गुरुवार, 16 मई 2019

अलसी के बीज लाभ, उपयोग, मात्रा और दुष्प्रभाव

अलसी के बीज लाभ, उपयोग, मात्रा और दुष्प्रभाव

अलसी बीज, जिसको फ्लैक्स सीड्स (flax seeds) के नाम से भी जाना जाता है, हृदय रोग, पाचन रोग, कैंसर और मधुमेह में लाभप्रद होते हैं। अलसी के बीज दुनिया के प्रसिद्ध सुपर खाद्य पदार्थों में से एक है। यह बीज बहुत ही पौष्टिक होते हैं और कई बीमारियों को रोकने में मदद करते हैं। यह आवश्यक फैटी एसिड ओमेगा -3 से भरपूर होते हैं। अलसी बीजों में भरपूर मात्रा में आहार के लिए आवश्यक फाइबर और लिग्नन्स होते हैं।

इनकी खोज 8वीं शताब्दी में की गयी थी। सदियों से अलसी बीज का उपयोग किया जा रहा है और इनसे हृदय रोग, स्तन कैंसर और मधुमेह जैसे रोगों में मदद मिल रही है। अलसी बीज में एक एक अनूठी विशेषता है कि अगर इन बीजों को भोजन से पहले खाया जाए तो आप तृप्ति का अनुभव करेंगे। इस प्रकार, यह मोटे लोगों भोजन की लालसा और अत्यधिक भूख लगने की बीमारी को कम कर देते हैं। इसलिए, यह बीज  वजन घटाने (weight loss) के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं।

अलसी बीज के लाभ और उपयोग

कैंसर संरक्षण

अलसी बीज का उपयोग करने से स्तन, प्रोस्टेट और पेट के कैंसर के खिलाफ लड़ने में मिलती है। अलसी बीजों में मौजूद ओमेगा -3 फैटी एसिड की वजह से यह प्रभाव देखने को मिलता है।

मधुमेह

हाल के शोध से यह सिद्ध हुआ है कि प्रतिदिन दिन में तीन बार अलसी बीज का उपयोग करने से टाइप 2 मधुमेह में मदद मिल सकती है। कम से कम एक महीने के लिए अलसी बीज के चूर्ण का उपयोग करने से रक्त शर्करा के स्तर को भी कम करने में मदद मिल सकती है।

कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण

अलसी बीज शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता हैं। यह अथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त होना और उमड़ना) को भी रोकता है।

ऑस्टियोपोरोसिस

अलसी के बीज अस्थि घनत्व के स्तर में भी सुधार करता हैं। इस प्रकार यह संभवतः ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया में राहत प्रदान कर सकते हैं।

कब्ज

अलसी बीज फाइबर से भरपूर होते हैं। इसलिए, वे कब्ज की समस्याओं में भी मदद करते हैं।

रजोनिवृत्ति

अलसी बीज महिलाओं को उनकी रजोनिवृत्ति के चरण में अधिक गर्मी लगने का सामना करने में मदद करते हैं। ये बीज पूर्व रजोनिवृत्ति के लक्षणों को रोकने में भी मदद कर सकते हैं।

हृदय की समस्या

अलसी में उपस्थित अल्फा लिनोलेनिक एसिड हृदय की समस्याओं के जोखिम को कम करती है।

एडीएचडी (ध्यान अभाव सक्रियता विकार) में मदद

अलसी संभवतः एडीएचडी (ध्यान अभाव सक्रियता विकार) में दिखने वाले लक्षणों को बेहतर बनाती है।

अन्य लाभ

अलसी बीज निम्न रोगों में मदद करते हैं, लेकिन इन रोगों में इसकी प्रभावकारिता के कुछ ही सबूत उपलब्ध हैं।

बढ़ी हुई पौरुष ग्रंथि

ह्रदय रोग

अंतर्गर्भाशयकला कैंसर

स्तनों में दर्द

फेफड़ों का कैंसर

वजन घटना

पेट खराब होना

त्वचा की जलन

मूत्राशय में सूजन

अलसी बीज के दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट्स)

अलसी के बीजों का अधिक मात्रा में में उपयोग करने से कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जो की बहुत नगण्य हैं। इन दुष्प्रभावों में शामिल हैं।

