गुरुवार, 16 मई 2019

जोड़ो का दर्द  

🌹✍🏻  जोड़ो का दर्द      ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

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त्रिफला- २५० ग्राम, 
शुद्ध गुग्गुल 200 ग्राम
शुद्ध कुचला 100 ग्राम
गिलोय चूर्ण - २०० ग्राम ! 
कलोंजी- १००ग्राम,
मैथी पीसी - १०० ग्राम,
अजवायन - १०० ग्राम,
अर्जुन छाल चूर्ण - १०० ग्राम,
चोबचीनी - १०० ग्राम,
२००ग्राम एलोवेरा रस में सभी चूर्ण को मिलाकर छावं में सुखाए फिर ! व चूर्ण कर लें !!

*सेवन की विधि :-*
     २१ दिन से ९० दिन तक दिन में ३ बार २ से ५ ग्राम चूर्ण सेवन करें !!

अगर इसके साथ संजीबनी teb व तेल भी प्रयोग किया जाए तो तीन से चार माह में गठियावाय, कंधे का दर्द, मांसपेशियों का दर्द, साइटिका का दर्द ठीक  होता है ।

दवा मंगाने के लिए सम्पर्क करें
वैद्य गुरुवेंद्र सिंह
7985817113
9466623519
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🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
7985817113
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हिमालया शिग्रु

🌹✍🏻       !! हिमालया शिग्रु !! ✍🏻🌹

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तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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!! हिमालया शिग्रु !!

हिमालया शिग्रु एक प्राकृतिक हर्बल दवा है ,  इसमें शिग्रु का कंसंट्रेशन होता है ! हर कैप्सूल या टेबलेट में २५० मिलीग्राम !!
शिग्रु एक तरह का पेड़ होता है जिसे सहजन , मोरिंगा , ड्रम स्टिक , मूनगा जैसे कई नामों से जाना जाता है ! इसके फल को सब्ज़ी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है !!
शिग्रु या सहजन का आयुर्वेद में बड़ा महत्त्व है , इसके गुणों के कारन ! यह विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है ! इसमें विटामिन ए , विटामिन सी के अलावा मैग्नीशियम, कैल्शियम , फॉस्फोरस , आयरन और कॉपर जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं !!

*!! हिमालया शिग्रु के गुण !!*

      यह एंटी ऑक्सीडेंट , एंटी इंफ्लेमेटरी , एनाल्जेसिक , एंटी बैक्टीरियल , एंटी वायरल, एंटी कोलेरिक और पाचन ठीक करने वाले गुणों से भरपूर होता है ! आयुर्वेदानुसार यह वात नाशक है !!

*!! शिग्रु के लाभ !!*

हिमालया शिग्रु के इस्तेमाल से जोड़ों का दर्द , सुजन , गठिया , अर्थराइटिस, कमर दर्द , साइटिका , जकड़न जैसे वात रोगों में फ़ायदा होता है !
प्राकृतिक विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर होता है , शरीर को पोषण देता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता या इम्युनिटी पॉवर को बढ़ाता है ! कैल्शियम रिच होने से हड्डियों को मज़बूत करता है ! वात रोगों में इसका इस्तेमाल कर फ़ायदा ले सकते हैं ! परन्तु कठिन रोगों में सिर्फ इसके भरोसे नहीं रह सकते , इसे सहायक औषधि के रूप में ले सकते हैं !!

*!! हिमालया शिग्रु की मात्रा !!*

हिमालया शिग्रु एक कैप्सूल या टेबलेट सुबह शाम खाना खाने के बाद में पानी में से लेना चाहिए ! इसे लम्बे समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं , किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है !!

