गुरुवार, 16 मई 2019

पत्रांगासव

🌹✍🏻    पत्रांगासव ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

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पत्रांगासव
🌹✍🏻         पत्रांगासव         ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

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यह एक क्लासिकल आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो ख़ासकर महिलाओं के रोग ल्यूकोरिया में इस्तेमाल की जाती है. सफ़ेद प्रदर, रक्त प्रदर, धात गिरना या सफ़ेद पानी-लाल पानी आना, एक्सेस ब्लीडिंग, एनीमिया, भूख की कमी और कमज़ोरी जैसी प्रॉब्लम के लिए इसका प्रयोग किया जाता है, तो आईये जानते हैं इसका कम्पोजीशन, फ़ायदे और इस्तेमाल की पूरी डिटेल -

यह आसव यानि लिक्विड है जो सिरप की तरह होती है. पत्रांगा नाम की बूटी मिला होने से इसका नाम पत्रांगासव रखा गया है. इसके कम्पोजीशन की बात करें तो इसमें कई सारी जड़ी-बूटियाँ मिली होती हैं जैसे -

पत्रांगा या पतंग काष्ठ, खैरसार, वासामूल, सेमल के फूल, बला, भिलावा, गुड़हल, शारिवा, आम्र बीज मज्जा, दारूहल्दी, रसौत, चिरायता, सफ़ेद जीरा, बेल, भांगरा, दालचीनी, केसर, लौंग सभी एक-एक भाग

द्राक्षा बीस भाग, धातकी सोलह भाग, शहद पचास भाग, चीनी सौ भाग और पानी 512 भाग का मिश्रण होता है. आयुर्वेदिक प्रोसेस आसव निर्माण विधि से इसका आसव या सिरप बनता है. रिष्ट से आसव बनाना आसान होता है, तो आईये संक्षेप में जान लेते हैं कि इसका आसव कैसे बनता है? -

आसव बनाने के लिए बताई गयी मात्रा में मिट्टी के बर्तन में पानी डालकर द्राक्षा, धातकी, चीनी और शहद सब मिक्स कर लें उसके बाद दूसरी जड़ी बूटियों का मोटा चूर्ण मिला देना होता है. अब बर्तन का ढक्कन सील कर 30 दिनों तक बाहर खुले आसमान में धुप में रख दिया जाता है. तीस दिनों के बाद इसे फ़िल्टर कर लिक्विड को काँच की बोतल में पैक कर रख लिया जाता है. यही आसव होता है.

पत्रांगासव के गुण -

पित्त, वातदोष नाशक, प्रदर नाशक, दीपन, पाचन, सुजन दूर करने वाला(Anti-inflammatory), Antimicrobial, रक्त स्तम्भक, Blood Purifier यानि खून साफ़ करने वाले गुणों से भरपूर होता है.

पत्रांगासव के फ़ायदे-

हर तरह के ल्यूकोरिया के लिए यह अच्छी दवा है. इसके अलावा पीरियड्स की प्रॉब्लम या Mestrual Disorder के लिए भी इसका इस्तेमाल करना चाहिए.

Dysmenorrhea, Excessive bleeding, एनीमिया और भूख की कमी में फ़ायदेमंद है.

यह पाचन शक्ति को ठीक करती है, खून साफ़ करती है और सफ़ेद पानी की समस्या और Menstrual प्रॉब्लम को दूर करती है.

यह एक बेहतरीन Uterine Tonic है, गर्भाशय की बीमारियों को दूर कर महिलाओं के स्वास्थ को इम्प्रूव करती है.

