शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

टोटके,-भाग-2.

विषेश टोटके,-भाग-2.
* सदा रसोई घर में बैठकर भी भोजन करने से मन प्रसन्न रहता है तथा मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद मिलता रहता है।
* अपने घर के मुख्य दरवाजे के ऊपर चांदी का स्वास्तिक लगाने से बुरी बलाओं से रक्षा होती है।
* पक्षियों- चीटियों को प्रतिदिन दाना खिलाने से घर में बरकत रहती है।
विद्यार्थी की स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए –
शनिवार से शनिवार तक नित्य रात को 12 बजे बच्चे की शिखा से 2-4 बाल काटकर इन्हें एकत्रित करके दरवाजे की चैखट पर जलाकर पैर से मसल देने से बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ जाती है।
स्मृति बढ़ाने का मंत्र-
"ॐ ऐं स्मृत्ये नमः" प्रातः सायं 1-1 माला का जाप।
* धन के लिए टोटका- शनिवार को सायं उड़द के दो दाने साबुत लेकर उनको पीपल के पत्ते पर रखकर दही व सिंदूर डालकर पीपल वृक्ष की जड़ में रख दें। यह मंत्र बोलकर-
।।ॐ ह्रीं मम कार्य सिद्धि कुरू-कुरू स्वाहा।।
यह क्रिया 21 दिन तक प्रतिदिन करते रहें। लौटते समय पीछे मुड़ कर नहीं देखें। धन लाभ अवश्य होगा।
- किसी को समारोह के लिए भोजन बनाना है तो भोजन से पहले एक बिछाकर ढंक दें तथा एक लकड़ी का कोयला बीच में छिपाकर रख दें। वहां घी का दीपक हर समय जलाते रहें तो सामान की कमी नहीं आयेगी।
* यदि घर में या दुकान में ब्रह्म मुहूर्त में झाडू दी जाय तो लक्ष्मी जी की सदा कृपा रहेगी व घर में सुख शांति।
कुत्ता काटने पर उपाय:

गुड़, सरसों का तेल, आक का दूध-इन सबको मिश्रित कर प्रभावित अंग पर लेप करने से विष समाप्त हो जाता है।
पागल कुत्ते का विष मिटाने का उपाय
-एक घृत कुमारी का पत्ता- सेंधा नमक पीसकर आग पर गर्म करके तीन दिन तक बांधने पर कुत्ते का विष नष्ट हो जाता है।
सभी प्रकार के विष का प्रभाव दूर करने का उपाय।
- हल्दी - दारूहल्दी, मंजिष्ठा तथा नागकेसर को पीसकर लेप लगा देने से कुत्ता का विष चला जाता है।
- करंजबीज व सरसों को तिल के साथ पीसकर प्रभावित अंग पर लेप करने से किसी भी विषैले कीट के विष का असर समाप्त हो जाता है।
- एरंड के तेल का लेप करने से भी सभी तरह के विष का असर दूर होता है।

दुर्भाग्य से छुटकारा पाना:

शनिवार को सरसों के तेल में बने, गेहूं के आटे के गुड़ के सात पूए व आक के फूल तथा सिंदूर एवं आटे से तैयार किया गया दीपक जलाकर अरन्डी के पत्ते पर रखकर रात्रि में किसी चैराहे पर रख दें तथा यह कहें कि हे ! मेरे दुर्भाग्य मैं तुम्हें यहीं पर छोड़कर जा रहा हूं। अब मेरे पास मत रहना, न मुझे कष्ट पहुंचाना। पीछे को मुड़ कर मत देखें।
जिस स्थान पर कीड़े, मकोड़े अधिक मात्रा में निकलते हों उस स्थान पर अपने बाएं पैर का जूता उल्टा करके रख दें। इस क्रिया से जो कीड़े मकोड़े हैं वह पुनः बिल में घुस जायेंगे।
किसान अश्लेषा नक्षत्र में कहीं से बरगद का पत्ता लाकर अपने अनाज के भंडार में रख दे तो अनाज का भंडार सदा भरा रहेगा व वृद्धि होगी।
सुदर्शन की जड़ और अपामार्ग की जड़ या फिर सफेद घुघनी की जड़ को यदि कोई ताबीज में रख कर अपनी पूजा स्थल में बांधकर रखता है तो उसकी शस्त्राघात से सदैव रक्षा रहेगी।

