बुधवार, 17 जनवरी 2018

भस्मो के प्रयोग

🌹✍🏻     भस्मो के प्रयोग        ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

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विविध भस्मों के अनुभूत घरेलू प्रयोग

ऐसा कहा जाता हें की राख या भस्म सृष्टि के पञ्च तत्वों का सार हें और इसीलिए भगवान् शिव ने इसे अपने अंगो पर धारण किया है राख, विभूति या उदी कही जाने वाली भस्म को बहुत ही धार्मिक व औषधीय महत्व प्राप्त है जिस भी पदार्थ की जब भस्म बनाई जाती है तब सारा भाग जल कर जो अवशेष शेष बचते हें उसे ही भस्म कहा जाता हें जो मुख्य स्वरूप में पदार्थ के होने की तुलना में ज्यादा गुणकारी बन जाती है इसीलिए औषधि या जडी-बूटी से बेहद कम मात्रा में उपयोग करने पर भी भस्म उत्तम लाभ देती है-

आयुर्वेद में भस्मो से उपचार की विधि प्राचीन और शाश्त्रोक्त है भस्मे तुरंत असर करने वाली औषधि है लेकिन उचित मात्रा एवं शास्त्रोक्त उपयोग करने पर आयुर्वेदिक भस्मो का उत्तम लाभ प्राप्त होता है आयुर्वेद में धातु, खनिज, जड़ी-बूटियों और रत्नों से भस्म बनाई जाती है जो कई रोगों में चमत्कारिक लाभ करती हें लेकिन आज ह्म आपको हर्बल चिकित्सा में प्रयोग किये जाने वाले भस्मो के कुछ अनुभूत नुस्खे बताएँगे जो आप घर पर आसानी से कर सकते है व स्वास्थ लाभ पा सकते हैं-

कैसे बनाई जाए भस्म-

जिस भी पदार्थ या औषधीय जड़ी बूटी की भस्म बनानी है उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें या कूट ले अब लोहे की कढ़ाई में धीमी आंच पर इसे भून ले भूनकर यह औषधि पहले गुलाबी फिर लाल और फिर काली पड़ने लगे तब तक इसे भूनते रहना है जब औषधि काली पड़ जाए तथा चूर्ण बनने लगे तब इसे किसी पात्र में निकाल लेना है ठंडा होने पर इसे खरल करके अच्छे से चूर्ण बना लेना है तथा सूती कपड़े से छानकर किसी साफ बर्तन में या शीशी में इसे भर लेना है-

विविध भस्मों के अनुभव घरेलू प्रयोग-

1- बरगद के कोमल पत्तों को की भस्म को तिल के तेल में मिलाकर खाज खुजली तथा एक्जिमा पर लगाने से त्वचा रोगों में आराम मिलता है-

2- नारियल की छाल या जटा लेकर उसे धूप में 1 दिन सुखा लें फिर इसे मिट्टी के बर्तन में भूनकर इसकी भस्म बना ले इस भस्म को 3 ग्राम की मात्रा में गाय के मीठे दही के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से बवासीर के मस्सों में राहत मिलती है, मस्सों का आकार कम हो जाता है तथा खूनी बवासीर में लाभ मिलता है यह प्रयोग रक्तप्रदर में भी उत्तम लाभ है-

3- आंवले की गुठली या बीज को अच्छे से धो कर सुखा कर उसकी भस्म बनाकर यह भस्म नारियल तेल में खूब खरल करके मरहम जैसा बना ले यह मरहम एक्जिमा दाद खाज खुजली पर लगाने से खाज खुजली की समस्या दूर होती है-

4- मयूर पंख की भस्म को शहद के साथ चाटने से (हीक्का रोग) यानी हिचकी आना बंद होता है एक रत्ती मयूरपंख की भस्म को तीन रत्ती सहद के साथ लेने से श्वास दमा में राहत मिलती है किसी भी ऑपरेशन के बाद होने वाली उल्टी तथा हिचकियों में मयूर पंख की बस उत्तम औषधि है-