पत्रांगासव की मात्रा और सेवन विधि -

15 से 30 ML तक दिन में दो बार बराबर मात्रा में पानी मिक्स कर खाना खाने के तुरंत बाद लेना चाहिए. इसे रोज़ तीन बार भी लिया जा सकता है डॉक्टर की सलाह से. इसके  साथ में 'पुष्यानुग चूर्ण' 'सुपारी पाक' 'मुक्ताशुक्ति भस्म' 'प्रवाल पिष्टी' के अलावा योगराज गुग्गुल, चंद्रप्रभा वटी जैसी ल्यूकोरिया में काम करने वाली दवा भी ले सकते हैं आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से. इसका इस्तेमाल करते हुवे खट्टी चीज़े, मिर्च-मसला, सॉफ्ट ड्रिंक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

यह ऑलमोस्ट सेफ़ दवा है, किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है. प्रेगनेंसी में स्तनपान कराने वाली महिलायें इसका इस्तेमाल न करें. डाबर, बैद्यनाथ, पतंजलि, सांडू जैसी अनेकों कम्पनियाँ इसे बनाती हैं. आयुर्वेदिक दवा दुकान से  खरीद सकते है

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🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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 कासीस गोदन्ती भस्म    

🌹✍🏻    कासीस गोदन्ती भस्म      ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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कासीस गोदन्ती भस्म के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

कासीस गोदन्ती भस्म (Kasis Godanti Bhasma) एक खनिज आधारित आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग मलेरिया, तीव्र ज्वर, जीर्ण ज्वर, प्लीहावर्धन, श्वेत प्रदर और भूख ना लगने पर किया जाता है।

कासीस गोदन्ती भस्म का मुख्य रूप से मलेरिया में उपयोग किया जाता है। इसके उपयोग से ज्वर का ताप और जाड़ा लगना कम हो जाता है। यह असामान्य मासिक धर्म और कष्टार्तव में भी लाभप्रद है।

घटक द्रव्य

इसमें मुख्यतः दो प्रमुख यौगिक हैं:

कासीस

गोदन्ती

इसे आक और एलो वेरा के पत्तों के साथ संसाधित किया जाता है।

औषधीय गुण

कासीस गोदन्ती भस्म में निम्नलिखित उपचार के गुण हैं।

ज्वरनाशक

हेमाटोजेनिक

पाचन उत्तेजक

आर्तवजनक

ऐंठन-नाशक

मलेरिया-रोधी

चिकित्सीय संकेत

कासीस गोदन्ती भस्म का उपयोग चिकित्सीय रूप से निम्नलिखित स्वास्थ्य स्थितियों में किया जाता है।

ज्वर

मलेरिया ज्वर

श्वेत प्रदर

भूख ना लगना

प्लीहा वृद्धि

असामान्य मासिक धर्म

कष्टार्तव

औषधीय उपयोग और लाभ

कासीस गोदन्ती भस्म का उपयोग ज्वरों में किया जाता है, विशेषकर मौसमी संक्रामक ज्वर या ठण्ड के साथ आने वाले मलेरिया ज्वर में। इसमें सौम्य जीवाणुरोधी या विषाणु-विरोधी गुण होते हैं। यह मस्तिष्क के थर्मो-रेगुलेटरी केंद्र पर काम कर सकता है और ज्वर को कम कर सकता है। संक्रमण से लड़ने के लिए, रोगी को अन्य औषधियों की भी आवश्यकता होती है। यह ज्वरनाशक प्रभावों के लिए एसिटामिनोफेन का एक सुरक्षित आयुर्वेदिक विकल्प है।

ज्वरनाशक – ज्वर कम करता है

कासीस गोदन्ती भस्म में ज्वरनाशक गुण होते हैं, इसलिए इसका उपयोग सभी प्रकार के ज्वरों में शरीर के तापमान को कम करने के लिए किया जाता है। इस उद्देश्य के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बूढ़े और कमजोर लोगों में इसका उपयोग करते हैं। यह कोई तीव्र औषधि नहीं है और अगर इसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में किया जाता है तो इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है।

मलेरिया में, यह ठंड और बुखार को कम कर देता है। इसमें मलेरिया विरोधी गुण भी होते हैं जिसके कारण यह मलेरिया परजीवी संक्रमण को भी कम कर देता है। इसे मलेरिया में ज्वर की वृद्धि को रोकने के लिए 4 घंटे के अंतराल पर दिया जाता है।

प्लीहा वृद्धि – (मलेरिया के बाद बढ़ा हुआ प्लीहा)