गैस्ट्रिक समस्या

पेट दर्द

सूजन

जी मिचलाना

दस्त

आंतरिक रक्तस्राव

आंत्र सिंड्रोम में वृद्धि

प्रोस्टेट कैंसर का खतरा

सावधानियां

यदि आप को कोई निम्नलिखित समस्या हैं तो अलसी बीज का उपयोग संभवतः असुरक्षित हो सकता है।

भोजन की एलर्जी

आंत्र की सूजन का रोग

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बाधा

रक्तस्राव विकार

कम रक्त दबाव

उच्च रक्तचाप

हैपरट्रिगलीसेरीडेमिया

द्विध्रुवी विकार

पाचन विकार

दवाओं का पारस्परिक प्रभाव

यदि आप निम्नलिखित दवाओं का उपभोग कर रहे हैं तो आपको अलसी बीजों का उपभोग ना करें।

मधुमेह विरोधी दवा जैसे ग्लीमीपीरीड और ग्लिपीजाइड।

एन्टीप्लेटलेट दावा जैसे क्लोपिडोग्रेल, डिक्लोफेनाक, इबुप्रोफेन, डालतेपरीन, हेपरिन, वार्फरिन, डालतेपरीन, नेपरोक्सन और एस्पिरिन।

अलसी अन्य दाहक विरोधी दवाओं, दर्द निवारक, उच्च रक्तचाप की दवाओं और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने वाली दवाओं के साथ परस्पर प्रभाव डाल सकती है।

सजग सलाह

यदि आप नियमित रूप से किसी भी प्रकार की दवा या कोई खुराक ले रहे हैं तो अलसी बीज को उस दवा के लेने से कम से कम दो घंटे पहले या बाद में लेना उचित होगा।

आयुर्वेदिक औषधियों की समाप्ति अवधि

आयुर्वेदिक औषधियों की समाप्ति अवधि
―――――――――――–――――――――

ज़्यादातर आयुर्वेदिक औषधियों की एक विशिष्ट समाप्ति की अवधि होती है। इस लेख में, आप आयुर्वेदिक औषधि समूहों के शेल्फ जीवन और समाप्ति अवधि के बारे में सीख सकते हैं।

आयुर्वेदिक औषधियों का समूहशेल्फ जीवन

जड़ी बूटी से बना अंजन1 वर्ष

धातु के यौगिकों, रस या भस्म के साथ जड़ी बूटियों से बना

अंजन2 वर्ष

धातु के यौगिक, रस या भस्म के साथ बना अंजन3 वर्ष

अर्क12 महीने

आसव अरिष्टकोई समाप्ति तिथि नहीं (जितना पुराना उतना अच्छा)

अवलेह, लेह3 वर्ष

भस्म (सिवाय नाग भस्म, वंग भस्म, ताम्र भस्म के)कोई समाप्ति तिथि नहीं (जितना पुराना उतना अच्छा)

नाग भस्म, वंग भस्म, ताम्र भस्म5 साल (5 साल बाद ये  जमने लगती हैं और इसलिए 1 से 2 बार निस्तापन की क्रिया को दोहराया जाना चाहिए

चूर्ण2 वर्ष
दन्त मंजन चूर्ण2 वर्षदन्त मंजन पेस्ट2 वर्ष

धूपन (सांस द्वारा खींचने वाला)2 वर्ष

द्रवक, लवण, क्षार5 वर्ष

कान की औषधि2 वर्ष
आँख की औषधि1 वर्ष
घृत2 वर्ष
गुग्गुलु5 वर्ष
गुटिका और वटी (रस, धात्विक यौगिकों, भस्म के साथ जड़ी बूटियों से बनी गोलियां)5 वर्ष
गुटिका और वटी (केवल जड़ी बूटियों से बनी गोलियां)3 वर्ष
गुटिका और वटी (रस, धात्विक यौगिकों, भस्म के साथ बनी गोलियां, सिवाय नाग भस्म, वंग भस्म, ताम्र भस्म के)10 वर्ष
खंड , पाक, कणिका3 वर्ष