5- बरगद के पत्ते साफ करके धुप में अच्छे से सुखा लें उन पत्तों पर अलसी का तेल लगाकर उसे जला कर राख बना ले इस राख को 4 गुना अलसी के तेल में मिलाकर रात को सर में जहां बाल उड़ गए हो या बाल कम हो गए हो वहां लगाकर मालिश करने से झड़े हुए बाल वापस आते हैं तथा बाल झड़ना भी कम हो जाता है-

6- केले के पत्तों को जलाकर भस्म बनाकर यह भस्म 5-5 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार शहद के साथ चाटने से कुकुर खांसी में राहत मिलती है-

7- बादाम के छिलकों को जलाकर उसकी भस्म बनाकर उस भस्म से दांत मांजने से दांतों की जड़ें मजबूत होती है अगर उसमें हल्दी व सेंधा नमक मिलाया जाए तो पायरीया जैसी समस्याओं में भी लाभ मिलता है-

8- खारीक या खजूर की गुठली को जलाकर उसकी भस्म में कपूर तथा हींग मिलाकर पानी से लेप बना ले यह लेप दाद खाज खुजली पर लगाने से लाभ होता है-

9- आवला को जलाकर उसकी भस्म तिल के तेल में मिलाकर पूरे शरीर की मालिश करने से तथा धूप स्नान करके उसके बाद स्नान करने से शरीर की खुजली तथा त्वचा रोग  मिटते हैं-

10- तूअर के पत्ते या फली को जलाकर भस्म बनाकर दही में मिलाकर लगाने से खरुज तथा दद्रु रोग मिटता है-

11- हल्दी को जलाकर उसकी राख तथा चूने को मिलाकर फोड़े पर लेप करने से फ़ोड़ा फुटकर मवाद जल्दी बाहर निकल जाता है तथा त्वचा पर इसके निशान भी नहीं रहते हैं-

12- चक्रमर्द के बीज को भूनकर उसकी भस्म बनाकर उससे चाय बनाकर पीने से रक्तविकार दूर होते हैं फ़ोड़े, खाज खुजली, कील मुहांसे जैसी समस्या मिटती है-

13- आम के पत्तों की भस्म बनाकर उसे घी के साथ खरल करके मुलायम मलहम जैसा बना लें इसे जले हुए स्थान पर लगाने से तुरंत राहत मिलती है वह जले के निशान भी त्वचा पर नहीं रहते-

14- भुट्टे में से मकई के दाने निकाल कर खाली भुट्टे को जलाकर उसकी भस्म बना लें तथा कपड़छन करके यह भस्म एक-एक  ग्राम की मात्रा में सुबह शाम पानी से लेने दे पथरी का दर्द तथा कष्ट मूत्र जैसी समस्याएं दूर होती है-

15- कुलथी को भूनकर उसकी भस्म बनाकर उस में गुड़ डालकर पीने से पित्त प्रकोप से हुई त्वचा संबंधी तकलीफें दूर होती है-

16- अनार के पत्तों को तथा अनार की छाल को जलाकर राख बना लें इस राख को घी मैं खरल करके मुलायम मरहम बना ले यह मरहम अर्श मस्सो पर बांधने से बवासीर के मस्से दूर होते हैं इस राख को पानी में घोलकर इससे गुदाद्वार साफ करने से भी बवासीर की समस्या में लाभ होता है-

17- एक रोटी जलाकर राख कर लें फिर आधे गिलास पानी में डाल दें रोटी घुल जायेगी तब उसका ऊपर ऊपर का पानी पिला दें यह उलटी की रामबाण दवा है-

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

पत्रांगासव

🌹✍🏻         पत्रांगासव         ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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यह एक क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो ख़ासकर महिलाओं के रोग ल्यूकोरिया में इस्तेमाल की जाती है. सफ़ेद प्रदर, रक्त प्रदर, धात गिरना या सफ़ेद पानी-लाल पानी आना, एक्सेस ब्लीडिंग, एनीमिया, भूख की कमी और कमज़ोरी जैसी प्रॉब्लम के लिए इसका प्रयोग किया जाता है, तो आईये जानते हैं इसका कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल -

यह आसव यानि लिक्विड है जो सिरप की तरह होती है. पत्रांगा नाम की बूटी मिला होने से इसका नाम पत्रांगासव रखा गया है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें कई सारी जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं जैसे -