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
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अपस्मार (मिर्गी) 

🌹✍🏻    अपस्मार (मिर्गी)  ✍🏻🌹

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तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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अपस्मार (मिर्गी) -

✍🏻!! यह रोग भी बहोत भयंकर है ! और औषधियों के सेवन करने से बड़ी कठिनता से जाता है ! ऐसे रोगो पर साधु सन्यासियों के बताए चुटकुले बड़े ही काम के सिद्ध होते है ! आपने देखा होगा कि साधू सन्यासी लोग मिर्गी के दौरे, सांप, बिच्छू आदि के काटने पर पांच मिनट ही रोगी को आराम कर देते हैं !!
मिर्गी का यह भयंकर रोग दौरे से आया करता है ! और दौरे के समय रोगी अचेत होकर भूमिशायी हो जाता है ! जब इस रोग का दौरा पड़ता है ! तो रोगी चाहे सड़क पर हो या जंगल में हो या कही भी हो तत्तकाल वहीं गिर जाता है ! और उसके मुंह से झाग आने लगता है ! इसका कारण यह होता है ! कि कफ के कारण दूषित मल मस्तिष्क की गति को बन्द कर देता है ! और चेतना सून्य होकर रोगी गिर जाता है ! हांथ पांव ऐंठने लगते है ! कभी कभी ऐंठन नही भी होती है ! यदि बार बार रोगी अपनी जीभ को काटे तो मस्तिष्क की दुर्बलता और मलाधिक्य के लक्षण हैं !! इसलिये आज हम आपको इसकी उपमा के लिये दो तीन उत्तमोत्तम प्रयोग भेंट करते हैं ! ईश्वर कृपा से निश्चय ही आपको इन प्रयोगों से यश व सम्मान की प्राप्ति होगी ! पर हमारे लिखने मात्र का उद्देश्य यह कि आप सभी इन नुस्खों का प्रयोग जहां कहीं ऐसा रोगी दिखे तो जरूर प्रयोग करें ताकी हमारी यह मेहनत बेकार न हो ! यही आप सबसे प्रार्थना करता हूं !!

   *!! मिर्गी रोग के चिकित्सकीय प्रयोग !!*

*✍🏻!! यह नुस्खे बहोत ही पुराने और बिशेष लाभदायक है ! इन योग को बहुत पहुंचे हुए महात्मा लोग ही जानते हैं ! यह योग किसी चिकित्सा ग्रन्थ में ढूड़ने से नही मिलेंगे ! एक बहोत ही पहुंचे हुए महात्मा से प्राप्त हुआ यह गुप्त प्रयोग आप सब के सामने लिख रहा हूं !!

               *प्रयोग १ : सन्यासी योग !!*

   पहली बार जिस देशी गाय ने बछड़ा दिया हो ! उस नर बछड़े का गोबर खरल में डालकर खूब खरल कर लें ! जब सूखने पर हो तो आक का दूध डाल ले और खरल करें ! फिर जब सूखने पर हो तो आक का दूध डाल लें ! और खरल करते रहें ! इसी प्रकार जब बीस बार आक का दूध पच जाये तब अच्छी तरह सुखाकर इसकी आधी मात्रा के बराबर काली मिर्च डालकर खरल कर रख पीसकर शीशी में रख लें !! 
जब कहीं मिर्गी का रोगी मिले तो आधी चावल के बराबर दवा रोगी के नाशा छिद्र पर डालकर किसी नली के द्वारा फूंक मार दें ! उसी समय रोगी को चेतना आ जाएगी !!

              *प्रयोग २ : सन्यासी धूनी !!*

खटमल नाम का कीड़ा जो प्राय: चारपाई में पाया जाता है ! उन्हे पकड़ पकड़ कर एक रुमाल में मारते जाएं ! जब रुमाल खटमल के रक्त से लाल हो जाए ! तब सुखाकर रख लें ! जब कभी मिर्गी का रोगी मिले तो रुमाल से २*२ इंच का टुकड़ा काटकर उस टुकड़े की बत्ती बना लें ! और बत्ती पर आग लगाकर उसका धुँवा रोगी की नाक पर पहुंचाएं ! रोगी तत्क्षण स्वस्थ हो जायेगा ! दूबारा जब कभी रोगी को ऐसा दौरा पड़े तो फिर वही क्रिया करें ! ऐसा तीन चार बार करने पर रोगी हमेसा के लिये मिर्गी रोग से मुक्त हो जायेगा !!