कासीस गोदन्ती भस्म (Kasis Godanti Bhasma) बढ़े हुए आकार की तिल्ली के आकार को कम करने में सहायक है। इस मामले में इसे अमृतारिष्ट के साथ दिया जाता है।

मात्रा एवं सेवन विधि (Dosage)

कासीस गोदन्ती भस्म की सामान्य औषधीय मात्रा  व खुराक इस प्रकार है:

औषधीय मात्रा (Dosage)

वयस्क125 मिलीग्राम से 375 मिलीग्रामअधिकतम संभावित खुराक1500 मिलीग्राम प्रति दिन (विभाजित मात्रा में)

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?)खाना खाने के तुरंत बाद लें

दिन में कितनी बार लें?2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?)अदरक के रस या शहद के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें)चिकित्सक की सलाह लें

सावधानी और दुष्प्रभाव

कासीस गोदन्ती भस्म अच्छी तरह सहनीय है और ज्यादातर लोगों के लिए संभवतः सुरक्षित है। हालांकि, कुछ लोगों में निम्नलिखित दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

मतली (दुर्लभ)

उल्टी (बहुत दुर्लभ)

चक्कर (बहुत दुर्लभ)

गर्भावस्था और स्तनपान

कासीस गोदन्ती भस्म गर्भावस्था और स्तनपान में संभवतः सुरक्षित है। आयुर्वेदिक चिकित्सक गर्भावस्था में ज्वर आने पर इसका उपयोग नियमित रूप से करते हैं।

विपरीत संकेत

हालांकि, कासीस गोदन्ती भस्म के कोई विपरीत संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन यकृत विकारों में आपको इसे अधिक मात्रा (प्रति दिन 1500 मिलीग्राम से अधिक) में नहीं लेना चाहिए।

औषधियों की पारस्परिक क्रिया

कासीस गोदन्ती भस्म के साथ अन्य औषधियों की पारस्परिक क्रिया की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। अधिक जानकारी के लिए आपको आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
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मरदाना तागत

🌹✍🏻    मरदाना तागत       ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

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नमस्कार दोस्तों रोज पर्सनल में लोग सबाल पूछते है कि सेक्स समस्या  के लिए कुछ बताये उनके लिए एक छोटा सा तोहफा है

  1-तिल तीन प्रकार के होते है काला , लाल ,सफ़ेद इनमे काला तिल सर्वोत्तम होता है जो व्यक्ति एक चम्मच काले तिल खूब चबा चबा के सेवन करेगा वो सेक्स के मामले में घोड़ा को भी पछाड़  देगा
पर पेट साफ रहे , कब्ज न हो और मिर्च मसाले बाली चीजे न सेवन करे ।

2- कुछ भाई लोग अपनी प्रेमिका या पत्नी को धनिया कहकर बुलाते है क्यों क्योकि धनिया से सेक्स पावर बढ़ती है सेक्स करने से पहले कुछ पत्ती हरे धनिये की खाने से लिंग में तनाव रहता है व सेक्स छमता बढ़ती है । धनिया का अधिक सेवन नही करना चाहिए नपुंसक भी बना सकता है

3- बबूल का गोद या फली का सेवन मिश्री मिला के दूध के साथ सेवन करे ।

4- शादी में दूल्हे को पान क्यों खिलाते है क्योंकि पान का पत्ता खाने से पाचन सही होता है और वीर्य भी बढ़ाता है

5- सिरस के बीजों का चूर्ण दूध से सेवन करे इससे नामर्द भी मर्द बन जायेगा

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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 क्या लिवर आपका सही नहीं काम कर रहा है  

🌹✍🏻   क्या लिवर आपका सही नहीं काम कर रहा है   ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब ,आधि,व्याधि अपार ।

तिह प्रभु दीन दयाल को , बंदहु बारम्बार ।।

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क्या लिवर आपका सही नहीं काम कर रहा है
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लीवर (Liver) हमारे शरीर का सबसे मुख्‍य अंग है यदि आपका लीवर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहा है तो समझिये कि खतरे की घंटी बज चुकी है लीवर की खराबी के लक्षणों को अनदेखा करना बड़ा ही मुश्‍किल है और फिर भी हम उसे जाने अंजाने अनदेखा कर ही देते हैं-