किसानों के लिए टोटका:
सफेद सरसों और बालू एक साथ मिलाकर खेत के चारों ओर डालने भरणी नक्षत्र में देशी पान का पत्ता लाकर उसे सुपारी व कत्थे से बीड़ा बनाकर जहां से वस्तु चोरी हुई है वहां पर रखने से चोरी का रहस्य खुल जाता है। सात दिन तक प्रतीक्षा करें।
1- जिसके शरीर में किसी भूत-प्रेत की आत्मा का वास है, यदि लहसुन के रस में हींग को घोलकर उसकी आंख में काजल की मोती लगा दी जाय अथवा नाक में उसे सूंघा दिया जाय तो ऊपरी बाधा तुरंत शरीर से निकल जाती है।
2- पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में बहेड़े का पचा लकर उसे घर में पूजा के स्थान पर रखने से उसके ऊपर घातक त्रांत्रिक क्रियायें नहीं चलती हैं अथवा मूठ आदि अथवा जो भूत पिशाचनी आदि को छेड़ते हैं वह देखते ही भाग जाती है।
3- पुनर्वसु नक्षत्र में मेहंदी की जड़ को लाकर उसको धूप दीप से पूजन कर अपने पास में रखने से आकर्षण होता है एवं शरीर स्वस्थ रहता है।
4- मघा नक्षत्र में पीपल की जड़ को लाकर उसको पवित्र कर धूप दीप देकर यह मंत्र बोलें "।। दुर्गे दुर्गे राक्षिणी स्वाहा।।" रात्रि में कोई बुरा स्वप्न व भयानक स्वप्न कभी नहीं दिखाई देगा।

तांत्रोत्क वनस्पति टोटके.