               *प्रयोग ३ : फकीरी योग !!*

यह नुस्खा है तो बहोत ही प्रभावी पर रोगी को बिना बताए ही करना होगा ! ईश्वर कृपा से दो तीन बार में ही रोगी को मिर्गी रोग से हमेसा की मुक्ति मिल जायेगी ! और फिर कभी दोबारा नही होगा !!
एक नग गधे की लीद ताजा निचोड़ कर उसका पानी निकाल लें ! औऱ दौरे के समय रोगी को पिला दें ! रोगी तत्काल होश में आकर सदा के लिये रोग मुक्त हो जायेगा !!

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
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बच्चेदानी में सूजन का कारण और उपचार 

🌹✍🏻    बच्चेदानी में सूजन का कारण और उपचार    ✍🏻🌹

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तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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मेरा you tube चेनल लिंक

https://youtu.be/o44hMuMc7K4

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बच्चेदानी में सूजन का कारण और उपचार
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कई बार महिलाओं की बच्चेदानी(Uterus)में सूजन आ जाती है बदलते वातावरण या मौसम का प्रभाव गर्भाशय(Uterus)को अत्यधिक प्रभावित करता है जिससे प्रभावित होने पे महिलाओं को बहुत कष्ट उठाना पड़ता है इसके प्रभाव से भूंख नही लगती है सर-दर्द-हल्का बुखार या कमर-दर्द-और पेट दर्द की समस्या रहती है-

गर्भाशय(Uterus)की सूजन क्या कारण है-
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1- पेट की मांसपेशियों में अधिक कमजोरी आ जाने के कारण तथा व्यायाम न करने के कारण या फिर अधिक सख्त व्यायाम करने के कारण भी गर्भाशय(Uterus)में सूजन(Swelling)हो सकती है-

2- पेट में गैस तथा कब्ज बनने के कारण गर्भाशय(Uterus)में सूजन हो जाती है-

3- औषधियों(Medicine)का अधिक सेवन करने के कारण भी गर्भाशय(Uterus)में सूजन हो सकती है-

4- जरुरत से जादा अधिक सहवास(Sexual Intercourse)करने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है-

5- भूख से अधिक भोजन सेवन करने के कारण स्त्री के गर्भाशय में सूजन आ जाती है तथा अधिक तंग कपड़े पहनने के कारण भी गर्भाशय(Uterus)में सूजन(Swelling)हो सकती है-प्रसव के दौरान सावधानी न बरतने के कारण भी गर्भाशय में सूजन हो सकती है-

गर्भाशय में सूजन(Swelling)का उपचार-
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1- गर्भाशय(Uterus)में सूजन से पीड़ित महिला को चटपटे मसालों-मिर्च-तली हुई चीजें और मिठाई से परहेज रखना चाहिए-

2- पीड़ित स्त्री को दो तीन बार अपने पैर कम से कम एक घंटे के लिए एक फुट ऊपर उठाकर लेटना चाहिए और आराम करना चाहिए-

3- गर्भाशय(Uterus)में सूजन(Swelling)हो जाने पर महिला रोगी को चार-पांच दिनों तक फलों का जूस पीकर उपवास करना चाहिए- उसके बाद बिना पका हुआ संतुलित आहार लेना चाहिए-

4- निर्गुण्डी को किसी भी प्रकार के बाहरी भीतरी सूजन के लिए इसका उपयोग किया जाता है यह औषधि वेदना शामक और मज्जा तंतुओं को शक्ति देने वाली है वैसे आयुर्वेद में सुजन उतारने वाली और भी कई औषधियों का वर्णन आता है पर निर्गुण्डी इन सब में अग्रणी है और सर्वसुलभ भी-नीम,(निर्गुन्डी) सम्भालु के पत्ते और सोंठ सभी का काढ़ा बनाकर जननांग में लगाने से सुजन ख़त्म हो जाती है-

5- बादाम रोगन एक चम्मच, शरबत बनफ्सा तीन चम्मच और खांड पानी में मिलाकर सुबह पीयें तथा बादाम रोगन का एक रुई का फोया जननांग के मुह पर रखें-इससे गर्मी के कारण गर्भाशय(Uterus)में सूजन ठीक हो जाती है-