पत्रांगा या पतंग काष्ठ, खैरसार, वासामूल, सेमल के फूल, बला, भिलावा, गुड़हल, शारिवा, आम्र बीज मज्जा, दारूहल्दी, रसौत, चिरायता, सफ़ेद जीरा, बेल, भांगरा, दालचीनी, केसर, लौंग सभी एक-एक भाग

द्राक्षा बीस भाग, धातकी सोलह भाग, शहद पचास भाग, चीनी सौ भाग और पानी 512 भाग का मिश्रण होता है. आयुर्वेदिक प्रोसेस आसव निर्माण विधि से इसका आसव या सिरप बनता है. रिष्ट से आसव बनाना आसान होता है, तो आईये संक्षेप में जान लेते हैं कि इसका आसव कैसे बनता है? -

आसव बनाने के लिए बताई गयी मात्रा में मिट्टी के बर्तन में पानी डालकर द्राक्षा, धातकी, चीनी और शहद सब मिक्स कर लें उसके बाद दूसरी जड़ी बूटियों का मोटा चूर्ण मिला देना होता है. अब बर्तन का ढक्कन सील कर 30 दिनों तक बाहर खुले आसमान में धुप में रख दिया जाता है. तीस दिनों के बाद इसे फ़िल्टर कर लिक्विड को काँच की बोतल में पैक कर रख लिया जाता है. यही आसव होता है.

पत्रांगासव के गुण -

पित्त, वातदोष नाशक, प्रदर नाशक, दीपन, पाचन, सुजन दूर करने वाला(Anti-inflammatory), Antimicrobial, रक्त स्तम्भक, Blood Purifier यानि खून साफ़ करने वाले गुणों से भरपूर होता है.

पत्रांगासव के फ़ायदे-

हर तरह के ल्यूकोरिया के लिए यह अच्छी दवा है. इसके अलावा पीरियड्स की प्रॉब्लम या Mestrual Disorder के लिए भी इसका इस्तेमाल करना चाहिए.

Dysmenorrhea, Excessive bleeding, एनीमिया और भूख की कमी में फ़ायदेमंद है.

यह पाचन शक्ति को ठीक करती है, खून साफ़ करती है और सफ़ेद पानी की समस्या और Menstrual प्रॉब्लम को दूर करती है.

यह एक बेहतरीन Uterine Tonic है, गर्भाशय की बीमारियों को दूर कर महिलाओं के स्वास्थ को इम्प्रूव करती है.

पत्रांगासव की मात्रा और सेवन विधि -

15 से 30 ML तक दिन में दो बार बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर खाना खाने के तुरंत बाद लेना चाहिए. इसे रोज़ तीन बार भी लिया जा सकता है डॉक्टर की सलाह से. इसके  साथ में 'पुष्यानुग चूर्ण' 'सुपारी पाक' 'मुक्ताशुक्ति भस्म' 'प्रवाल पिष्टी' के अलावा योगराज गुग्गुल, चंद्रप्रभा वटी जैसी ल्यूकोरिया में काम करने वाली दवा भी ले सकते हैं आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से. इसका इस्तेमाल करते हुवे खट्टी चीज़े, मिर्च-मसला, सॉफ्ट ड्रिंक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. प्रेगनेंसी में स्तनपान कराने वाली महिलायें इसका इस्तेमाल न करें. डाबर, बैद्यनाथ, पतंजलि, सांडू जैसी अनेकों कम्पनियाँ इसे बनाती हैं. आयुर्वेदिक दवा दुकान से  खरीद सकते है

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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यार्सागुम्बा

🌹✍🏻        यार्सागुम्बा         ✍🏻🌹

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तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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यार्सागुम्बा को हिमालयन वियाग्रा भी कहा जाता है अंग्रेज़ी में इसे Cordiceps कहते हैं, जबकि इसका पूरा नाम Cordiceps Sinesis है. इसे ख़ासकर पॉवर, स्टैमिना और सेक्सुअल पॉवर बढ़ाने के लिए यूज़ किया जाता है. यह चमत्कारी गुणों से भरपूर औषधि है और इसके कई सारे दुसरे फ़ायदे भी हैं, तो आईये जानते हैं यार्सागुम्बा या हिमालयन वियाग्रा के बारे में  पूरी डिटेल - 

यार्सागुम्बा हिमालयन एरिया में पाया जाता है, नेपाल, चीन, तिब्बत जैसे देशों में मिलता है. 