कूपीपक्व रसायनकोई समाप्ति तिथि नहीं (जितना पुराना उतना अच्छा)क्वाथ चूर्ण2 वर्ष
लौह (लौह संयुग्म)10 वर्ष
लेप चूर्ण2 वर्ष
लेप मल्हार (मरहम), तिला, जैल, लोशन, क्रीम3 वर्ष
मंडूर (लौह संयुग्म)10 वर्ष
मुरब्बा6 महीने
नाक की ड्रॉप्स2 वर्ष
पनक3 वर्ष
पर्पटी (सिवाय श्वेत पर्पटी के)कोई समाप्ति तिथि नहीं (जितना पुराना उतना अच्छा)श्वेत पर्पटी2 वर्ष
पिष्टीकोई समाप्ति तिथि नहीं (जितना पुराना उतना अच्छा)प्रवाही क्वाथ, कषायम (परिरक्षकों के साथ)3 वर्ष
रसौषधि (इन औषधियों में मुख्य रूप से शुद्ध पारद और शुद्ध गंधक होता है) – इसमें जड़ी-बूटियाँ या गग्गुलू भी होता है5 वर्षरसौषधि (इन औषधियों में मुख्य रूप से शुद्ध पारद और शुद्ध गंधक होता है) – इसमें केवल शुद्ध पारद, शुद्ध गंधक, भस्म, पिष्टी, धात्विक यौगिक होते हैं सिवाय नाग भस्म, वंग भस्म और ताम्र भस्म के10 वर्ष (यदि रसौषधि में नाग भस्म, वंग भस्म, ताम्र भस्म हैं,तब समाप्ति अवधि 5 वर्ष है)
जड़ी बूटियों का सत्व2 वर्ष
शर्बत3 वर्ष
शर्कर3 वर्ष
सिरप3 वर्ष
तेल, आयुर्वेदिक तेल3 वर्ष
वर्ती2 वर्ष

थायराइड

थायराइड
#####

त्रिकटु - 150 gm
त्रिफला - 150 gm
बाइबिडन्ग - 50 gm
अजवायन - 50 gm
चित्रका मूल - 50 gm
रस सिंदूर -    20 gm
ताम्र भस्म    - 5 gm
लौह भस्म    - 20 gm

निर्माण विधि  -  सब को आपस में  मिला ले

सेवन विधि - सुबह खाली पेट एक चम्मच पानी से ले

एक सप्ताह मे थायराइड नियंत्रित होगा

     शंख भस्म

🌹✍🏻     शंख भस्म  ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________

शंख भस्म के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

शंख भस्म (Shankh Bhasma) शंख (conch shell) से बनाई गयी एक आयुर्वेदिक औषधि है। आयुर्वेद में, शंख भस्म का उपयोग दस्त (पतले दस्त), मुहांसे, फुंसियां, यकृत वृद्धि, प्लीहा वृद्धि, पेट दर्द, अपच, भूख ना लगना, सीने में जलन, अम्ल प्रतिवाह, उदर विस्तार, शीघ्रकोपी आंत्र लक्षणों के उपचार में किया जाता है। इसके कई अन्य स्वास्थ्य लाभ और औषधीय उपयोग भी हैं।

मूलभूत जानकारी

प्रयुक्त कच्चा मालशंखऔषधि का प्रकारभस्मआयुर्वेदिक नामशंख भस्मअंग्रेजी नामChank, Turbinella Pyrum, Chank Shell, Sacred Chank, Divine Conchशंख के अन्य नामShankh Calx, Chank Calx, Shankh Ash, Conch Shell Ashरासायनिक संरचनाकैल्शियम कार्बोनेट

घटक द्रव्य (संरचना)

शुद्ध शंख

नींबू का रस

रासायनिक संरचना

कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3)92 से 95% *जैविक पदार्थ (कोंचिओलिन)5% *जल (H2O)1 से 2% *अन्यनगण्य *

* यह एक अनुमान है। रासायनिक संरचना प्रजातियों और शंख शैल के संग्रह स्थान के अनुसार भिन्न हो सकती है।

औषधीय गुण

शंख भस्म में निम्नलिखित उपचार के गुण होते हैं।

अम्लत्वनाशक

मल बाँधने वाला घटक

डायरिया विरोधी

क्षुधा उत्तेजक और पाचन उत्तेजक

आक्षेपनाशक

दाह नाशक (इसका प्रभाव यकृत, तिल्ली और आंतों पर दिखाई देता है)