तांत्रोत्क वनस्पति टोटके.
छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत् जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं।हमारे आसपास पाए जाने वाले विभिन्न पेड़-पौधों के पत्तों, फलों आदि का टोटकों के रूप में उपयोग भी हमारी सुख-समृद्धि की वृद्धि में सहायक हो सकता है। यहां कुछ ऐसे ही सहज और सरल उपायों का उल्लेख प्रस्तुत है, जिन्हें अपना कर पाठकगण लाभ उठा सकते हैं।
बिल्व पत्र : अश्विनी नक्षत्र वाले दिन एक रंग वाली गाय के दूध में बेल के पत्ते डालकर वह दूघ निःसंतान स्त्री को पिलाने से उसे संतान की प्राप्ति होती है।
अपामार्ग की जड़ : अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ लाकर इसे तावीज में रखकर किसी सभा में जाएं, सभा के लोग वशीभूत होंगे।
नागर बेल का पत्ता : यदि घर में किसी वस्तु की चोरी हो गई हो, तो भरणी नक्षत्र में नागर बेल का पत्ता लाकर उस पर कत्था लगाकर व सुपारी डालकर चोरी वाले स्थान पर रखें, चोरी की गई वस्तु का पला चला जाएगा।
संखाहुली की जड़ : भरणी नक्षत्र में संखाहुली की जड़ लाकर तावीज में पहनें तो विपरीत लिंग वाले प्राणी आपसे प्रभावित होंगे।
आक की जड़ : कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय हेतु आर्द्रा नक्षत्र में आक की जड़ लाकर तावीज की तरह गले में बांधें।
दूधी की जड़ : सुख की प्राप्ति के लिए पुनर्वसु नक्षत्र में दूधी की जड़ लाकर शरीर में लगाएं।
शंख पुष्पी : पुष्य नक्षत्र में शंखपुष्पी लाकर चांदी की डिविया में रखकर तिजोरी में रखें, धन की वृद्धि होगी।
बरगद का पत्ता : अश्लेषा नक्षत्र में बरगद का पत्ता लाकर अन्न भंडार में रखें, भंडार भरा रहेगा।
धतूरे की जड़ : अश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ लाकर घर में रखें, घर में सर्प नहीं आएगा और आएगा भी तो कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
बेहड़े का पत्ता : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में बेहड़े का पत्ता लाकर घर में रखें, घर ऊपरी हवाओं के प्रभाव से मुक्त रहेगा।
नीबू की जड़ : उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में नीबू की जड़ लाकर उसे गाय के दूध में मिलाकर निःसंतान स्त्री को पिलाएं, उसे पुत्र की प्राप्ति होगी।
चंपा की जड़ : हस्त नक्षत्र में चंपा की जड़ लाकर बच्चे के गले में बांधें, बच्चे की प्रेत बाधा तथा नजर दोष से रक्षा होगी।
चमेली की जड़ : अनुराधा नक्षत्र में चमेली की जड़ गले में बांधें, शत्रु भी मित्र हो जाएंगे।
काले एरंड की जड़ : श्रवण नक्षत्र में एरंड की जड़ लाकर निःसंतान स्त्री के गले में बांधें, उसे संतान की प्राप्ति होगी।
तुलसी की जड़ : पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में तुलसी की जड़ लाकर मस्तिष्क पर रखें, अग्निभय से मुक्ति मिलेगी।
अपामार्ग या चिरचिंटा लटजीरा तंत्र:
इस वनस्पति को रवि-पुष्य नक्षत्र मे लाकर निम्न प्रयोग कर सकते हैं।
1. इसकी जड़ को जलाकर भस्म बना लें। फिर इस भस्म का नित्य गाय के दूध के साथ सेवन करें, संतान सुख प्राप्त होगा।
2. लटजीरे की जड़ अपने पास रखने से धन लाभ, समृद्धि और कल्याण की प्राप्ति होती है।
3. इसकी ढाई पत्तियों को गुड़ में मिलाकर दो दिन तक सेवन करने से पुराना ज्वर उतर जाता है।
4. इसकी जड़ को दीपक की भांति जला कर उसकी लौ पर किसी छोटे बच्चे का ध्यान केन्द्रित कराएं तो उस बच्चे को बत्ती की लौ में वांछित दृश्य दिखाई पड़ेंगे।
5. इसकी जड़ का तिलक माथे पर लगाने से सम्मोहन प्रभाव उत्पन्न हो जाता है।
6. इसकी डंडी की दातून 6 माह तक करने से वाक्य सिद्धि होती है।
7. इसके बीजों को साफ करके चावल निकाल लें और दूध में इसकी खीर बना कर खाएं, भूख का अनुभव नहीं होगा।
ग्रह पीड़ा निवारक मूल-तंत्र:
सूर्य: यदि कुंडली में सूर्य नीच का हो या खराब प्रभाव दे रहा हो तो बेल की जड़ रविवार की प्रातः लाकर उसे गंगाजल से धोकर लाल कपड़े या ताबीज में धारण करने से सूर्य की पीड़ा समाप्त हो जाती है। ध्यान रहे, बेल के पेड़ का शनिवार को विधिवत पूजन अवश्य करें।
चंद्र: यदि चंद्र अनिष्ट फल दे रहा हो तो सोमवार को खिरनी की जड़ सफेद डोरे में बांध कर धारण करें। रविवार को इस वृक्ष का विधिवत पूजन करें।
मंगल: यदि मंगल अनिष्ट फल दे रहा हो तो अनंत मूल या नागफनी की जड़ लाकर मंगलवार को धारण करें।
बुध: यदि बुध अनिष्ट फल दे रहा हो तो विधारा की जड़ बुधवार को हरे डोरे में धारण करें।
गुरु: यदि गुरु अनिष्ट फल दे रहा हो तो हल्दी या मारग्रीव केले (बीजों वाला केला) की जड़ बृहस्पतिवार को धारण करें।
शुक्र: यदि शुक्र अनिष्ट फल दे रहा हो तो अरंड की जड़ या सरफोके की जड़ शुक्रवार को सफेद डोरे में धारण करें।
शनि: यदि शनि अनिष्ट फल दे रहा हो तो बिच्छू (यह पौधा पहाड़ों पर बहुतायत में पाया जाता है) की जड़ काले डोरे में शनिवार को धारण करें।
राहु: यदि राहु अनिष्ट फल दे रहा हो तो सफेद चंदन की जड़ बुधवार को धारण करें।
केतु: यदि केतु अनिष्ट फल दे रहा हो तो असगंध की जड़ सोमवार को धारण करें।
मदार तंत्र:

श्वेत मदार की जड़ रवि पुष्य नक्षत्र में लाकर गणेश जी की प्रतिमा बनाएं और उसकी पूजा करें, धन-धान्य एवं सौभाग्य में वृद्धि होगा। यदि इसकी जड़ को ताबीज में भरकर पहनें तो दैनिक कार्यों में विघ्न बहुत कम आएंगे और श्री सौभाग्य में वृद्धि होगी।
गोरखमुंडी तंत्र:

मुंडी एक सुलभ वनस्पति है । इसम अलौ किक औ षधीय एवं तांत्रिक गुणों का समावेश है। इसे रवि पुष्य नक्षत्र में पहले निमंत्रण दे कर ले आएं। पूरे पौधे का चूर्ण बनाकर जौ के आटे में मिलाएं। फिर उसे मट्ठे म सान कर रोटी बनाएं और गाय के घी के साथ इसका सेवन करें, शरीर के अनेक दोष जिनमें बुढ़ापा भी शामिल है, दूर हो काया कल्प हो जाएगा और शरीर स्वस्थ, सबल और कांतिपूर्ण  रहेगा। हरे पौधे के रस की मालिश करने से शरीर की पीड़ा मिट जाती है। इसके चूर्ण का सेवन दूध के साथ करने से शरीर स्वस्थ एवं बलवान हो जाता है। इसके चूर्ण को रातभर जल के साथ भिगो कर प्रातः उससे सिर धोने से केशकल्प हो जाता है। इसके चूर्ण का नित्य सेवन करने से स्मरण, धारण, चिंतन और वक्तृत्व शक्ति की वृद्धि होती है।
श्यामा हरिद्रा:
काली हल्दी को ही श्यामा हरिद्रा कहते हैं। इसे तंत्र शास्त्र में गणेश-लक्ष्मी का प्रतिरूप माना गया है। श्यामा हरिद्रा को रवि पुष्य या गुरु पुष्य नक्षत्र में लेकर एक लाल कपड़े में रखकर षोडशोपचार विधि से पूजन करने का विधान है। इसके साथ पांच साबुत सुपारियां, अक्षत एवं दूब भी रखने चाहिए। फिर इस सामग्री को पूजन स्थल पर रखकर प्रतिदिन धूप दें। यह पारिवारिक सुख में वृद्धि के साथ ही आर्थिक दृष्टि से भी लाभ देता है।
हत्था जोड़ी:
यह एक वनस्पति है। इसके पौधे मध्य प्रदेश में बहुतायत में पाए जाते हैं। इस पौधे की जड़ में मानव भुजाएं जैसी ही शाखाएं होती हैं। इसे साक्षात् चामुंडा देवी का प्रतिरूप माना गया है। इसका प्रयोग सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा एवं संपत्ति वृद्धि आदि में होता है।
इन्द्रजाल तंत्र
1. इन्द्रजाल को ताबीज़ में यत्न से भरकर बच्चों के गले में धारण करवा दें, बुरी नज़र से बच्चे की सदैव रक्षा होगी।
2. पढ़ाई करने वाले बच्चे बुकमार्क की तरह इसका उपयोग अपनी पुस्तकों में करें, उनकी पढ़ाई के
प्रति रूचि बढ़ने लगें।
3. गर्भवती महिला को यदि एक काले कपड़े में बन्द करके इन्द्रजाल धारण करवा दिया जाए तो यह सुरक्षित गर्भ के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा।