इसे कई नामों से जाना जाता है यार्सागुम्बा इसका तिब्बतियन नाम है. अंग्रेज़ी में इसे Cordiceps Sinesis, Caterpillar Fungus, Caterpillar Mushroom और Chinese Caterpillar Fungus जैसे नामों से जाना जाता है. नेपाली में इसे किरा झार या कीड़ा झार कहा जाता है. 

यह एक तरह का फंगस है जिसे कीड़ा और मशरूम का मिश्रण कह सकते हैं. जैसा कि इसे देखने से ही पता चलता है इसके रूट या जड़ की तरफ कीड़ा है जबकि ऊपर का भाग फंगस या एक तरह का मशरूम है. यह बहुत ही रेयर होता है, जिसकी वजह से काफी महँगा भी है. सूखे हुवे यार्सागुम्बा की बहुत डिमांड होती यौन शक्तिवर्धक दवा के रूप में. इसके एक किलो की क़ीमत 60 लाख रुपया से भी ज़्यादा है. 

यार्सागुम्बा कई तरह के विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर होता है, इसमें विटामिन बी -1, विटामिन बी -2, विटामिन बी- 12, विटामिन K जैसे विटामिन्स के अलावा कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. 

यार्सागुम्बा के औषधीय गुण - 

यह एक बेहतरीन यौन शक्ति वर्धक, पॉवर-स्टैमिना बढ़ने वाला, टॉनिक, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी एजिंग, एंटी ट्यूमर, एंटी कैंसर, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है. 

यार्सागुम्बा या हिमालयन वियाग्रा के फ़ायदे - 

यौन शक्ति बढ़ाने के लिए वियाग्रा की तरह ही इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है. शीघ्रपतन, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, इम्पोटेंसी में बेहद असरदार है. पॉवर और स्टैमिना बढ़ाने के लिए यह दुनियाभर में पोपुलर है. 

यह टॉनिक की तरह भी काम करता है, शारीरिक कमज़ोरी, थकान, चिंता- तनाव को दूर करता है. 

एंटी एजिंग है, बुढ़ापे के लक्षणों को कम करता है चुस्ती-फुर्ती लाता है और इम्युनिटी पॉवर को बढ़ाता है. 

दिल, दिमाग, नर्वस सिस्टम और फेफड़ों को तकत देता है, मेमोरी लॉस, खाँसी, ब्रोंकाइटिस में फ़ायदेमंद है.

खून की कमी को दूर करता है, कोलेस्ट्रॉल कम करता है.

किडनी और ब्लैडर की बीमारियों में भी इफेक्टिव है, रात में बार-बार पेशाब होना और किडनी फेलियर में फ़ायदेमंद है. 

यार्सागुम्बा के इस्तेमाल से महिलाओं में यौनेक्षा की कमी दूर होती है. कुल मिलाकर देखा जाये तो यह न सिर्फ पॉवर और स्टैमिना को बढ़ाता है बल्कि टॉनिक और हेल्थ सप्लीमेंट की तरह भी काम करता है. 

यार्सागुम्बा का डोज़ और इस्तेमाल करने का तरीका- 

250 mg से 1.5 ग्राम तक रोज़ दो बार खाना खाने के दो-तीन घंटे के बाद पानी से  लेना चाहिए. इसका डोज़ पाचन शक्ति और बॉडी की कंडीशन पर डिपेंड करता है. इसे कई लोगों में शुरू में ज़्यादा डोज़ भी दिया जाता है एक हफ्ते तक, उसके बाद नार्मल Maintaining डोज़. इसे मैक्सिमम तीन महीने तक यूज़ कर सकते हैं. 

यार्सागुम्बा का साइड इफ़ेक्ट - 

इसे ऑलमोस्ट सेफ़ दवा माना जाता है पर हर किसी यह सूट नहीं करती. पेट की ख़राबी, डायरिया, चक्कर, सर दर्द और मुँह सुखना जैसी प्रॉब्लम हो सकती है, अगर आपको यह सूट न करे. 