कैल्शियम पूरक (अकेले उपयोग नहीं किया जाता है)

प्रतिउपचायक

वमनरोधी

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)कटुगुण (मुख्य गुणवत्ता)लघु, रूक्ष, तीक्ष्णवीर्यऊष्ण *विपाककटुचिकित्सीय प्रभावक्षारदोष कर्म (विकारों पर प्रभाव)तीनों दोषों (TRIDOSHA) को शांत करता है – मुख्यतः कफ (KAPHA)अंगों पर प्रभावपेट में सभी अंग

* उपरोक्त आयुर्वेदिक गुणों के अनुसार, आपके पास एक प्रश्न हो सकता है कि यह ऊष्ण होने पर भी अम्लता में क्यों कम करता है। आयुर्वेदिक गुणों के अनुसार, यह वात और कफ विकारों को शांत करता है,  लेकिन इसके अलावा, यह क्षार भी है, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को बेअसर करता है और अम्लता से राहत प्रदान करता है। बिना पचे भोजन के कण AMA नामक विषाक्त पदार्थों में विक्सित हो जाते हैं, जो अम्लता के लिए उत्तरदायी होते हैं। शंख भस्म भोजन को पचाने और AMA को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।

चिकित्सीय संकेत

शंख भस्म (Shankh Bhasma) निम्नलिखित स्वास्थ्य स्थितियों में मददगार है।

अति अम्लता

भूख में कमी

अपच

दस्त

यकृत वृद्धि

प्लीहा वृद्धि

वायु या पेट का फूलना

सूजन

उदर विस्तार

शीघ्रकोपी आंत्र सिंड्रोम

मुँहासे

हिचकी

लाभ और औषधीय उपयोग

शंख भस्म का प्रभाव यकृत, प्लीहा, पित्ताशय, छोटी आंत, बड़ी आंत, बृहदान्त्र, आंखों और चेहरे सहित पेट पर दिखाई देता है।

दस्त या अतिसार

आयुर्वेद, दस्त को रोकने के लिए शुरू में किसी भी औषधि का उपयोग करने का सुझाव नहीं देता है। इसलिए, जब रोगी को कम से कम छह दस्त हो गए हों या दस्त सामान्य से गंभीर हो जाए तब शंख भस्म का उपयोग करना चाहिए। शंख भस्म उचित लाभ देता है जब रोगी को कम मात्रा में लगातार मल हो रहा हो, पेट में गंभीर ऐंठन हो और उदरीय वायु हो।

अपच, सीने में जलन और अम्ल प्रतिवाह

शंख भस्म एक उत्तम अम्ल निष्क्रियक है, जो पेट में अति अम्लता को कम करता है और अम्ल उत्पादन को संशोधित करता है।

पेट में अम्ल को निष्क्रिय करने के अतिरिक्त, यह विषाक्त पदार्थों को भी समाप्त करता है, जो सीने में जलन या अपच के साथ जुड़े हो सकते हैं।

शंख भस्म अधिक प्रभावी होता है जब रोगी को उदर विस्तार, पेट में भारीपन, वायु, खाये हुए भोजन के कारण मतली या गले या मुँह में खट्टेपन और जलन का एहसास हो।

पेट में ऐंठन या दर्द

शंख भस्म पेट की मांसपेशियों पर शक्तिशाली आक्षेपनाशक क्रिया करता है। यह दस्त या किसी अन्य अंतर्निहित कारण से होने वाली पेट की ऐंठन को कम करता है। हालांकि, ऐंठन वाले कष्टार्तव में प्रवाल पिष्टी और सूतशेखर रस के साथ शंख भस्म अच्छा काम करता है।

मात्रा एवं सेवन विधि (Dosage)

शंख भस्म (Shankh Bhasma) पेट के रोगों में अन्य औषधियों के साथ प्रयोग किये जाने पर 125 मिलीग्राम के साथ प्रभावी है।

औषधीय मात्रा (Dosage)

शिशु10 से 30 मिलीग्राम
बच्चे (5 वर्ष की आयु से ऊपर)60 मिलीग्राम

वयस्क125 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम
अधिकतम संभावित खुराक1000 मिलीग्राम (विभाजित मात्रा में)