4. मंगलवार के दिन माँ दूर्गा का ध्यान करके इन्द्रजाल को पीसकर पाउडर बना लें। यदि शत्रु के ऊपर किसी तरह अथवा उसके भवन में यह पाउडर छिड़क दिया जाएगा तो उसके शत्रुवत व्यवहार में आशातीत परिवर्तन होने लगेगा।
5. संतान सुख की इच्छा रखने वाले पती-पत्नी इन्द्रजाल को ताबीज़ की तरह धारण करके नित्य कम से कम तीन माला मंत्र, "ॐकृष्णाय दामोदराय धीमहि तन्नो विष्णु प्रयोदयात्" की जप किया करें।
6. भवन के वास्तु जनित कैसे भी दोष के लिए, बद्नज़र तथा दुष्टआत्माओं से रक्षा के लिए इन्द्रजाल को स्थापित कर लें।
7. शुक्रवार के दिन शुभ मुहूर्त में एक इन्द्रजाल भवन में किसी ऐसे स्थान पर स्थापित कर लें जहाँ से आते-जाते वह दिखाई दिया करे। शुक्रवार को अपनी नित्य की पूजा में मंत्र "ॐ दुं दुर्गायै नमः" जप कर लिया करें, आपदा-विपदा से घर की सदैव रक्षा होगी।
इन्द्रजाल नाम से अधिकांशतः भ्रम होता है एक वृहत्त ग्रंथ का जो अनेकों प्रकाशकों द्वारा भिन्न-भिन्न रंग-रूप में प्रकाशित होता आ रहा है। यह ग्रंथ और कुछ नहीं मंत्र, यंत्र तथा तंत्राहि, टोने-टोटके, शाबर मंत्र, स्वरशास्त्र आदि गुह्य विषयों का खिचड़ी रूपी संग्रह है। परन्तु इन्द्रजाल वस्तुतः एक वनस्पति है। यह कुछ-कुछ मोर पंख झाड़ी के पत्ते से मिलती-जुलती है। यह परस्पर उलझी हुई एक जाली सी प्रतीत होती है। भूत-प्रेत, जादू-टोने,दुषआत्माओं के दुष्प्रभाव को दूर करने आदि में इसका व्यापक प्रयोग किया जाता है। यदि इसको सिद्ध कर लिया जाए तो वाणी के प्रभाव से अनेक कार्यों में सफलता प्राप्त करने तथा भविष्य की घटनाओं की भविष्य वाणी करने की दिव्य शक्ति तक इसके प्रयोग से प्राप्त की जा सकती है। इन्द्रजाल की एक पूरी टहनी अपने कार्य अथवा निवास स्थल पर लगा लेने से वहाँ कोई भी अदृष्ट दुष्प्रभाव हानि नहीं पहुँचा पाता।
एक प्रकार से इन्द्रजाल एक सुरक्षा कवच का कार्य करता है। इसको अच्छा प्रभाव प्राप्त करने के साथ-साथ यदि सुन्दरता से अलंकरण कर लिया जाए तो सजावट के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। इसकी स्थापना के लिए शुभ दिन मंगल और शनिवार है। यदि यह मंगल और शनि की होरा में उपयोग की जाए तो और भी शुभत्व का प्रतीक सिद्ध हो सकती है।
आगे जिवन मे और कुछ वनस्पतियो पर लिखा जायेगा। साथ मे सभी पर मंत्र भी दिये जायेंगे ।

! आधाशीशी का उत्तम योग !!* 🌺🙏🏻🌺

🌺🙏🏻🌺 *!! आधाशीशी का उत्तम योग !!* 🌺🙏🏻🌺

यह एक सन्यासी से प्राप्त योग है ! जोकी लगभग ३००लोगों पर अनुभूत व १००% कारगर योग है !! इससे आधाशीशी मात्र तीन दिन के प्रयोग से ठीक हो जाती है !!