6- अरंड के पत्तों का रस छानकर रुई में भिगोकर जननांग में लगाने से भी सूजन ख़त्म हो जाती है-

7- अशोक की छाल 120 ग्राम, वरजटा, काली सारिवा, लाल चन्दन, दारूहल्दी, मंजीठ प्रत्येक को 100-100 ग्राम मात्रा, छोटी इलायची के दाने और चन्द्रपुटी प्रवाल भस्म 50-50 ग्राम, सहस्त्रपुटी अभ्रक भस्म 40 ग्राम, वंग भस्म और लौह भस्म 30-30 ग्राम तथा मकरध्वज गंधक जारित 10 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी औषधियों को कूटछानकर चूर्ण तैयार कर लेते हैं फिर इसमें क्रमश: खिरेंटी, सेमल की छाल तथा गूलर की छाल के काढ़े में 3-3 दिन खरल करके 1-1 ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लेते हैं फिर इसे एक या दो गोली की मात्रा में मिश्रीयुक्त गाय के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए-इसे लगभग एक महीने तक सेवन कराने से स्त्रियों के अनेक रोगों में लाभ मिलता है-इससे गर्भाशय में सूजन(Swelling)जलन, रक्तप्रदर, माहवारी के विभिन्न विकार या प्रसव के बाद होने वाली दुर्बलता इससे नष्ट हो जाती है-

8- एरण्ड(अंडी)के पत्तों का रस छानकर रूई भिगोकर गर्भाशय के मुंह पर तीन-चार दिनों तक रखने से गर्भाशय में सूजन मिट जाती है-

9- कासनी की जड़, गुलबनफ्सा और वरियादी 6-6 ग्राम की मात्रा में, गावजवां और तुख्म कसुम 5-5 ग्राम, तथा मुनक्का 6 या 7 को एक साथ बारीक पीसकर उन्हें 250 ग्राम पानी के साथ सुबह-शाम को छानकर पिला देते हैं यह उपयोग नियमित रूप से आठ-दस दिनों तक करना चाहिए-इससे गर्भाशय(Uterus)में सूजन रक्तस्राव, श्लैष्मिक स्राव(बलगम, पीव)आदि में पर्याप्त लाभ मिलता है-

10- चिरायते के काढ़े से योनि को धोएं और चिरायता को पानी में पीसकर पेडू़ और योनि पर इसका लेप करें इससे सर्दी की वजह से होने वाली गर्भाशय(Uterus)की सूजन(Swelling) नष्ट हो जाती है-

11- रेवन्दचीनी को 15 ग्राम की मात्रा में पीसकर आधा-आधा ग्राम पानी से दिन में तीन बार लेना चाहिए-इससे गर्भाशय की सूजन मिट जाती है-
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जामुन(Jamun)का आसव-सिरका-जाम्बु द्राव व शर्बत बनाने की विधि-   

🌹✍🏻     जामुन(Jamun)का आसव-सिरका-जाम्बु द्राव व शर्बत बनाने की विधि-    ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

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जामुन(Jamun)का आसव-सिरका-जाम्बु द्राव व शर्बत बनाने की विधि-
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वर्षाऋतु का अमृतफल-जामुन को कहा गया है बुद्ध धर्म मे भी जामुन के पेड़ को पवित्र मानते है और इसके पंचांग का उपयोग तिबब्बत चिकित्सा शास्त्र में कई योगों के रूप में किया गया है भारत मे जामुन की दो किस्में पाई जाती है एक बड़े फल जिसको राज जामुन और एक छोटा फल जिसको शूद्र जामुन कहा जाता है-

जामुन में एक विदेशी किस्म भी होती है जिसके फल बड़े, गोलाकार गुलाबी रंग के गुठली रहित होते है और जिससे गुलाब के फूल की हल्की खुशबू आती है यह प्रजाति खास कर ब्रह्म देश और बंगाल में पाई जाती है-

देशी जामून(बड़े)के आयुर्वेदिक में बड़े गुणगान लिखे है चरक ने जामुन फल और पेड़ की छाल को मूत्र संग्रहक, पुरीशवीरजनिय तथा वातजनक कहा है सुश्रुत के अनुसार जामुन रक्तपित्तहर, दाहनाशक, योनिदोषहर, वर्ण्य याने शरीर की कांति सुधारने वाला कहा है-

