गुरुवार, 16 मई 2019

 क्या लिवर आपका सही नहीं काम कर रहा है  

🌹✍🏻   क्या लिवर आपका सही नहीं काम कर रहा है   ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब ,आधि,व्याधि अपार ।

तिह प्रभु दीन दयाल को , बंदहु बारम्बार ।।

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

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क्या लिवर आपका सही नहीं काम कर रहा है
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लीवर (Liver) हमारे शरीर का सबसे मुख्‍य अंग है यदि आपका लीवर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहा है तो समझिये कि खतरे की घंटी बज चुकी है लीवर की खराबी के लक्षणों को अनदेखा करना बड़ा ही मुश्‍किल है और फिर भी हम उसे जाने अंजाने अनदेखा कर ही देते हैं-

लीवर (Liver) की खराबी होने का कारण ज्‍यादा तेल खाना, ज्‍यादा शराब पीना और कई अन्‍य कारणों के बारे में तो हम जानते ही हैं हालाकि लीवर की खराबी का कारण कई लोग जानते हैं पर लीवर जब खराब होना शुरु होता है तब हमारे शरीर में क्‍या क्‍या बदलाव पैदा होते हैं लेकिन इसके लक्षण क्‍या हैं इसके बारे में कोई नहीं जानता है वे लोग जो सोचते हैं कि वे शराब नहीं पीते तो उनका लीवर कभी खराब नहीं हो सकता तो आपकी सोच बिल्‍कुल गलत हैं-

क्‍या आप जानते हैं कि मुंह से गंदी बदबू आना भी लीवर (Liver) की खराबी हो सकती है अरे आप क्‍यों चौंक गए ना? अब हम आपको कुछ परीक्षण बताएंगे जिससे आप पता लगा सकते हैं कि क्‍या आपका लीवर वाकई में खराब है क्युकि कोई भी बीमारी कभी भी चेतावनी का संकेत दिये बगैर नहीं आती है इसलिये आप हमेशा ही सावधान रहें-

लीवर (Liver) खराब होने के लक्षण-
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1- यदि लीवर (Liver) सही से कार्य नही कर रहा है तो आपके मुंह से गंदी बदबू आएगी ऐसा इसलिये होता है क्‍योकि मुंह में अमोनिया जादा रिसता है-

2- लीवर (Liver) खराब होने का एक और संकेत है कि स्‍किन क्षतिग्रस्‍त होने लगेगी और उस पर थकान दिखाई पडने लगेगी क्यूंकि आंखों के नीचे की स्‍किन बहुत ही नाजुक होती है जिस पर आपकी हेल्‍थ का असर साफ दिखाई पड़ता है-

3- पाचन तंत्र में भी यदि कोई खराबी है या यदि आपके लीवर (Liver) पर वसा जमा हुआ है और या फिर वह बड़ा हो गया है तो फिर आपको पानी भी नहीं हजम होगा-

4- त्‍वचा पर सफेद धब्‍बे यदि आपकी त्‍वचा का रंग उड गया है और उस पर सफेद रंग के धब्‍बे पड़ने लगे हैं तो इसे हम लीवर स्‍पॉट के नाम से बुलाएंगे-

5- यदि आपकी पेशाब या मल हर रोज़ गहरे रंग का आने लगे तो लीवर (Liver) गड़बड़ है यदि ऐसा केवल एक बार होता है तो यह केवल पानी की कमी की वजह से हो सकता है-

6- यदि आपके आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगे और नाखून पीले दिखने लगे तो आपको जौन्‍डिस हो सकता है इसका यह मतलब होता है कि आपका लीवर (Liver) संक्रमित है-

7- लीवर एक एंजाइम पैदा करता है जिसका नाम होता है बाइल जो कि स्‍वाद में बहुत खराब लगता है यदि आपके मुंह में कडुवापन लगे तो इसका मतलब है कि आपके मुंह तब बाइल पहुंच रहा है-