*!! योग !!*
~ पोस्ता के अनपोछ नये डोडे ६ तोला,,,
~ गेहूँ की भूसी ( चोकर )१२ तोला,,,
~ पुराना गुड़ १२ तोला,,,

तीनो सामग्री को तीन बराबर भाग में करके, एक भाग दवा साम को ३००मिली पानी मे काढ़ा करें जब आधा शेष रहे तो सोते समय पिये !! ऐसा तीन दिन प्रयोग करें !! तीन दिन में आधाशीशी को नामोनिसान नही रह जायेगा !!

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गुलकंद

🌺🙏🏻🌺 *!! गुलकंद के आयुर्वेदिक प्रयोग !!* 🌺🙏🏻🌺

*!! रंग !!*
गुलकन्द लाल रंग का होता है !!

*स्वाद !!* इसका स्वाद मीठा और खट्टा होता है !!

*स्वरूप !!* गुलकन्द गुलाब के फल और शक्कर को मिलाकर बनाया जाता है !!

*प्रकृति !!* इसकी प्रकृति ठंडी, रूखी और गर्म होती है !!

*हानिकारक !!* गुलकन्द का अधिक मात्रा में सेवन करना ठंडे स्वभाव और गर्म स्वभाव वालों के लिए हानिकारक हो सकता है ! इसका सेवन दिल के लिए भी हानिकारक हो सकता है !!

*तुलना !!* गुलकन्द की तुलना पोस्तादाना से की जा सकती है !!

*गुण !!* गुलकन्द दिमाग और आमाशय की शक्ति को बढ़ाता है ! यदि भोजन करने के बाद गुलकन्द खाया जाए तो यह दिमाग के लिए लाभदायक होता है ! यह दस्त लाने वाला होता है !!
यह रक्तपित्त की विशेष औषधि होती है !!

*!! विभिन्न रोगों में सहायक औषधि !!*

*1. कब्ज (कोष्ठबद्वता)*
~ 30 ग्राम गुलकन्द को दूध के साथ रोजाना पीने से कब्ज की समस्या दूर होती है। गुलकन्द को खाकर ऊपर से दूध पी लें, ऐसा 1 सप्ताह तक करने से कब्ज़ की शिकायत नहीं रहती है !!

~ 10 से 20 ग्राम गुलकन्द सुबह और शाम सेवन करने से शौच साफ होता है तथा भूख बढ़ती है ! और शरीर में ताकत आती है और इसके अलावा कब्ज की शिकायत भी दूर होती है !!

~ 2 चम्मच गुलकन्द को 250 मिलीलीटर हल्का गर्म दूध के साथ सोने से पहले लेने से लाभ मिलता है और कब्ज की समस्या भी खत्म हो जाती है !!

~ 2 बड़ा चम्मच गुलकन्द, मुनक्का 4 पीस, सौंफ आधा चम्मच इन सब को मिलकार एक कप पानी में उबाल लें फिर इसका सेवन करें इससे कब्ज मिट जाती है !!

~ गुलकन्द को दूध में डालकर पीने से पेट की गैस को दूर होती है !!

~ गुलकन्द, आंवला, मुरब्बा, हर्रे का मुरब्बा, बहेड़ा का मुरब्बा आदि के बीजों को पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। रोजाना सुबह, दोपहर और शाम 1-1 गोली गर्म दूध या पानी के साथ कुछ दिनों तक सेवन करने से कब्ज खत्म हो जाती है !!

*2. मुंह के छाले !!*
~ गुलकन्द को मुंह के छाले व घाव पर लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं !!

*3. पेट में गैस बनना !!*
~ गुलकन्द 1 चम्मच, 1 चम्मच त्रिफला या रेंडी का तेल, गर्म पानी के साथ सोने से पहले पीने पेट में बनने वाली गैस खत्म हो जाती है !!

*4. कमजोरी !!*
~ 10-20 ग्राम गुलकन्द सुबह-शाम सेवन करने से शौच साफ आता है, भूख बढ़ती है, शरीर मजबूत हो जाता है। गुलकन्द न मिलने पर इसके चूर्ण का भी प्रयोग किया जा सकता है। इसके चूण 1-3 ग्राम की मात्रा सेवन करें !!