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?)खाना खाने के तुरंत बाद लेंदिन में कितनी बार लें?2 बार – सुबह और शामअनुपान (किस के साथ लें?)शहद के साथउपचार की अवधि (कितने समय तक लें)चिकित्सक की सलाह लें

दुष्प्रभाव

शंख भस्म के कारण जीभ पर विदर (पतली दरारें या घाव) हो जाते हैं यदि इसे बिना शहद या अन्य औषधि मिलाये जीभ पर रखा जाए। दूसरे, यदि इसको अकेले उपयोग किया जाए तो यह कुछ रोगियों में कब्ज भी पैदा कर सकता है।

इसलिए, शंख भस्म का उपयोग करने के लिए सह-औषध बहुत महत्त्वपूर्ण है। इससे अधिक लाभ लेने और दुष्प्रभाव रोकने के लिए सबसे उपयुक्त सहायक और संयोजन का उपयोग किया जाना चाहिए।

गर्भावस्था और स्तनपान

गर्भावस्था के दौरान जब गर्भवती महिला को कब्ज हो तो शंख भस्म का उपयोग नहीं करना चाहिए। स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए शंख भस्म संभवतः सुरक्षित है।

विपरीत संकेत (Contraindications)

शंख भस्म का मुख्य विपरीत संकेत कब्ज है। इसका बाहरी उपयोग बालों को निकालने और कील मुहांसों का उपचार करने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में, शंख भस्म के बाहरी उपयोग का विपरीत संकेत दरारें, कटी या फटी त्वचा है।

🌹✍🏻    संजीवनी प्रोडक्ट लिस्ट रेट सहित    ✍🏻🌹

काफी लोगो के कहने पर आज अपने प्रोडक्ट की रेट लिस्ट जारी की है -

*शुगर की दवा* - 1500 /माह        3 माह कोर्स

*मोटापा*- 1500/  2000/3000 / माह   3 माह कोर्स
जिन्हें हल्का बहुत वजन कम करे 1500 एक माह में 3से 4 kg कम होगा

2000वाली से 4से 6 kg वकम होगा

3000 वाली से 6 से 10 kg तक कम होगा व पूरे शरीर की 72000 नाड़ियो का सोधन होगा

जॉइंट पैन -1600/ माह   कोर्स 3 माह

अस्थमा 2000/माह।           कोर्स 3माह

किडनी फेल / डायलिसिस - 4500 /माह    कोर्स 3 माह

बबासीर - 2000 रुपये कोर्स 30 दिन

लिकोरिया / सफेद पानी - 2000 फुल कोर्स

हार्ट ब्लॉकेज - 2000/ माह कोर्स 3 माह

हाइड्रोसील / हार्निया - 2000 /माह कोर्स 2 माह

Sexul कोर्स लिंग का पतलापन , ढीलापन, छोटापन 2500 प्रतिमाह कोर्स 2 से 3 माह

परिवार नियोजन 1000 फुल कोर्स

बाल झड़ना रोकना 1200 /तीन माह फुल कोर्स

बाल उगाना 3000 /माह फुल कोर्स

रसोली / cyst - 2000/माह 3 माह कोर्स

दाद खाज खुजली - 1500/ माह 2 माह का कोर्स

पथरी गुर्दे व पित्त की साइज के अनुसार रुपये है

सफेद दाग  की दवा सफेद दाग की area को देख के रुपये बता देंगे 15 दिन में फर्क दिखेगा

केंसर के पेशेंट भी सम्पर्क करें -

कोरियर चार्ज अलग से है दूरी के हिसाब से

दवा के लिए सम्पर्क करें
*Dr.guruvendra singh*
   *(D.N.Y.S  & B.E.M.S)*

Call -9466623519

Whatsup -9466623519

guruvendra singh

axis bank -915010008875028
ifsc code - UTIB0000226
rewari , hariyana

paytm no - 9466623519
Google pay -9466623519
Phone pay -9466623519

------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
9466623519

दवा कोरियर , या indianpost से भेजने की सुविधा है व पेमेंट acc में या google play , paytm , phone pay के द्वारा कर सकते है ।
पेमेंट करने के बाद ही दवा भेजने की सुबिधा है कैश ऑन डिलेवरी नही है ।
   
👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-
हमारे किसी भी ग्रुप में जुड़ने के लिए मेसेज करे 9466623519

_________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
__________________________

शिरोरोग

🌹✍🏻   शिरोरोग    ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________

🌻शिरो रोग पर शास्त्रोक्त व् अनुभूत जानकारी उपलब्ध करवाने हेतु शार्ङ्गधर विचार मंच निम्न विद्वज्जनों का हार्दिक आभार व्यक्त करता है-----
सर्व श्री डॉ अम्बाशंकर जी दवे, डॉ जगदीश जी शर्मा, डॉ  रमेश जी भूतिया,डॉ विजय प्रकाश जी गौतम,डॉ दया शंकर जी(पतंजलि योग पीठ हरिद्वार),प्रो दीप नारायण जी पांडेय,डॉ हरिओम जी शर्मा,डॉ शक्ति असेरी जी,डॉ ज्योति जी वर्मा,डॉ इंदुबाला जी,डॉ माणक जी गौड़, डॉ ब्रिज किशोर जी मिश्रा।

🌷निवेदन-----🌷
प्रस्तुत आलेख में समस्त जानकारी स्व अनुभूत व् विभिन्न स्रोतों से प्राप्त की गयी है जिसका उद्देश्य मात्र स्वस्थ भारत निर्माण हेतु ज्ञान वर्धन व् आयुर्वेद का प्रचार प्रसार है। इसमें प्रदान की गयी चिकित्सा आदि का प्रयोग स्वविवेक व् योग्य चिकित्सक के परामर्श उपरान्त ही करें। किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव होने वाली हानि के लिए ये मंच या मंच का सदस्य उत्तरदायी नहीं होगा।

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

                        🌻*शिरो रोग*🌻
शिरो रोग के लिये
      शिर शूल
      शिरोेभि ताप
      शिरो वेदना
शब्द का व्यवहार होता है। आयुर्वेद इसे अन्य रोगो के लक्षणो के साथ स्वतंत्र रोग भी मानता है।आधुनिक विद्वान इसे मात्र एक लक्षण मानते हैं जो अनेक व्याधियॉ में मिलता है।

🍀 आधुनिक दृष्टिकोण से

सिर के निम्न भागो में दबाव पडने से शिर शूल की उत्पत्ति होती है।
🌻 *करोटिबहिर्गत कारण*
इसमें कपालास्थि तथा उसकी पेशियॉ
ओर रक्त वाहिनी सिराओं पर दबाव पडने से शिर शूल होता है।

🌻 *कपालान्तर्गत कारण*
कपालास्थि व बडी बडी रक्त वाहिनीयो तथा पंचम, नवम, व दशम
शीर्षण्य नाडीयो पर प्रभाव होने से शिरःशूल होता है।

🌻मस्तिष्क के निम्न रोगो में शिरःशूल पाया जाता है।
Ceribral tumour
Meningitis
Ceribro spinal fluid की वृद्धि
नेत्र, नासिका, कर्ण, तथा दॉतो के व्रण शोथ पुरकपालवायुविवरशोथ अस्थि शोथ,प्रतिश्याय,तारामंडलशोथ, अधिमंथ दंतगतशोथ मध्य कर्ण शोथ

Nervous headache
त्रिशाखा नाडी शूल
मस्तिष्क गत फिरंग
मस्तिष्कावरणशोथ
विद्रधि

जीर्ण वृक्क शोथ
मूत्र विषमयता
उच्च रक्त चाप
योषापस्मार
ऑत्रिकज्वर
मसूरिका आदि
           रोगो के कारण शिरःशूल होता है।

🍀 *शिरो रोगो के कारण*🍀
अविधि धूमपान
धूप या अग्नि सेवन
तुषार सेवन
देर तक जल क्रीडा
अधिक सोेने से
अधिक जागने से
अधिक स्वेदन
अधिक मन संताप
पूर्वी हवा से
ऑसुओ के वेग रोकना से
अधिक रोने से
अधिक जल या मद्य पीने से
सिर के भीतर कृमि होने से
पुरुष मूत्र वेग धारण से
ऊंचा तकिया लगाने से
अस्वच्छता
अभ्यंग नहीं करने से
लगातार नीचे देखने से
असात्म्य गंध सूंघने से
दूषित जल पीने से
आम दोष से
अधिक बोलने से
       शिर प्रदेश में कुपित दोष
शिरो रोगो को उत्पन्न करते हैं।