8- जब लीवर (Liver) बड़ा हो जाता है तो पेट में सूजन आ जाती है जिसको हम अक्‍सर मोटापा समझने की भूल कर बैठते हैं-

9- मानव पाचन तंत्र में लीवर एक म‍हत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है विभिन्‍न अंगों के कार्यों जिसमें भोजन चयापचय, ऊर्जा भंडारण, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलना, डिटॉक्सीफिकेशन, प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन और रसायनों का उत्‍पादन शामिल हैं लेकिन कई चीजें जैसे वायरस, दवाएं, आनुवांशिक रोग और शराब लिवर को नुकसान पहुंचाने लगती है लेकिन यहां दिये उपायों को अपनाकर आप अपने लीवर (Liver) को मजबूत और बीमारियों से दूर रख सकते हैं-

लीवर (Liver) सही करने के घरेलू उपाय-
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1- हल्‍दी लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार करने के लिए अत्‍यंत उपयोगी होती है चूँकि इसमें एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता है-हैपेटाइटिस बी व सी का कारण बनने वाले वायरस को बढ़ने से रोकती है इसलिए हल्‍दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिएं-

2- सेब का सिरका, लीवर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है भोजन से पहले सेब के सिरके को पीने से शरीर की चर्बी घटती है सेब के सिरके को आप कई तरीके से इस्‍तेमाल कर सकते हैं एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं या इस मिश्रण में एक चम्मच शहद मिलाएं तथा इस म‍िश्रण को दिन में दो से तीन बार लें-

3- आंवला विटामिन सी के सबसे संपन्न स्रोतों में से एक है और इसका सेवन लीवर की कार्यशीलता को बनाये रखने में मदद करता है आंवला में लीवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद हैं लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए आपको दिन में 4-5 कच्चे आंवले खाने चाहिए-

4- पपीता लीवर की बीमारियों के लिए सबसे सुरक्षित प्राकृतिक उपचार में से एक है विशेष रूप से लीवर सिरोसिस के लिए हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस मिश्रण का सेवन तीन से चार सप्ताहों के लिए करें-

5- सिंहपर्णी या कुकरौंधा जड़ की चाय लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले उपचारों में से एक है अधिक लाभ पाने के लिए इस चाय को दिन में दो बार पिएं या आप चाहें तो जड़ को पानी में उबाल कर और पानी को छान कर पी सकते हैं सिंहपर्णी की जड़ का पाउडर बड़ी आसानी से मिल जाएगा-

6- लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मुलेठी (Muleti) का इस्‍तेमाल कई आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है इसके इस्‍तेमाल के लिए मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें तथा फिर ठंड़ा होने पर छान लें और इस चाय रुपी पानी को दिन में एक या दो बार पिएं-

7- फीटकोंस्टीटूएंट्स की उपस्थिति के कारण, अलसी के बीज (Linseed seeds) हार्मोंन को ब्‍लड में घूमने से रोकता है और लीवर के तनाव को कम करता है टोस्‍ट पर, सलाद में या अनाज के साथ अलसी के बीज को पीसकर इस्‍तेमाल करने से लिवर के रोगों को दूर रखने में मदद करता है-

8- एवोकैडो (Avocado) और अखरोट (Walnut) को अपने आहार में शामिल कर आप लीवर की बीमारियों के आक्रमण से बच सकते हैं एवोकैडो और अखरोट में मौजूद ग्लुटथायन, लिवर (Liver) में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर इसकी सफाई करता है-

9- पालक और गाजर का रस का मिश्रण लीवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) के लिए काफी लाभदायक घरेलू उपाय है पालक का रस और गाजर के रस को बराबर भाग में मिलाकर पिएं-लीवर की मरम्मत के लिए इस प्राकृतिक रस को रोजाना कम से कम एक बार जरूर पिएं-

10- सेब (Apple) और पत्तेदार सब्जियों में मौजूद पेक्टिन (Pectin) पाचन तंत्र में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर लीवर की रक्षा करता है-इसके अलावा हरी सब्जियां पित्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं।