इसका कैप्सूल और टेबलेट मार्केट में मिल जाता है,




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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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कील मुहाँसे और फुंसी के 100% सफल चिकित्सा

🌹✍🏻      कील मुहाँसे और फुंसी के 100% सफल चिकित्सा            ✍🏻🌹

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तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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कील मुहाँसे और फुंसी के 100% सफल चिकित्सा

गोरखमुंडी 100 ग्राम ले। ये जड़ी बूटी बेचने वालों से
आसानी से मिल जाती है।
इसे पीस ले। आसानी से पीस जाती है।
1 कप पानी को उबाले। उबलते पानी मे एक चम्मच गोरखमुंडी
का पाउडर डाल दे।
बर्तन को ढक दें। आंच बंद कर दे।
5 मिनट बाद छान कर पी ले। सुबह शाम 2 समय ले। यदि कड़वी
दवा न पी सके तो मीठा मिला ले। यदि कब्ज भी हो तो
आरोग्यवर्धिनी वटी (दिव्य फार्मेसी ) 1/2 ग्राम पानी के
साथ सोते समय ले।
7-8 दिन मे मुहासे गायब हो जाएंगे। दवा 1 महिना ले ।
यदि ये दवा 6 महीने ले तो चश्मा उतर जाएगा। नजर कि
कमजोरी दूर हो जाएगी।
स्थायी लाभ के लिए हर दिन सुबह शीर्षासन करे 1-5 मिनट
तक।
लगाने के लिए Azithromycin Ointment लगाएँ।
कील मुहासों के स्थायी दाग हटाने के लिए कैशोर गुगुल (दिव्य
फार्मेसी ) 2-2 गोली गर्म पानी से ले। 6 महीने मे स्थायी दाग
भी हट जाएंगे।
चीनी +मैदा+चाय+अचार+इमली+ अमचूर न खाएं।
जिसे भी इस चिकित्सा से लाभ हो वह अपना अनुभव जरूर लिखें

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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सेव का सिरका