लीवर (Liver) की खराबी होने का कारण ज्‍यादा तेल खाना, ज्‍यादा शराब पीना और कई अन्‍य कारणों के बारे में तो हम जानते ही हैं हालाकि लीवर की खराबी का कारण कई लोग जानते हैं पर लीवर जब खराब होना शुरु होता है तब हमारे शरीर में क्‍या क्‍या बदलाव पैदा होते हैं लेकिन इसके लक्षण क्‍या हैं इसके बारे में कोई नहीं जानता है वे लोग जो सोचते हैं कि वे शराब नहीं पीते तो उनका लीवर कभी खराब नहीं हो सकता तो आपकी सोच बिल्‍कुल गलत हैं-

क्‍या आप जानते हैं कि मुंह से गंदी बदबू आना भी लीवर (Liver) की खराबी हो सकती है अरे आप क्‍यों चौंक गए ना? अब हम आपको कुछ परीक्षण बताएंगे जिससे आप पता लगा सकते हैं कि क्‍या आपका लीवर वाकई में खराब है क्युकि कोई भी बीमारी कभी भी चेतावनी का संकेत दिये बगैर नहीं आती है इसलिये आप हमेशा ही सावधान रहें-

लीवर (Liver) खराब होने के लक्षण-
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1- यदि लीवर (Liver) सही से कार्य नही कर रहा है तो आपके मुंह से गंदी बदबू आएगी ऐसा इसलिये होता है क्‍योकि मुंह में अमोनिया जादा रिसता है-

2- लीवर (Liver) खराब होने का एक और संकेत है कि स्‍किन क्षतिग्रस्‍त होने लगेगी और उस पर थकान दिखाई पडने लगेगी क्यूंकि आंखों के नीचे की स्‍किन बहुत ही नाजुक होती है जिस पर आपकी हेल्‍थ का असर साफ दिखाई पड़ता है-

3- पाचन तंत्र में भी यदि कोई खराबी है या यदि आपके लीवर (Liver) पर वसा जमा हुआ है और या फिर वह बड़ा हो गया है तो फिर आपको पानी भी नहीं हजम होगा-

4- त्‍वचा पर सफेद धब्‍बे यदि आपकी त्‍वचा का रंग उड गया है और उस पर सफेद रंग के धब्‍बे पड़ने लगे हैं तो इसे हम लीवर स्‍पॉट के नाम से बुलाएंगे-

5- यदि आपकी पेशाब या मल हर रोज़ गहरे रंग का आने लगे तो लीवर (Liver) गड़बड़ है यदि ऐसा केवल एक बार होता है तो यह केवल पानी की कमी की वजह से हो सकता है-

6- यदि आपके आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगे और नाखून पीले दिखने लगे तो आपको जौन्‍डिस हो सकता है इसका यह मतलब होता है कि आपका लीवर (Liver) संक्रमित है-

7- लीवर एक एंजाइम पैदा करता है जिसका नाम होता है बाइल जो कि स्‍वाद में बहुत खराब लगता है यदि आपके मुंह में कडुवापन लगे तो इसका मतलब है कि आपके मुंह तब बाइल पहुंच रहा है-

8- जब लीवर (Liver) बड़ा हो जाता है तो पेट में सूजन आ जाती है जिसको हम अक्‍सर मोटापा समझने की भूल कर बैठते हैं-

9- मानव पाचन तंत्र में लीवर एक म‍हत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है विभिन्‍न अंगों के कार्यों जिसमें भोजन चयापचय, ऊर्जा भंडारण, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलना, डिटॉक्सीफिकेशन, प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन और रसायनों का उत्‍पादन शामिल हैं लेकिन कई चीजें जैसे वायरस, दवाएं, आनुवांशिक रोग और शराब लिवर को नुकसान पहुंचाने लगती है लेकिन यहां दिये उपायों को अपनाकर आप अपने लीवर (Liver) को मजबूत और बीमारियों से दूर रख सकते हैं-

