तक कड़ी धूप में रखे-40 दिन बाद मोहाकन्द सिद्ध हो जाएगा-

प्रतिदिन 1-1 चम्मच  मोहाकन्द सुबह शाम लेने से मूत्र दाह, पुयमेह, पेशाब में पस जाना, मंदज्वर, आंतरिक गरमी, अग्नी मान्ध, रक्क्त विकार तथा मूत्रावरोध जैसी समस्याएं मिटती है-

इमली के फूलों का गुलकन्द-
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इमली के फूल तथा शक्कर समान भाग ले कर शास्त्रोक्त विधि से गुलकन्द सिद्ध कर ले प्रतिदिन 1-1चमच्च सुबह शाम इस गुलकन्द का सेवन करने से अपचन, अरुचि, मुँह का कड़वापन, खट्टी डकारें, उबकाई तथा एसिडिटी जैसी तकलीफों में राहत मिलती है-

नीम के फूलों का गुलकन्द-
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नीम के गुणो से तो हम सभी परिचित है नीम के फूलों से बनने वाले गुलकन्द को नीमकन्द कहा जाता है-

नीम के पुष्प- 1 किलो
शक्कर- 1किलो
शहद- 100 ml

एक किलो नीम के फूलों में एक किलो शक्कर मिला कर उसमे 100 ml शहद मिला कर 40 दिन तक धूप में रख कर नीमकन्द सिद्ध कर ले-यह नीमकन्द आंखों की जलन, छाती की जलन, हाथ पैर के तलवों की जलन, बार बार मुह में छाले आ जाना, रक्त विकार, फोड़े फुंसी, त्वचा रोग जैसी समस्याओं में खूब लाभदायक है मधुमेह के रोगियों को यह नीमकंद शहद में बना कर सुबह शाम खूब चबा-चबा कर खाने से मधुमेह में लाभ मिलता है-

जुही के फूलों का गुलकन्द-
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जुही के फूल तथा शर्करा के योग से बनने वाले गुलकन्द को जुहीकन्द भी कहा जाता है जूही शीतल, पित्त नाशक, नेत्र रोग निवारक तथा दन्त रोग नाशक गुणों से भरपूर है जुहीकन्द हाइपर एसिडिटी, पित्त सम्बन्धी समस्याएं, पित्त बढनेसे होनेवाले सिर कनपटी तथा आंखों के दर्द व सूजन में बेहद गुणकारी है-पेट के अल्सर में भी जूही कंद एक उत्तम औषधि है-

जपाकन्द या कुसुमकन्द-
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जपाकुसुम या गुड़हल के फूल की पंखुड़ियां तथा शर्करा के योग से बन ने वाले गुलकन्द को जपाकन्द या कुसुमकन्द कहा जाता है जपाकुसुम के फूल मलरोधक, केशवर्धक, पित्त शामक तथा शीतल होते है जपाकन्द खाने से बालो का असमय सफेद होना, बाल झड़ना, बालो का पतला होना जैसी समस्याऐ मिटती है-

1 कप दूध आधा चम्मच घी तथा 1 चम्मच कुसुमकन्द खाने से महिलाओं में ज्यादा महावारी होना, रक्तप्रदर, श्वेत प्रदर तथा महावारी सम्बंधित अन्य समस्याओं में लाभ मिलता है-

एक बड़ा चमच्च कुसुमकन्द एक ग्लास शीतल जल में घोल कर पीने से ऊबकाई, वमन,तथा अम्लपित्त में त्वरित लाभ होता है-

कमल कंद-
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कमलपुष्प की पंखुड़ियां तथा शर्करा के योग से बनने वाले गुलकन्द को कमलकन्द या पद्मकन्द कहा जाता है कमल शीतल, मधुर तथा बलवर्धक व मानसिक ताजगी दायक पुष्प है यह ना सिर्फ शरीर को स्वास्थ्य व सौंदर्य देता है बल्कि मन की थकावट दूर कर के मानसिक शांति तथा स्थिरता देता है-

कमलकन्द बनाने के लिए कमल की पंखुड़ियां, मुलहठी व शर्करा को मिला कर चालीस दिन धूप में रखा जाता है व कमलकन्द सिद्ध किया जाता है-

यह कमलकन्द मूत्र संसर्ग, किडनी विकार, गैस, अस्थमा जैसे जटिल रोगों पर तथा मानसिक अवसाद, बेचैनी, उन्माद, हिस्टीरिया, अनिंद्रा तथा घबराहट जैसी  मानसिक समस्याओं पर बेहद उपयोगी है-

एक-एक चम्मच कमलकन्द सुबह शाम खाने से रक्तविकार दूर हो कर त्वचा का रंग निखरता है तथा त्वचा चमकीली व मुलायम बनती है-

कददू के फूलों का गुलकन्द-
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कददू के फूल शर्करा तथा इलायची व दालचीनी के योग से बन ने वाले कल्प को कुष्माकन्द कहा जाता है कुष्माकन्द पित्त सम्बन्धी समस्याएं, हार्मोनल गड़बड़ियां, रक्तचाप सम्बन्धी समस्याएं तथा ह्रुदयरोग में बेहद हितकारी उत्तम औषध है-

सुबह खाली पेट 1-2 चमच्च कुष्माकन्द खाने से ह्रदय रोग, पाचन सम्बंधित समस्याएं तथा शारीरिक दाह जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है-

अमलताश के फूलों का गुलकन्द-
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अमलताश की फूलो की पंखुड़ियां तथा शर्करा के योग से बनने वाले गुलकन्द को अमलकन्द भी कहा जाता है यह अमलकन्द पेट सम्बन्धित समस्त रोगों में बेहद कारगर औषधि है जीर्ण ज्वर में  चिरायता के क्वाथ के साथ दो चम्मच अमलकन्द लेने से ज्वर में बेहद फायदा होता है-

पुरानी कब्ज की समस्याओं में तथा कब्ज से उत्पन्न हुई बादी बवासीर में अमलकन्द बेहद हितकारी है।
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🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
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