11- एक पौधा और है जो अपने आप उग आता है जिसकी पत्तियां आंवले जैसी होती है इन्ही पत्तियों के नीचे की ओर छोटे छोटे फुल आते है जो बाद में छोटे छोटे आंवलों में बदल जाते है इसे भुई आंवला कहते है इस पौधे को भूमि आंवला या भू-धात्री भी कहा जाता है यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है इसका सम्पूर्ण भाग , जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है तथा कई बाज़ीगर भुई आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं।

12- क्या आप जानते है कि भुई आंवला यकृत (लीवर) की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है लीवर बढ़ गया है या या उसमे सूजन है तो यह पौधा उसे बिलकुल ठीक कर देगा-बिलीरुबिन बढ़ गया है पीलिया हो गया है तो इसके पूरे पेड़ को जड़ों समेत उखाडकर उसका काढ़ा सुबह शाम लें और सूखे हुए पंचांग का 3 ग्राम का काढ़ा सवेरे शाम लेने से बढ़ा हुआ बाईलीरुबिन ठीक होगा और पीलिया की बीमारी से मुक्ति मिलेगी ।

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🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
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पुरानी आव या आंतों की सूजन(कोलाइटिस)  

🌹✍🏻     पुरानी आव या आंतों की सूजन(कोलाइटिस)   ✍🏻🌹

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पुरानी आव या आंतों की सूजन(कोलाइटिस)का उपचार-

सामग्री-

बेल का गूदा-           100 ग्राम
सौंफ-                     100 ग्राम
इसबग़ोल की भूसी- 100 ग्राम
छोटी इलायची-         10 ग्राम

आप इन उपर लिखी चारों चीजों का कूट पीसकर दरदरा चूर्ण बना लें तथा फिर उसमें 300 ग्राम देसी खाँड़ या बूरा मिलाकर किसी काँच की शीशी में सुरक्षित रख लें-

उपयोग की विधि-

आप लगभग दस ग्राम दवा सुबह नाश्ता के पहले ताजा पानी के साथ लें और शाम को खाना खाने के बाद दस ग्राम दवा गुनगुने जल के साथ या दूध के साथ लें (यदि आवश्यकता समझे तो दोपहर को भी दवा खाना खाने के बाद ताजा जल से दवा खा सकते है)एक सप्ताह के बाद फायदा अवश्य होगा लेकिन करीब 45 दिन दवा खाकर छोड़ दें-यह दवा पेट के मल को साफ करेगी और पुरानी आव या आंतों को सूजन (कोलाइटिस) जड़ से साफ कर देगी-

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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दाद , खाज , खुजली    

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मूली के बिज पानी मे पीस कर लेप करे पहले दिन जलन होगी दूसरे दिन कम और इसी तरह 4- 5 बार के प्रयोग से ठीक हो जायेगी और जो दवा जलन करेगी बो ही अंदर तक जाकर बिमारी को भेद करे जल्दी ठीक करेगी

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गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
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अलसी के बीज लाभ, उपयोग, मात्रा और दुष्प्रभाव

अलसी के बीज लाभ, उपयोग, मात्रा और दुष्प्रभाव

अलसी बीज, जिसको फ्लैक्स सीड्स (flax seeds) के नाम से भी जाना जाता है, हृदय रोग, पाचन रोग, कैंसर और मधुमेह में लाभप्रद होते हैं। अलसी के बीज दुनिया के प्रसिद्ध सुपर खाद्य पदार्थों में से एक है। यह बीज बहुत ही पौष्टिक होते हैं और कई बीमारियों को रोकने में मदद करते हैं। यह आवश्यक फैटी एसिड ओमेगा -3 से भरपूर होते हैं। अलसी बीजों में भरपूर मात्रा में आहार के लिए आवश्यक फाइबर और लिग्नन्स होते हैं।