लीवर (Liver) सही करने के घरेलू उपाय-
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1- हल्‍दी लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार करने के लिए अत्‍यंत उपयोगी होती है चूँकि इसमें एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता है-हैपेटाइटिस बी व सी का कारण बनने वाले वायरस को बढ़ने से रोकती है इसलिए हल्‍दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिएं-

2- सेब का सिरका, लीवर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है भोजन से पहले सेब के सिरके को पीने से शरीर की चर्बी घटती है सेब के सिरके को आप कई तरीके से इस्‍तेमाल कर सकते हैं एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं या इस मिश्रण में एक चम्मच शहद मिलाएं तथा इस म‍िश्रण को दिन में दो से तीन बार लें-

3- आंवला विटामिन सी के सबसे संपन्न स्रोतों में से एक है और इसका सेवन लीवर की कार्यशीलता को बनाये रखने में मदद करता है आंवला में लीवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद हैं लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए आपको दिन में 4-5 कच्चे आंवले खाने चाहिए-

4- पपीता लीवर की बीमारियों के लिए सबसे सुरक्षित प्राकृतिक उपचार में से एक है विशेष रूप से लीवर सिरोसिस के लिए हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस मिश्रण का सेवन तीन से चार सप्ताहों के लिए करें-

5- सिंहपर्णी या कुकरौंधा जड़ की चाय लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले उपचारों में से एक है अधिक लाभ पाने के लिए इस चाय को दिन में दो बार पिएं या आप चाहें तो जड़ को पानी में उबाल कर और पानी को छान कर पी सकते हैं सिंहपर्णी की जड़ का पाउडर बड़ी आसानी से मिल जाएगा-

6- लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मुलेठी (Muleti) का इस्‍तेमाल कई आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है इसके इस्‍तेमाल के लिए मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें तथा फिर ठंड़ा होने पर छान लें और इस चाय रुपी पानी को दिन में एक या दो बार पिएं-

7- फीटकोंस्टीटूएंट्स की उपस्थिति के कारण, अलसी के बीज (Linseed seeds) हार्मोंन को ब्‍लड में घूमने से रोकता है और लीवर के तनाव को कम करता है टोस्‍ट पर, सलाद में या अनाज के साथ अलसी के बीज को पीसकर इस्‍तेमाल करने से लिवर के रोगों को दूर रखने में मदद करता है-

8- एवोकैडो (Avocado) और अखरोट (Walnut) को अपने आहार में शामिल कर आप लीवर की बीमारियों के आक्रमण से बच सकते हैं एवोकैडो और अखरोट में मौजूद ग्लुटथायन, लिवर (Liver) में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर इसकी सफाई करता है-

9- पालक और गाजर का रस का मिश्रण लीवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) के लिए काफी लाभदायक घरेलू उपाय है पालक का रस और गाजर के रस को बराबर भाग में मिलाकर पिएं-लीवर की मरम्मत के लिए इस प्राकृतिक रस को रोजाना कम से कम एक बार जरूर पिएं-

10- सेब (Apple) और पत्तेदार सब्जियों में मौजूद पेक्टिन (Pectin) पाचन तंत्र में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर लीवर की रक्षा करता है-इसके अलावा हरी सब्जियां पित्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं।

11- एक पौधा और है जो अपने आप उग आता है जिसकी पत्तियां आंवले जैसी होती है इन्ही पत्तियों के नीचे की ओर छोटे छोटे फुल आते है जो बाद में छोटे छोटे आंवलों में बदल जाते है इसे भुई आंवला कहते है इस पौधे को भूमि आंवला या भू-धात्री भी कहा जाता है यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है इसका सम्पूर्ण भाग , जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है तथा कई बाज़ीगर भुई आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं।

12- क्या आप जानते है कि भुई आंवला यकृत (लीवर) की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है लीवर बढ़ गया है या या उसमे सूजन है तो यह पौधा उसे बिलकुल ठीक कर देगा-बिलीरुबिन बढ़ गया है पीलिया हो गया है तो इसके पूरे पेड़ को जड़ों समेत उखाडकर उसका काढ़ा सुबह शाम लें और सूखे हुए पंचांग का 3 ग्राम का काढ़ा सवेरे शाम लेने से बढ़ा हुआ बाईलीरुबिन ठीक होगा और पीलिया की बीमारी से मुक्ति मिलेगी ।