🌼 *शिरो रोग संख्या मे मतभिन्नता*🌼
चरक   ----- ---5
सुश्रुत.    -------11
अष्टॉग ह्रदय---10

🌺 *वातिक शिरो रोग*
शंख प्रदेश में सूचि भेदन वत पीडा
घाटा(ग्रीवा का पिछला भाग) में आरी
से चीरने के समान पीडा
दोनो भ्रू के बीच  व ललाट में तीव्र वेदना
कानो में अत्यंत शब्द
नेत्र बाहर खींच रहा है वेदना
भ्रम
क्लम
शिर प्रदेश की सभी संधिया अलग होने जैसी पीडा
शिरा घमनी स्फुरण
मन्यास्तंभ

🍀 *पैत्तिक शिरःशूल*
शिरो दाह वेदना
नेत्र दाह
तृष्णाः
स्वेदाधिक्य

🍀 *श्लेष्मिक शिरःशूल*
मंद वेदना
शिर स्तैमित्य
शिरो गौरव
अरुचि
आलस्य

🍀 *कृमिज शिरःशूल*
व्यधवत पीडा
छेदन वत पीडा
कंडू
शोफ
दुर्गंध

🍀 *शंखक शिरःशूल*
शंख प्रदेश में तीव्र पीडा
लालिमा
भंयकर शोथ

🍀 *अर्द्धावभेदक*
शिर के १/२ प्रदेश में तीव्र पीडा
कर्ण, नेत्र पीडा
शस्त्र से काटने जैसी पीडा

🍀  *सूर्यावर्त*
सूर्योदय से सूर्यास्त तक तीव्र पीडा

🍀 *अनन्तवात*
मन्या,पृष्ठ, घाटा में तीव्र पीडा
नेत्र रोग
हनुग्रह
कम्प

🌺 *शिरोरोग चिकित्सा*🌺

🍀वातज शिरो रोग चिकित्सा
वातध्न नस्य
स्नेहन
स्वेदन
वात दोष नाशक अन्नपान

🍀 पित्तज शिरःशूल चिकित्सा
घृत पान
दुग्ध पान
नस्य
शीतल परिशेक
शीतल लेप
पित्त नाशक अन्नपान

🍀कफज शिरो रोग
स्वेदन
घूमपान
नस्य
कफघ्न प्रलेप
कफघ्न अन्नपान
पुराना घृत पान
शिरोबस्ति

🍀आचार्य वाग्भट के अनुसार
पुरुष शरीर अश्वत्थ वृक्ष के समान है।
इस वृक्ष का मूल मस्तिष्क रुपि प्रधान अंग सिर उपर
हस्तपादादि शाखायें नीचे।
अतः मूल प्रहार कारी रोगो को शिघ्र
नष्ट करने का प्रयत्न करना चाहिये।

🍀यद्यपि शिरो रोग प्रायः त्रिदोषज होते है तथापि दोषो की प्रधानाप्रधान का विचार कर प्रथम उल्वण रोग की चिकित्सा करना चाहिये।

🍀शिरो विरेचन
दोषो की उर्ध्व गति होने से मस्तिष्क में लीन हो जाते हैं इस दृष्टि से स्वेदन तथा उपनाह करने से अवस्थित गाढे पिधलकर स्राव के रुप में पिघलकर
स्राव के रुप में बाहर निकल जाते है।
आमज अव स्थान मे शुष्क स्वेद दे।
बंधन वातज शिरो रोग में  पट्टी बॉधने से लाभ मिलता है।
कवल गंडूष
      इसे करने से प्रसृत दोष मुख से बाहर निकल जाते हैं।
लेप लगाने से स्थानिक शान्ति मिल जाती है।
शीत ऋतु मे उष्ण उपक्रम
उष्ण ऋतु मैं शीत उपक्रम हितकारी होता है।