इनकी खोज 8वीं शताब्दी में की गयी थी। सदियों से अलसी बीज का उपयोग किया जा रहा है और इनसे हृदय रोग, स्तन कैंसर और मधुमेह जैसे रोगों में मदद मिल रही है। अलसी बीज में एक एक अनूठी विशेषता है कि अगर इन बीजों को भोजन से पहले खाया जाए तो आप तृप्ति का अनुभव करेंगे। इस प्रकार, यह मोटे लोगों भोजन की लालसा और अत्यधिक भूख लगने की बीमारी को कम कर देते हैं। इसलिए, यह बीज  वजन घटाने (weight loss) के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं।

अलसी बीज के लाभ और उपयोग

कैंसर संरक्षण

अलसी बीज का उपयोग करने से स्तन, प्रोस्टेट और पेट के कैंसर के खिलाफ लड़ने में मिलती है। अलसी बीजों में मौजूद ओमेगा -3 फैटी एसिड की वजह से यह प्रभाव देखने को मिलता है।

मधुमेह

हाल के शोध से यह सिद्ध हुआ है कि प्रतिदिन दिन में तीन बार अलसी बीज का उपयोग करने से टाइप 2 मधुमेह में मदद मिल सकती है। कम से कम एक महीने के लिए अलसी बीज के चूर्ण का उपयोग करने से रक्त शर्करा के स्तर को भी कम करने में मदद मिल सकती है।

कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण

अलसी बीज शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता हैं। यह अथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त होना और उमड़ना) को भी रोकता है।

ऑस्टियोपोरोसिस

अलसी के बीज अस्थि घनत्व के स्तर में भी सुधार करता हैं। इस प्रकार यह संभवतः ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया में राहत प्रदान कर सकते हैं।

कब्ज

अलसी बीज फाइबर से भरपूर होते हैं। इसलिए, वे कब्ज की समस्याओं में भी मदद करते हैं।

रजोनिवृत्ति

अलसी बीज महिलाओं को उनकी रजोनिवृत्ति के चरण में अधिक गर्मी लगने का सामना करने में मदद करते हैं। ये बीज पूर्व रजोनिवृत्ति के लक्षणों को रोकने में भी मदद कर सकते हैं।

हृदय की समस्या

अलसी में उपस्थित अल्फा लिनोलेनिक एसिड हृदय की समस्याओं के जोखिम को कम करती है।

एडीएचडी (ध्यान अभाव सक्रियता विकार) में मदद

अलसी संभवतः एडीएचडी (ध्यान अभाव सक्रियता विकार) में दिखने वाले लक्षणों को बेहतर बनाती है।

अन्य लाभ

अलसी बीज निम्न रोगों में मदद करते हैं, लेकिन इन रोगों में इसकी प्रभावकारिता के कुछ ही सबूत उपलब्ध हैं।

बढ़ी हुई पौरुष ग्रंथि

ह्रदय रोग

अंतर्गर्भाशयकला कैंसर

स्तनों में दर्द

फेफड़ों का कैंसर

वजन घटना

पेट खराब होना

त्वचा की जलन

मूत्राशय में सूजन

अलसी बीज के दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट्स)

अलसी के बीजों का अधिक मात्रा में में उपयोग करने से कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जो की बहुत नगण्य हैं। इन दुष्प्रभावों में शामिल हैं।

गैस्ट्रिक समस्या

पेट दर्द

सूजन

जी मिचलाना

दस्त

आंतरिक रक्तस्राव

आंत्र सिंड्रोम में वृद्धि

प्रोस्टेट कैंसर का खतरा

सावधानियां

यदि आप को कोई निम्नलिखित समस्या हैं तो अलसी बीज का उपयोग संभवतः असुरक्षित हो सकता है।