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पुरानी आव या आंतों की सूजन(कोलाइटिस)  

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पुरानी आव या आंतों की सूजन(कोलाइटिस)का उपचार-

सामग्री-

बेल का गूदा-           100 ग्राम
सौंफ-                     100 ग्राम
इसबग़ोल की भूसी- 100 ग्राम
छोटी इलायची-         10 ग्राम

आप इन उपर लिखी चारों चीजों का कूट पीसकर दरदरा चूर्ण बना लें तथा फिर उसमें 300 ग्राम देसी खाँड़ या बूरा मिलाकर किसी काँच की शीशी में सुरक्षित रख लें-

उपयोग की विधि-

आप लगभग दस ग्राम दवा सुबह नाश्ता के पहले ताजा पानी के साथ लें और शाम को खाना खाने के बाद दस ग्राम दवा गुनगुने जल के साथ या दूध के साथ लें (यदि आवश्यकता समझे तो दोपहर को भी दवा खाना खाने के बाद ताजा जल से दवा खा सकते है)एक सप्ताह के बाद फायदा अवश्य होगा लेकिन करीब 45 दिन दवा खाकर छोड़ दें-यह दवा पेट के मल को साफ करेगी और पुरानी आव या आंतों को सूजन (कोलाइटिस) जड़ से साफ कर देगी-

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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दाद , खाज , खुजली    

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मूली के बिज पानी मे पीस कर लेप करे पहले दिन जलन होगी दूसरे दिन कम और इसी तरह 4- 5 बार के प्रयोग से ठीक हो जायेगी और जो दवा जलन करेगी बो ही अंदर तक जाकर बिमारी को भेद करे जल्दी ठीक करेगी

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अलसी के बीज लाभ, उपयोग, मात्रा और दुष्प्रभाव

अलसी के बीज लाभ, उपयोग, मात्रा और दुष्प्रभाव

अलसी बीज, जिसको फ्लैक्स सीड्स (flax seeds) के नाम से भी जाना जाता है, हृदय रोग, पाचन रोग, कैंसर और मधुमेह में लाभप्रद होते हैं। अलसी के बीज दुनिया के प्रसिद्ध सुपर खाद्य पदार्थों में से एक है। यह बीज बहुत ही पौष्टिक होते हैं और कई बीमारियों को रोकने में मदद करते हैं। यह आवश्यक फैटी एसिड ओमेगा -3 से भरपूर होते हैं। अलसी बीजों में भरपूर मात्रा में आहार के लिए आवश्यक फाइबर और लिग्नन्स होते हैं।

इनकी खोज 8वीं शताब्दी में की गयी थी। सदियों से अलसी बीज का उपयोग किया जा रहा है और इनसे हृदय रोग, स्तन कैंसर और मधुमेह जैसे रोगों में मदद मिल रही है। अलसी बीज में एक एक अनूठी विशेषता है कि अगर इन बीजों को भोजन से पहले खाया जाए तो आप तृप्ति का अनुभव करेंगे। इस प्रकार, यह मोटे लोगों भोजन की लालसा और अत्यधिक भूख लगने की बीमारी को कम कर देते हैं। इसलिए, यह बीज  वजन घटाने (weight loss) के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं।

अलसी बीज के लाभ और उपयोग

कैंसर संरक्षण

अलसी बीज का उपयोग करने से स्तन, प्रोस्टेट और पेट के कैंसर के खिलाफ लड़ने में मिलती है। अलसी बीजों में मौजूद ओमेगा -3 फैटी एसिड की वजह से यह प्रभाव देखने को मिलता है।

मधुमेह

हाल के शोध से यह सिद्ध हुआ है कि प्रतिदिन दिन में तीन बार अलसी बीज का उपयोग करने से टाइप 2 मधुमेह में मदद मिल सकती है। कम से कम एक महीने के लिए अलसी बीज के चूर्ण का उपयोग करने से रक्त शर्करा के स्तर को भी कम करने में मदद मिल सकती है।

कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण

अलसी बीज शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता हैं। यह अथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त होना और उमड़ना) को भी रोकता है।

ऑस्टियोपोरोसिस

अलसी के बीज अस्थि घनत्व के स्तर में भी सुधार करता हैं। इस प्रकार यह संभवतः ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया में राहत प्रदान कर सकते हैं।

कब्ज

अलसी बीज फाइबर से भरपूर होते हैं। इसलिए, वे कब्ज की समस्याओं में भी मदद करते हैं।

रजोनिवृत्ति

अलसी बीज महिलाओं को उनकी रजोनिवृत्ति के चरण में अधिक गर्मी लगने का सामना करने में मदद करते हैं। ये बीज पूर्व रजोनिवृत्ति के लक्षणों को रोकने में भी मदद कर सकते हैं।

हृदय की समस्या

अलसी में उपस्थित अल्फा लिनोलेनिक एसिड हृदय की समस्याओं के जोखिम को कम करती है।

एडीएचडी (ध्यान अभाव सक्रियता विकार) में मदद

अलसी संभवतः एडीएचडी (ध्यान अभाव सक्रियता विकार) में दिखने वाले लक्षणों को बेहतर बनाती है।

अन्य लाभ

अलसी बीज निम्न रोगों में मदद करते हैं, लेकिन इन रोगों में इसकी प्रभावकारिता के कुछ ही सबूत उपलब्ध हैं।

बढ़ी हुई पौरुष ग्रंथि

ह्रदय रोग

अंतर्गर्भाशयकला कैंसर

स्तनों में दर्द

फेफड़ों का कैंसर

वजन घटना

पेट खराब होना

त्वचा की जलन

मूत्राशय में सूजन

अलसी बीज के दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट्स)

अलसी के बीजों का अधिक मात्रा में में उपयोग करने से कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जो की बहुत नगण्य हैं। इन दुष्प्रभावों में शामिल हैं।

गैस्ट्रिक समस्या

पेट दर्द

सूजन

जी मिचलाना

दस्त

आंतरिक रक्तस्राव

आंत्र सिंड्रोम में वृद्धि

प्रोस्टेट कैंसर का खतरा

सावधानियां

यदि आप को कोई निम्नलिखित समस्या हैं तो अलसी बीज का उपयोग संभवतः असुरक्षित हो सकता है।

भोजन की एलर्जी

आंत्र की सूजन का रोग

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बाधा

रक्तस्राव विकार

कम रक्त दबाव

उच्च रक्तचाप

हैपरट्रिगलीसेरीडेमिया

द्विध्रुवी विकार

पाचन विकार

दवाओं का पारस्परिक प्रभाव

यदि आप निम्नलिखित दवाओं का उपभोग कर रहे हैं तो आपको अलसी बीजों का उपभोग ना करें।

मधुमेह विरोधी दवा जैसे ग्लीमीपीरीड और ग्लिपीजाइड।

एन्टीप्लेटलेट दावा जैसे क्लोपिडोग्रेल, डिक्लोफेनाक, इबुप्रोफेन, डालतेपरीन, हेपरिन, वार्फरिन, डालतेपरीन, नेपरोक्सन और एस्पिरिन।

अलसी अन्य दाहक विरोधी दवाओं, दर्द निवारक, उच्च रक्तचाप की दवाओं और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने वाली दवाओं के साथ परस्पर प्रभाव डाल सकती है।

सजग सलाह

यदि आप नियमित रूप से किसी भी प्रकार की दवा या कोई खुराक ले रहे हैं तो अलसी बीज को उस दवा के लेने से कम से कम दो घंटे पहले या बाद में लेना उचित होगा।

नाखून सड़ना ,पेरोनिसिया ,हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना.

  पेरोनिसिया  हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना. आयुर्वेदिक  मुलेठी 50ग्राम बडी सोफ 50 ग्राम  अच्छी हळदी 50 ग्राम  नीम पत्ते चुर्ण 50 ग्राम  ...