*5. अग्निमान्द्यता (अपच)*
~ गुलकन्द और शहद का सेवन करने से पाचन-शक्ति में वृद्धि होती है !!

*6. प्यास अधिक लगना !!*
~ गुलकन्द खाने से तेज प्यास भी शांत हो जाती है !!

~ गुलाब का गुलकन्द प्रतिदिन सुबह-शाम 3 चम्मच 1 गिलास पानी में मिलाकर पीने से प्यास कम लगती है !!

*7. अधिक गर्मी लगना !!*
~ 5 से 20 ग्राम गुलकन्द (गुलाब के पत्तियों से बना) के साथ मिश्री मिलाकर शर्बत बना लें फिर इसे पी लें, इससे शरीर की गर्मी दूर हो जाती है और शांति मिलती है ! शरीर में निखार भी आता है ! इसलिए खासकर बच्चों एवं स्त्रियों के लिये यह बहुत अच्छा होता है !!

~ 10 ग्राम गुलकन्द को जल के साथ मिलाकर पीने से शरीर की गर्मी दूर हो जाती है !!

~10 ग्राम गुलकन्द को शहद के साथ मिलाकर पीने से शरीर की गर्मी दूर होती है !!

*8. पेट के कीड़े !!*
~ गुलकन्द 50 ग्राम और हरड़ का बक्कल 20 ग्राम, सोंठ 20 ग्राम, सोनामक्खी 50 ग्राम और मुनक्का 20 ग्राम को शहद में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें फिर इन्ही गोलियों को दूध के साथ 1 दिन में दो बार सुबह और शाम सेवन करने से पेट के अन्दर उपस्थित कीड़े मर जाते हैं !!

*9. नकसीर (नाक से खून बहना)*
~ 10 से 15 ग्राम गुलकन्द को रोजाना सुबह और शाम दूध के साथ खाने से नकसीर का पुराने से पुराना रोग भी ठीक हो जाता है !!

*10. उच्चरक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) !!*
~ उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन 25-30 ग्राम गुलकन्द खाने से कब्ज नष्ट होने के साथ बहुत लाभ मिलता है !!

*11. चर्म रोग !!*
खून के खराब होने के कारण से उत्पन्न रोग को ठीक करने के लिए गुलकन्द का सेवन करें !!

*12. हाथ पैरों की जलन !!*
~ 6 से 10 ग्राम गुलकन्द को दूध या जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से शरीर के बाहरी अंगों जैसे हाथ-पैर की जलन, तलवों की जलन, आंखों की जलन या आंखों से गर्म पानी निकलना आदि रोग ठीक हो जाते हैं !!

~ गुलकन्द और आंवले का मुरब्बा खाने और नारियल के तेल में पानी मिलाकर शरीर पर मालिश करने से जलन खत्म हो जाती है !!

*13. हृदय रोग !!*
~ गुलकन्द या गुलाब के सूखे फूलों में चीनी मिलाकर खाने से हृदय को बल मिलता है तथा इससे सम्बंधित कई प्रकार के रोग भी ठीक हो जाते हैं !!

~ हृदय रोगी को कब्ज के कारण हृदय की धड़कन तेज होने के साथ ही घबराहट अधिक हो रही हो तो ऐसे रोगी के कब्ज की शिकायत को दूर करने के लिए प्रतिदिन आंवले का मुरब्बा सेवन कराएं या दूध के साथ गुलकन्द सेवन कराएं !!

*14. दाद !!*
~ गुलकन्द को दूध के साथ पीने से दाद खत्म हो जाता है !!

*15. ज्यादा पसीना आना व शरीर से दुर्गन्ध आना !!*

~ 10 ग्राम गुलकन्द को सुबह और शाम खाने से अधिक पसीना आना और शरीर से बदबू आने की शिकायत दूर हो जाती है !!