भोजन की एलर्जी

आंत्र की सूजन का रोग

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बाधा

रक्तस्राव विकार

कम रक्त दबाव

उच्च रक्तचाप

हैपरट्रिगलीसेरीडेमिया

द्विध्रुवी विकार

पाचन विकार

दवाओं का पारस्परिक प्रभाव

यदि आप निम्नलिखित दवाओं का उपभोग कर रहे हैं तो आपको अलसी बीजों का उपभोग ना करें।

मधुमेह विरोधी दवा जैसे ग्लीमीपीरीड और ग्लिपीजाइड।

एन्टीप्लेटलेट दावा जैसे क्लोपिडोग्रेल, डिक्लोफेनाक, इबुप्रोफेन, डालतेपरीन, हेपरिन, वार्फरिन, डालतेपरीन, नेपरोक्सन और एस्पिरिन।

अलसी अन्य दाहक विरोधी दवाओं, दर्द निवारक, उच्च रक्तचाप की दवाओं और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने वाली दवाओं के साथ परस्पर प्रभाव डाल सकती है।

सजग सलाह

यदि आप नियमित रूप से किसी भी प्रकार की दवा या कोई खुराक ले रहे हैं तो अलसी बीज को उस दवा के लेने से कम से कम दो घंटे पहले या बाद में लेना उचित होगा।

आयुर्वेदिक औषधियों की समाप्ति अवधि

आयुर्वेदिक औषधियों की समाप्ति अवधि
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ज़्यादातर आयुर्वेदिक औषधियों की एक विशिष्ट समाप्ति की अवधि होती है। इस लेख में, आप आयुर्वेदिक औषधि समूहों के शेल्फ जीवन और समाप्ति अवधि के बारे में सीख सकते हैं।

आयुर्वेदिक औषधियों का समूहशेल्फ जीवन

जड़ी बूटी से बना अंजन1 वर्ष

धातु के यौगिकों, रस या भस्म के साथ जड़ी बूटियों से बना

अंजन2 वर्ष

धातु के यौगिक, रस या भस्म के साथ बना अंजन3 वर्ष

अर्क12 महीने

आसव अरिष्टकोई समाप्ति तिथि नहीं (जितना पुराना उतना अच्छा)

अवलेह, लेह3 वर्ष

भस्म (सिवाय नाग भस्म, वंग भस्म, ताम्र भस्म के)कोई समाप्ति तिथि नहीं (जितना पुराना उतना अच्छा)

नाग भस्म, वंग भस्म, ताम्र भस्म5 साल (5 साल बाद ये  जमने लगती हैं और इसलिए 1 से 2 बार निस्तापन की क्रिया को दोहराया जाना चाहिए

चूर्ण2 वर्ष
दन्त मंजन चूर्ण2 वर्षदन्त मंजन पेस्ट2 वर्ष

धूपन (सांस द्वारा खींचने वाला)2 वर्ष

द्रवक, लवण, क्षार5 वर्ष

कान की औषधि2 वर्ष
आँख की औषधि1 वर्ष
घृत2 वर्ष
गुग्गुलु5 वर्ष
गुटिका और वटी (रस, धात्विक यौगिकों, भस्म के साथ जड़ी बूटियों से बनी गोलियां)5 वर्ष
गुटिका और वटी (केवल जड़ी बूटियों से बनी गोलियां)3 वर्ष
गुटिका और वटी (रस, धात्विक यौगिकों, भस्म के साथ बनी गोलियां, सिवाय नाग भस्म, वंग भस्म, ताम्र भस्म के)10 वर्ष
खंड , पाक, कणिका3 वर्ष