वैद्य माधव के अनुसार जामुन अतिसार, रक्तातिसार, कोलेरा, रक्तपित्त, लिवर जनित रोग तथा रक्तजन्य विकारों को दूर करने वाला अमृत फल है तो चलिए आज हम आपको जामुन फल से आसव, सिरका, जाम्बु द्राव व शर्बत बनाने की विधि बताएंगे-

जामुनासव-
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पके जामुन का रस -3200 ग्राम
पुराना गुड़ -1200 ग्राम
हरड़े- 20 ग्राम
बहेड़ा -20ग्राम
आंवला-20 ग्राम
नागरमोथा-20 ग्राम
वावडिंग-20 ग्राम
सोंठ -20ग्राम
काली मिर्च-20 ग्राम
पिप्पली-20ग्राम
अजवाइन-20ग्राम
नसोतर-20 ग्राम
पिपलीमुल-20 ग्राम
सेंधा नमक -60ग्राम

बनाने की विधि-
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एक चीनीमिट्टी के बर्तन में जामुन का रस और गुड़ मिक्स करके मिलाए तथा अब ऊपर दिए गए औषधियो का मोटा-मोटा जौकूट चूर्ण मिला दे अच्छे से हिलाकर बर्तन को अच्छे से बन्द करके 31 दिन के लिए रख ले जब 31 दिन में आसव परिवक्व हो जाए तब छान कर रख ले यह जम्बूआसव सारे शुलरोग व उदररोगो में रामबाण इलाज है-

जामुन का सिरका-
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पके हुये जामुन का रस- 1 लीटर

इस रस को किसी कांच के साफ बर्तन में भर दे और रोग इसे कपड़ छन करे एक हफ्ते तक फिर दूसरे हफ्ते में 2 बार कपड़छन करे तथा तीसरे हफ्ते में सिर्फ एक बार कपड़छन करे और चौथे हफ्ते अगर रस पर फफूंद दिखे तो एक बार कपड़छन करे-यह क्रिया एक महीने की है इस दौरान सावधानी रखनी है कि कपड़छन करने वाला कपड़ा गीला ना हो अन्यथा सिरका खरांब हो जाता है इस प्रकार जामुन का सिरका तैयार होता है-

इस सिरके को 5ml समभाग पानी के साथ सेवन करने से अपचन, उदरशूल, आफरा, कोलेरा, खट्टी डकारें आदि मिटती है यह सिरका पेट के रोग, स्प्लीन, लिवर, मंदाग्नि , मधुमेह और् पेशाब सम्भन्धित रोगों पर अचूक औषध है-

जाम्बुद्राव-
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600 ग्राम बड़े पके जामुन को मसल कर उसका रस निकाल ले अब उसमे 100 ग्राम सेंधानमक डालकर कांच की शीशी में भर ले तथा इस शीशी को मजबूत बन्द करके 7 दिन रख दे फिर आठवे दिन जाम्बुद्राव तैयार हो जाएगा-यह जाम्बुद्राव दिन में 3 बार 5-5 ग्राम की मात्रा में पीने से समस्त उदर-रोगो में राहत मिलती है-

यह जाम्बुद्राव सुबह खाली पेट 2 महीने पीने से यकृत की कार्यक्षमता सुधरती है तथा लिवर की सूजन, लिवर बढ़ना, प्लीहोदर तथा पीलिया में राहत मिलती है-

जाम्बु का शर्बत-
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जाम्बु रस- 1 लीटर
शक्कर- 2500 ग्राम

दोनों को मिलाकर ,उबालकर चासनी बना ले।इसे ठंडा करके छान कर बोटलो में भर ले 20 से 25 ml शर्बत 100 ml पानी मिलाकर बच्चों को पिलाने से बच्चों के अपचन व उल्टी में राहत मिलती है तथा पीलिया व कोलेरा जैसी बीमारियों से बचाव होता है।

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सुन्नपन(Numbness)का शरीर में होना  