🌹✍🏻   सेव का सिरका               ✍🏻🌹

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- विनेगर या सिरका एसिटिक एसिड और पानी का मिश्रण
होता हैं.
- ये एसिडिक होकर भी शरीर को अल्कलाइन बनाता हैं.
- इसका उपयोग शरीर के pH बैलेंस को संतुलित करने के लिए
औषधि के रूप में किया जाता हैं.
- एक स्वस्थ्य मनुष्य शरीर में रक्त का ph 7.35-7.45 तक, थूक
का 6.5-7.5 तक, और मूत्र का 6-7 तक होता हैं. शरीर
को स्वास्थ्य होने के लिए sथोड़ा सा अल्कलाइन
होना चाहिए.
- यदि आपको थकान, पेट में एसिडिटी , अलसर, कमज़ोरी, काम में
मन ना लगना, तनाव, गुस्सा आना, दातो में ठंडा गरम लगना,
कब्ज़, किडनी प्रोब्लेम्स आदि जैसे लक्षण हैं तो आप का शरीर
एसिडिक हो सकता हैं. ph लेवल्स ठीक करने में विनेगर
काफी महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकता हैं.
- शराब का सेवन शरीर को एसिडिक करता हैं इसलिए शरीर
को डीटॉक्स करने के लिए विनेगर को इस्तेमाल
किया जा सकता है.
- इतना गुणकारी होने के बाद भी इसे सिर्फ चाऊमीन में डालते
ही देखा जाता हैं.
- एप्पल साइडर विनेगर में एसिटिक एसिड के साथ साथ
विटामिन्स , मिनरल्स , पेक्टिन,एमिनो एसिड्स आदि भी होते
है.
- पथरी होने पर एक गिलास पानी में 2-3 चम्मच सिरका डाल कर
इसका 2-3 हफ्ते सेवन किया जाए तो यह निकल जाएगा.
- यह पथरी के साथ होने वाली पेशाब में जलन में भी आराम
करता हैं.
- विनेगर के इस्तेमाल से ब्लड शुगर लेवल्स कम किये जा सकते हैं.
विनेगर के इस्तेमाल से ऐसे एंजाइम्स जो खाने में उपस्थित
कार्बोहायड्रेट को शुगर में बदलते हैं निष्क्रिय हो सकते हैं.
इसी वजह से शुगर लेवल को बढ़ने से रोका जा सकता हैं. इससे शरीर
की इन्सुलिन की जरुरत कम हो जाती हैं.
- एसिडिटी या गैस होने पर 1 गिलास पानी में 1-2 चम्मच विनेगर
डाल कर प्रयोग से इन सब में फायदा मिलता हैं.
- अगर खाने से पहले विनेगर का इस्तेमाल किया जाए तो ये भूख
बढ़ाता हैं, कब्ज़ को रोकता हैं हाज़मा ठीक करता हैं, इसके
अलावा खाने के बाद पेट भारी होना आदि जैसी समस्याओ में
मदद करता हैं.
- विनेगर का इस्तेमाल कैल्शियम का अवशोषण भी बढ़ाता हैं.
- विनेगर के इस्तेमाल से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रोल लेवल्स को कम
किया जा सकता हैं. इसके इस्तेमाल से हृदय धमनियों का कठोर
होना भी रोका जा सकता हैं.
- विनेगर के इस्तेमाल से चर्बी का बढ़ना रोका जा सकता हैं.
इसका इस्तेमाल करने से देखा गया हैं की ये लिवर सेल्स
को प्रोटेक्ट करता हैं और हमारे लिवर के लिए फायदेमंद होता हैं.
- गठिया: विनेगर का उपयोग गठिया में फायदा करता हैं. इसमें
मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम जैसे मिनरल्स होते
हैं जिनकी कमी से जोड़ो का दर्द होता हैं. ACV में उपस्थित
पोटैशियम ख़ास तौर पर कैल्शियम डिपॉजिट्स रोकने में मददगार
होता हैं जिसकी वजह से ही जोड़ो में अकडन होती हैं.
- यह शरीर को डीटॉक्स करता है.
- ACV को पानी में मिलकर जोड़ो पर लगाया जाए तो इससे
जोड़ो के दर्द में भी आराम मिलता हैं.
- क्योंकि विनेगर में एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी भी होती हैं
इसलिए इसका उपयोग और कही जगह किया जा सकता हैं अगर
सांस फूल राइ हो तो सिरके की भाप लेने से आराम मिलता है. ये
जमे हुए बलगम को ढीला करती हैं. - अगर गले में खराश और दर्द
हो तो पानी में सिरका मिलाकर गरारे करने से आराम मिलता हैं.
-पानी में विनेगर मिला कर लगाने से यह कील मुहासों में
भी आराम दिलाता हैं.
- अगर सब्ज़ियों को धोने में इसका इस्तेमाल किया जाए तो यह
ऐसे Pesticides भी निकल देता हैं जो पानी से धोने पर
नहीं निकल पाते और हमारे शरीर में जाते रहते हैं.
- इसके इस्तेमाल से भूख बढ़ती हैं, पेट का हाज़मा सही होता हैं,
कब्ज़ ठीक होती हैं, मिनरल्स का अब्सॉर्पशन अच्छा होता हैं,
पथरी नहीं बनती, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर ठीक रहता हैं, बॉडी के
Detoxification में हेल्प करता हैं, शरीर को अच्छा महसूस कराता हैं
और तो और कुछ खतरनाक बीमारी के खतरे से भी दूर करता हैं
तो इसे टॉनिक क्यों ना कहा जाए.
- ध्यान रखे की विनेगर का सेवन हमेशा पानी के साथ करे
कभी भी इससे सीधे न पिये, जब भी इसका सेवन करे उसके बाद
कुल्ला करे क्योंकि ये दांतो के संपर्क में आने पर उनका एनामेल
इरोड करता हैं.
- कुछ लोगो में ये एलर्जिक रिएक्शन भी कर सकता हैं.
- इसके अलावा कुछ दवाओ जैसे की पेशाब, कब्ज़, ब्लड प्रेशर, और
हृदय संबंधि आदि के साथ इसका प्रयोग दोनों में रासायनिक
प्रतिक्रिया पैदा कर सकता हैं.
- जिन्हे ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या हैं वो इसका इस्तेमाल
कम मात्रा में या फिर कैल्शियम के साथ ही करे.