कूपीपक्व रसायनकोई समाप्ति तिथि नहीं (जितना पुराना उतना अच्छा)क्वाथ चूर्ण2 वर्ष
लौह (लौह संयुग्म)10 वर्ष
लेप चूर्ण2 वर्ष
लेप मल्हार (मरहम), तिला, जैल, लोशन, क्रीम3 वर्ष
मंडूर (लौह संयुग्म)10 वर्ष
मुरब्बा6 महीने
नाक की ड्रॉप्स2 वर्ष
पनक3 वर्ष
पर्पटी (सिवाय श्वेत पर्पटी के)कोई समाप्ति तिथि नहीं (जितना पुराना उतना अच्छा)श्वेत पर्पटी2 वर्ष
पिष्टीकोई समाप्ति तिथि नहीं (जितना पुराना उतना अच्छा)प्रवाही क्वाथ, कषायम (परिरक्षकों के साथ)3 वर्ष
रसौषधि (इन औषधियों में मुख्य रूप से शुद्ध पारद और शुद्ध गंधक होता है) – इसमें जड़ी-बूटियाँ या गग्गुलू भी होता है5 वर्षरसौषधि (इन औषधियों में मुख्य रूप से शुद्ध पारद और शुद्ध गंधक होता है) – इसमें केवल शुद्ध पारद, शुद्ध गंधक, भस्म, पिष्टी, धात्विक यौगिक होते हैं सिवाय नाग भस्म, वंग भस्म और ताम्र भस्म के10 वर्ष (यदि रसौषधि में नाग भस्म, वंग भस्म, ताम्र भस्म हैं,तब समाप्ति अवधि 5 वर्ष है)
जड़ी बूटियों का सत्व2 वर्ष
शर्बत3 वर्ष
शर्कर3 वर्ष
सिरप3 वर्ष
तेल, आयुर्वेदिक तेल3 वर्ष
वर्ती2 वर्ष

थायराइड

थायराइड
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त्रिकटु - 150 gm
त्रिफला - 150 gm
बाइबिडन्ग - 50 gm
अजवायन - 50 gm
चित्रका मूल - 50 gm
रस सिंदूर -    20 gm
ताम्र भस्म    - 5 gm
लौह भस्म    - 20 gm

निर्माण विधि  -  सब को आपस में  मिला ले

सेवन विधि - सुबह खाली पेट एक चम्मच पानी से ले

एक सप्ताह मे थायराइड नियंत्रित होगा

     शंख भस्म

🌹✍🏻     शंख भस्म  ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

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शंख भस्म के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

शंख भस्म (Shankh Bhasma) शंख (conch shell) से बनाई गयी एक आयुर्वेदिक औषधि है। आयुर्वेद में, शंख भस्म का उपयोग दस्त (पतले दस्त), मुहांसे, फुंसियां, यकृत वृद्धि, प्लीहा वृद्धि, पेट दर्द, अपच, भूख ना लगना, सीने में जलन, अम्ल प्रतिवाह, उदर विस्तार, शीघ्रकोपी आंत्र लक्षणों के उपचार में किया जाता है। इसके कई अन्य स्वास्थ्य लाभ और औषधीय उपयोग भी हैं।

मूलभूत जानकारी

प्रयुक्त कच्चा मालशंखऔषधि का प्रकारभस्मआयुर्वेदिक नामशंख भस्मअंग्रेजी नामChank, Turbinella Pyrum, Chank Shell, Sacred Chank, Divine Conchशंख के अन्य नामShankh Calx, Chank Calx, Shankh Ash, Conch Shell Ashरासायनिक संरचनाकैल्शियम कार्बोनेट

घटक द्रव्य (संरचना)

शुद्ध शंख

नींबू का रस

रासायनिक संरचना

कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3)92 से 95% *जैविक पदार्थ (कोंचिओलिन)5% *जल (H2O)1 से 2% *अन्यनगण्य *

* यह एक अनुमान है। रासायनिक संरचना प्रजातियों और शंख शैल के संग्रह स्थान के अनुसार भिन्न हो सकती है।

औषधीय गुण

शंख भस्म में निम्नलिखित उपचार के गुण होते हैं।

अम्लत्वनाशक

मल बाँधने वाला घटक

डायरिया विरोधी

क्षुधा उत्तेजक और पाचन उत्तेजक

आक्षेपनाशक

दाह नाशक (इसका प्रभाव यकृत, तिल्ली और आंतों पर दिखाई देता है)

कैल्शियम पूरक (अकेले उपयोग नहीं किया जाता है)