🌹✍🏻    सुन्नपन(Numbness)का शरीर में होना    ✍🏻🌹

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सुन्नपन(Numbness)का शरीर में होना
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कभी बैठे-बैठे या काम करते हुए आपके शरीर का कोई अंग या त्वचा सुन्नपन(Numbness)हो जाता है कुछ लोग देर तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करते या पढ़ते-लिखते रहते हैं इस कारण रक्त वाहिनीयों तथा मांसपेशियों में शिथिलता आ जाने से शरीर में सुन्नपन हो जाता है शरीर के किसी अंग के सुन्न होने का प्रमुख कारण वायु का कुपित होना है इसी से वह अंग भाव शून्य हो जाता है ये खून के संचरण में रुकावट पैदा होने से सुन्नता आती है यदि शरीर के किसी विशेष भाग को पूरी मात्रा में शुद्ध वायु नहीं मिलती तो भी शरीर का वह भाग सुन्न पड़ जाता है-

जो अंग सुन्न(Numbness)हो जाता है उसमें हल्की झनझनाहट होती है और उसके बाद लगता है कि वह अंग सुन्न हो गया है तब सुई चुभने की तरह उस अंग में धीरे-धीरे लपकन-सी पड़ती है लेकिन दर्द नहीं मालूम पड़ता है-

सुन्नपन(Numbness)होने पर करे ये उपाय-

1- सुबह के समय शौच आदि से निपट कर सोंठ तथा लहसुन की दो कलियों को चबाकर ऊपर से पानी पी लें और यह प्रयोग आठ-दस दिनों तक लगातर करने से सुन्नपन(Numbness)स्थान ठीक हो जाता है-

2- पपीते या शरीफे के बीजों को पीसकर सरसों के तेल में मिलाकर सुन्नपन होने वाले अंगों पर धीरे-धीरे मालिश करें-

3- पीपल के पेड़ की चार कोंपलें सरसों के तेल में मिलाकर आंच पर पकाएं और फिर छानकर इस तेल को काम में लाएं-

4- तिली के तेल में एक चम्मच अजवायन तथा लहसुन की दो पूतियां कुचलकर डालें और फिर तेल को पकाकर और छानकर शीशी में भर लें इस तेल से सुन्नपन(Numbness)स्थान की मालिश करें-

5- बादाम का तेल मलने से सुन्न स्थान ठीक हो जाता है-बादाम घिसकर लगाने से त्वचा स्वाभाविक हो जाती है-

6- सोंठ, पीपल तथा लहसुन-सभी बराबर की मात्रा में लेकर सिल पर पानी के साथ पीस लें और फिर इसे लेप की तरह सुन्नपन(Numbness)स्थान पर लगाएं-

7- कालीमिर्च तथा लाल इलायची को पानी में पीसकर त्वचा पर लगाएं-

8- 100 ग्राम नारियल के तेल में 5 ग्राम जायफल का चूर्ण मिलाकर त्वचा या अंग विशेष पर लगाएं-

9- एक गांठ लहसुन और एक गांठ शुंठी पीस लें इसके बाद पानी में घोलकर लेप बना लें तथा इस लेप को त्वचा पर लगाएं-

10- रात को सोते समय तलवों पर देशी घी की मालिश करें इससे पैर का सुन्नपन खत्म हो जाएगा-

11- 5 ग्राम चोपचीनी, 2 ग्राम पीपरामूल और 4 ग्राम मक्खन इन तीनों को मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें-

12- बेल की जड़, पीपल और चित्रक को बराबर की मात्रा में लेकर आधा किलो दूध में औटाएं और फिर रात को सोते समय उसे पी जाएं-

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पत्रांगासव

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पत्रांगासव
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यह एक क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो ख़ासकर महिलाओं के रोग ल्यूकोरिया में इस्तेमाल की जाती है. सफ़ेद प्रदर, रक्त प्रदर, धात गिरना या सफ़ेद पानी-लाल पानी आना, एक्सेस ब्लीडिंग, एनीमिया, भूख की कमी और कमज़ोरी जैसी प्रॉब्लम के लिए इसका प्रयोग किया जाता है, तो आईये जानते हैं इसका कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल -

यह आसव यानि लिक्विड है जो सिरप की तरह होती है. पत्रांगा नाम की बूटी मिला होने से इसका नाम पत्रांगासव रखा गया है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें कई सारी जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं जैसे -

पत्रांगा या पतंग काष्ठ, खैरसार, वासामूल, सेमल के फूल, बला, भिलावा, गुड़हल, शारिवा, आम्र बीज मज्जा, दारूहल्दी, रसौत, चिरायता, सफ़ेद जीरा, बेल, भांगरा, दालचीनी, केसर, लौंग सभी एक-एक भाग

द्राक्षा बीस भाग, धातकी सोलह भाग, शहद पचास भाग, चीनी सौ भाग और पानी 512 भाग का मिश्रण होता है. आयुर्वेदिक प्रोसेस आसव निर्माण विधि से इसका आसव या सिरप बनता है. रिष्ट से आसव बनाना आसान होता है, तो आईये संक्षेप में जान लेते हैं कि इसका आसव कैसे बनता है? -

आसव बनाने के लिए बताई गयी मात्रा में मिट्टी के बर्तन में पानी डालकर द्राक्षा, धातकी, चीनी और शहद सब मिक्स कर लें उसके बाद दूसरी जड़ी बूटियों का मोटा चूर्ण मिला देना होता है. अब बर्तन का ढक्कन सील कर 30 दिनों तक बाहर खुले आसमान में धुप में रख दिया जाता है. तीस दिनों के बाद इसे फ़िल्टर कर लिक्विड को काँच की बोतल में पैक कर रख लिया जाता है. यही आसव होता है.

पत्रांगासव के गुण -

पित्त, वातदोष नाशक, प्रदर नाशक, दीपन, पाचन, सुजन दूर करने वाला(Anti-inflammatory), Antimicrobial, रक्त स्तम्भक, Blood Purifier यानि खून साफ़ करने वाले गुणों से भरपूर होता है.

पत्रांगासव के फ़ायदे-

हर तरह के ल्यूकोरिया के लिए यह अच्छी दवा है. इसके अलावा पीरियड्स की प्रॉब्लम या Mestrual Disorder के लिए भी इसका इस्तेमाल करना चाहिए.

Dysmenorrhea, Excessive bleeding, एनीमिया और भूख की कमी में फ़ायदेमंद है.

यह पाचन शक्ति को ठीक करती है, खून साफ़ करती है और सफ़ेद पानी की समस्या और Menstrual प्रॉब्लम को दूर करती है.

यह एक बेहतरीन Uterine Tonic है, गर्भाशय की बीमारियों को दूर कर महिलाओं के स्वास्थ को इम्प्रूव करती है.

पत्रांगासव की मात्रा और सेवन विधि -

15 से 30 ML तक दिन में दो बार बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर खाना खाने के तुरंत बाद लेना चाहिए. इसे रोज़ तीन बार भी लिया जा सकता है डॉक्टर की सलाह से. इसके  साथ में 'पुष्यानुग चूर्ण' 'सुपारी पाक' 'मुक्ताशुक्ति भस्म' 'प्रवाल पिष्टी' के अलावा योगराज गुग्गुल, चंद्रप्रभा वटी जैसी ल्यूकोरिया में काम करने वाली दवा भी ले सकते हैं आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से. इसका इस्तेमाल करते हुवे खट्टी चीज़े, मिर्च-मसला, सॉफ्ट ड्रिंक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. प्रेगनेंसी में स्तनपान कराने वाली महिलायें इसका इस्तेमाल न करें. डाबर, बैद्यनाथ, पतंजलि, सांडू जैसी अनेकों कम्पनियाँ इसे बनाती हैं. आयुर्वेदिक दवा दुकान से  खरीद सकते है

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🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
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नाखून सड़ना ,पेरोनिसिया ,हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना.

  पेरोनिसिया  हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना. आयुर्वेदिक  मुलेठी 50ग्राम बडी सोफ 50 ग्राम  अच्छी हळदी 50 ग्राम  नीम पत्ते चुर्ण 50 ग्राम  ...