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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गंधक तेल

🌹✍🏻    गंधक तेल     ✍🏻🌹

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गंधक का तेल बनाने के लिए 1 गज भर कपड़ा लेकर के उसको थूहर के दूध से भिगो के सुखा दें फिर आप के दूध से सुखा दें उन्हें इसी प्रकार से करें ऐसा 7 बार करें फिर गंधक को घी में मिलाकर के कपड़े पर मोटा लेप करते हैं और इस कपड़े को एक  बत्ती की तरह बना ले रोल करके और एक खूंटी पर टांग दें और उसमें आग जला दें आग नीचे से लगानी है नीचे एक बर्तन रख दें बर्तन में निचे तेल जमा हो जाएगा ।

गुण - इस तेल से दाद, खाज ,खुजली , में शर्तिया फायदा होता है प्रयोग करे और फायदा ले और दुसरो को भी दे

note- पथरी की दवा के लिए संपर्क करे चाहे कही भी पथरी हो शर्तिया ठीक करने होती है

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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श्वास रोग

🌹✍🏻    श्वास रोग               ✍🏻🌹
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योग - करंजवे का  गूदे 50 gm
       पिप्पली 90 gm
को पीस कर अदरख के रस में घुटाई करे और काली मिर्च के बराबर गोली बना ले और सुबह दो या तिन गोली गुनगुने पानी से ले

दूसरा योग -

आक की कली जो खिली न हो 100gm
पिप्पली 50gm
लाहौरी नमक 50 gm

इन तीनो को पीस कर जंगली बेरी के बराबर गोली बना ले
एक एक गोली प्रतिदिन सेवन करे

तीसरा योग - सीप को जलाकर उसकी भस्म को अदरक के रस में घोट कर चने के वराबर गोली बनाकर सेबन करे
note- सीप भस्म मार्केट में बनी बनाई भी मिल जायेगी

इस सभी दवाओ के साथ कनकासव के दो ढक्कन दवा बराबर पानी के साथ सेबन करे

कफ प्रवृत्ति की चीजो से परहेज रखे और पेट साफ़ रखे कब्ज न रहने दे

नोट- पथरी की दवा के लिए मुझसे संपर्क करे
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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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दर्द हर लाल तेल

🌹✍🏻     दर्द हर लाल तेल        ✍🏻🌹

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आवश्यक सामिग्री -
सरसों का तेल 250 gm
तारपीन का तेल 100 gm
लहसुन की कली 50 gm
रतजोत 20 gm
पुदीना सत्व 10 gm
अजवाइन सत्व 10gm
भीमसेनी कपूर 10 gm 

निर्माण विधि - सर्व प्रथम पुदीना सत्व , अजबाइन सत्व , कपूर को एक बोतल में बन्द  कर दे तीनों पानी हो जायेगी दूकान से लाये तो इन्हें इकट्ठा न करे या किसी बोतल में रख कर लाये ये आपका अमृत धारा बन जायेगी

फिर एक बर्तन में सरसों का तेल गर्म करे और निचे उतार ले फिर उसमे लहसुन पीस कर या कुचल कर तेलमें डाल दे और दुबारा गर्म करे और जब लहसुन जल जाए तो उतार ले और गर्म तेल में ही रतनजोत डाल दे और खूब मिलाये ये ध्यान रहे की बून्द ऊपर न गिर जाए तेल एक दम लाल हो जाएगा और तेल ठंडा होने पर इसमे अमृतधारा और तारपीन का तेल भी मिला दे और किसी बोतल में भर के रख दे बस दर्द नाशक तेल तैयार हो गया

प्रयोग बिधि - दर्द बाली जगह पर इसकी मालिस करे आराम मिलेगा

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🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
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नाखून सड़ना ,पेरोनिसिया ,हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना.

  पेरोनिसिया  हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना. आयुर्वेदिक  मुलेठी 50ग्राम बडी सोफ 50 ग्राम  अच्छी हळदी 50 ग्राम  नीम पत्ते चुर्ण 50 ग्राम  ...