प्रतिउपचायक

वमनरोधी

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)कटुगुण (मुख्य गुणवत्ता)लघु, रूक्ष, तीक्ष्णवीर्यऊष्ण *विपाककटुचिकित्सीय प्रभावक्षारदोष कर्म (विकारों पर प्रभाव)तीनों दोषों (TRIDOSHA) को शांत करता है – मुख्यतः कफ (KAPHA)अंगों पर प्रभावपेट में सभी अंग

* उपरोक्त आयुर्वेदिक गुणों के अनुसार, आपके पास एक प्रश्न हो सकता है कि यह ऊष्ण होने पर भी अम्लता में क्यों कम करता है। आयुर्वेदिक गुणों के अनुसार, यह वात और कफ विकारों को शांत करता है,  लेकिन इसके अलावा, यह क्षार भी है, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को बेअसर करता है और अम्लता से राहत प्रदान करता है। बिना पचे भोजन के कण AMA नामक विषाक्त पदार्थों में विक्सित हो जाते हैं, जो अम्लता के लिए उत्तरदायी होते हैं। शंख भस्म भोजन को पचाने और AMA को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।

चिकित्सीय संकेत

शंख भस्म (Shankh Bhasma) निम्नलिखित स्वास्थ्य स्थितियों में मददगार है।

अति अम्लता

भूख में कमी

अपच

दस्त

यकृत वृद्धि

प्लीहा वृद्धि

वायु या पेट का फूलना

सूजन

उदर विस्तार

शीघ्रकोपी आंत्र सिंड्रोम

मुँहासे

हिचकी

लाभ और औषधीय उपयोग

शंख भस्म का प्रभाव यकृत, प्लीहा, पित्ताशय, छोटी आंत, बड़ी आंत, बृहदान्त्र, आंखों और चेहरे सहित पेट पर दिखाई देता है।

दस्त या अतिसार

आयुर्वेद, दस्त को रोकने के लिए शुरू में किसी भी औषधि का उपयोग करने का सुझाव नहीं देता है। इसलिए, जब रोगी को कम से कम छह दस्त हो गए हों या दस्त सामान्य से गंभीर हो जाए तब शंख भस्म का उपयोग करना चाहिए। शंख भस्म उचित लाभ देता है जब रोगी को कम मात्रा में लगातार मल हो रहा हो, पेट में गंभीर ऐंठन हो और उदरीय वायु हो।

अपच, सीने में जलन और अम्ल प्रतिवाह

शंख भस्म एक उत्तम अम्ल निष्क्रियक है, जो पेट में अति अम्लता को कम करता है और अम्ल उत्पादन को संशोधित करता है।

पेट में अम्ल को निष्क्रिय करने के अतिरिक्त, यह विषाक्त पदार्थों को भी समाप्त करता है, जो सीने में जलन या अपच के साथ जुड़े हो सकते हैं।

शंख भस्म अधिक प्रभावी होता है जब रोगी को उदर विस्तार, पेट में भारीपन, वायु, खाये हुए भोजन के कारण मतली या गले या मुँह में खट्टेपन और जलन का एहसास हो।

पेट में ऐंठन या दर्द

शंख भस्म पेट की मांसपेशियों पर शक्तिशाली आक्षेपनाशक क्रिया करता है। यह दस्त या किसी अन्य अंतर्निहित कारण से होने वाली पेट की ऐंठन को कम करता है। हालांकि, ऐंठन वाले कष्टार्तव में प्रवाल पिष्टी और सूतशेखर रस के साथ शंख भस्म अच्छा काम करता है।

मात्रा एवं सेवन विधि (Dosage)

शंख भस्म (Shankh Bhasma) पेट के रोगों में अन्य औषधियों के साथ प्रयोग किये जाने पर 125 मिलीग्राम के साथ प्रभावी है।

औषधीय मात्रा (Dosage)

शिशु10 से 30 मिलीग्राम
बच्चे (5 वर्ष की आयु से ऊपर)60 मिलीग्राम

वयस्क125 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम
अधिकतम संभावित खुराक1000 मिलीग्राम (विभाजित मात्रा में)