~ गुलाब की ताजी पत्तियां तथा शहद बराबर मात्रा चीनी के साथ मिलाकर किसी कांच के बर्तन में रखकर लगातार 3 हफ्तों तक धूप में रखें इससे गुलकन्द तैयार हो जायेगा। इस गुलकन्द का सेवन सुबह तथा शाम को करने से शरीर से अधिक पसीना आना तथा बदबू आने की शिकायत दूर होती है !!

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माहवारी का न आना !!*

🌺🙏🏻🌺 *!! माहवारी का न आना !!* 🌺🙏🏻🌺

माहवारी का ना आना इस के कई कारण हो सकते है जैसे कि हार्मोनल गड़बड़ियां,अत्यधिक मोटापा, गर्भाशय में कोई दोष होना, खून की भयंकर कमी होना आदि !!

*!! दोषों के शमन हेतु उपाय !!*

१ :- चंद्रप्रभा वटी + कन्यालोहादि वटी एक एक गोली सुबह शाम दो दो चम्मच दशमूलारिष्ट+कुमार्यासव के साथ दीजिये !!

२ :- आरोग्यवर्धिनी वटी सुबह-शाम एक एक पानी से दीजिये !!

३ :- सोमनाथी ताम्रभस्म एक एक रत्ती दिन में दो बार एक चम्मच शहद में मिला कर चटाएं !!

कोई भी औषधि खाली पेट न दें !!

भोजन में पालक, मेथी, मूली,सोया आदि हरी पत्तेदार सब्जियां दें; काले अंगूर, टमाटर, चुकंदर (बीटरूट), आंवला, बैंगन आदि दीजिये, दूध, घी, शक्कर से बने पदार्थ दीजिये !!

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*!! कुछ खास रोगों के अनुभूत प्रयोग !!* 🌺🙏🏻🌺

🌺🙏🏻🌺 *!! कुछ खास रोगों के अनुभूत प्रयोग !!* 🌺🙏🏻🌺

*१ :- मधुमेह / शुगर रोग पर !!*
*दुर्वा /दूब !!* ५ग्राम दूब, एक ग्राम पठानी लोध व एक ग्राम हींग लेकर पीस लें ( यह एक खुराक है ) ऐसे ही इसको सादे जल के साथ सुबह शाम चौबीस दिन प्रयोग करें !!

*२ :- पीलिया रोग पर !!*
*नींबू !!* आधा नींबू लेकर उसपर पकी हुई फिटकरी बारीक कर बुरक लें व चूसें ,, ऐसे ही दिन में चार पांच बार प्रयोग करे, सात दिन में पीलिया खत्म !!

*३ :- शीघ्र पतन रोग पर !!*
*सेमर (साल्मली )* सेमर वृक्ष की जड़ को पीसकर ३ग्राम चूर्ण शहद के साथ चांटकर ऊपर से ५००मिली दूध पियें !! २१ दिन लगातार प्रयोग करें !!

*४ :- सफेद कुष्ठ रोग पर !!*
*धावड़ा (धव )*  धावड़ा की छाल पीसकर ३ग्राम चूर्ण शहद के साथ सेवन करें व छाल को पीसकर गौमूत्र के साथ दागों पर लेप करें !!

*५ :- हकलाना /तुतलाना !!*
*दूधी (नागार्जुनी )*  नागार्जुनी की जड़ को साफ कर कुचल लें व नागरबेल के पान में दस ग्राम रखकर दस मिनट तक चूसें ! यह क्रिया नित्य करें !!

*सभी दवायें अनुभूत है ,, फिर भी अपने निजी चिकित्सक से सलाह ले !!*

*साभार स्वामी सहजानन्द ऋषिकेश !!*

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नाखून सड़ना ,पेरोनिसिया ,हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना.

  पेरोनिसिया  हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना. आयुर्वेदिक  मुलेठी 50ग्राम बडी सोफ 50 ग्राम  अच्छी हळदी 50 ग्राम  नीम पत्ते चुर्ण 50 ग्राम  ...