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?)खाना खाने के तुरंत बाद लेंदिन में कितनी बार लें?2 बार – सुबह और शामअनुपान (किस के साथ लें?)शहद के साथउपचार की अवधि (कितने समय तक लें)चिकित्सक की सलाह लें

दुष्प्रभाव

शंख भस्म के कारण जीभ पर विदर (पतली दरारें या घाव) हो जाते हैं यदि इसे बिना शहद या अन्य औषधि मिलाये जीभ पर रखा जाए। दूसरे, यदि इसको अकेले उपयोग किया जाए तो यह कुछ रोगियों में कब्ज भी पैदा कर सकता है।

इसलिए, शंख भस्म का उपयोग करने के लिए सह-औषध बहुत महत्त्वपूर्ण है। इससे अधिक लाभ लेने और दुष्प्रभाव रोकने के लिए सबसे उपयुक्त सहायक और संयोजन का उपयोग किया जाना चाहिए।

गर्भावस्था और स्तनपान

गर्भावस्था के दौरान जब गर्भवती महिला को कब्ज हो तो शंख भस्म का उपयोग नहीं करना चाहिए। स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए शंख भस्म संभवतः सुरक्षित है।

विपरीत संकेत (Contraindications)

शंख भस्म का मुख्य विपरीत संकेत कब्ज है। इसका बाहरी उपयोग बालों को निकालने और कील मुहांसों का उपचार करने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में, शंख भस्म के बाहरी उपयोग का विपरीत संकेत दरारें, कटी या फटी त्वचा है।

🌹✍🏻    संजीवनी प्रोडक्ट लिस्ट रेट सहित    ✍🏻🌹

काफी लोगो के कहने पर आज अपने प्रोडक्ट की रेट लिस्ट जारी की है -

*शुगर की दवा* - 1500 /माह        3 माह कोर्स

*मोटापा*- 1500/  2000/3000 / माह   3 माह कोर्स
जिन्हें हल्का बहुत वजन कम करे 1500 एक माह में 3से 4 kg कम होगा

2000वाली से 4से 6 kg वकम होगा

3000 वाली से 6 से 10 kg तक कम होगा व पूरे शरीर की 72000 नाड़ियो का सोधन होगा

जॉइंट पैन -1600/ माह   कोर्स 3 माह

अस्थमा 2000/माह।           कोर्स 3माह

किडनी फेल / डायलिसिस - 4500 /माह    कोर्स 3 माह

बबासीर - 2000 रुपये कोर्स 30 दिन

लिकोरिया / सफेद पानी - 2000 फुल कोर्स

हार्ट ब्लॉकेज - 2000/ माह कोर्स 3 माह

हाइड्रोसील / हार्निया - 2000 /माह कोर्स 2 माह

Sexul कोर्स लिंग का पतलापन , ढीलापन, छोटापन 2500 प्रतिमाह कोर्स 2 से 3 माह

परिवार नियोजन 1000 फुल कोर्स

बाल झड़ना रोकना 1200 /तीन माह फुल कोर्स

बाल उगाना 3000 /माह फुल कोर्स

रसोली / cyst - 2000/माह 3 माह कोर्स

दाद खाज खुजली - 1500/ माह 2 माह का कोर्स

पथरी गुर्दे व पित्त की साइज के अनुसार रुपये है

सफेद दाग  की दवा सफेद दाग की area को देख के रुपये बता देंगे 15 दिन में फर्क दिखेगा

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कोरियर चार्ज अलग से है दूरी के हिसाब से

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नाखून सड़ना ,पेरोनिसिया ,हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना.

  पेरोनिसिया  हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना. आयुर्वेदिक  मुलेठी 50ग्राम बडी सोफ 50 ग्राम  अच्छी हळदी 50 ग्राम  नीम पत्ते चुर्ण 50 ग्राम  ...