🍀नस्य कर्म की विशिष्टता
शिरो रोग या उर्ध्व जत्रुगत रोगो में नस्य कर्म प्रधान माना जाता है।
चरक के अनुसार
नियमित नस्य लेने से
नेत्र,नासा कर्ण, की शक्ति अक्षुण्ण
रहती है। सिर के बाल समय से पूर्व
श्वेत व कपिल वर्ण के नहीं होते।गिरते भी नहीं है।
नस्य कर्म से सिर तथा कपाल कीसिराए, संधियॉ, स्नायु, कंडराए तर्पित होकर  बलशाली हो जाती है।
इन्द्रियॉ निर्मल हो जाती है।
नस्य कर्म से
शिरःशूल
मन्या स्तंभ
अर्दित
हनुग्रह
पीनस
अर्द्धावभेदक
शिरकंपन रोग नष्ट होते है।

ऩासा शिर का द्वार है। इस लिये  मार्ग से पंहुचायी ओषध समस्त सिर में व्याप्त होकर वहॉ के रोगो को नष्ट कर देती है।

🍀शिर पर तैल प्रयोग
शार्गंधर मतानुसार शिर पर तैल लगाने की चार विधिसॉ है।
अभ्यंग
परिशेक (शिरोधारा)
पिचुधारण
शिरोबस्ति
        उत्तरोत्तर लाभ दायक है।

🌻agar koi bhi sirasool hai usmai agar dosh  ka ansha ansh kalpana kar kai treatment kia jai to safalta nischai hi prapt hoga,

🌻Agar result nahi milta hai to nasyam, sirodhara, talam , yognindra in sab  treatment procedure add karnai sai  to sure success mil jayiga.

🌻Lakin in sab  treatment procedure mai medicine Jo use hoga WO bhi dosh  kai ansha ansha kalpna sai  hi hoga

🌻सूर्यावर्त  मे मुख्य निदान.  वेगसंधारण व अजीण होते है  चिकित्सा मेधृतपान शिरोविरेचन सिचन उपनाह नस्य

🍀 *अनुभव जन्य चिकित्सा*🍀

🌻वातिक शिरोरोग मे वात विध्ंवसक रस उष्णोदक के साथ देने से लाभ होता है

🌻ज्वर, द्वन्दज.-विषम ज्वर आदि अनेक दूसरे रोगो के कारण शिरशूल अवश्य होता है कास विशेषकर जीर्ण कास में, अजीर्ण में, स्त्रियों के गर्भाशय में पीडा होने पर, मासिक धर्म के समय... शिरशूल होता है

Ardhavibhedak shul
त्रिफला चूर्ण ले ते रहने से भी लाभ होता  है।

🌻कफज शिरोरोग मे वमन त्रिकटुक्वाथ का गण्डूष  धृतपान. त्रिभुवनकीति शहद से सेवन

🌻पैतिक व रक्तज मे दुध से सिचंन    लालकमल शवेतचदंन नागरमोथा यष्टि को घी के साथ पीसकर सिर पर लेप

🌻Srpghn+sutshekhr rs milk k sath

🌻Suryavrt मे मुख्य निदान.  वेगसंधारण व अजीण होते है  चिकित्सा मेधृतपान शिरोविरेचन सिचन उपनाह नस्य

🌻भल्लातक अवलेह दूध के साथ देने से जीर्ण शिरः शूल में लाभ

🌻प्रतिश्याय जनित शिर:शूल मे   निम्न व्यवस्था पत्रक/----

सितोपलादि चूर्ण 2 gm
गोदंती भस्म 500 mg
शिरः शुलादि वज्र रस 250 mg
-----+----------------------
bd sahd से देवे
वात शुलानतक बाम  extranl use कराए 4 head

🍀 *सामान्य सिर दर्द की अनुभूति चिकित्सा*🍀
(गैस,वात, पित्त प्रकोप,कब्ज,तनाव,बीपी आदि कारणों से)

सुतशेखर रास--------10ग्राम
गोदन्ती भस्म---------10ग्राम
शिरः शुलादि वज्र रास---10ग्राम
लक्ष्मी विलास रस--------10ग्राम(अभ्रक युक्त)

सभी को मिलाकर 40 पुड़िया बनाएं।
सुबह शाम (या आवश्यकतानुसार दोपहर को भी) शहद से

भोजन के बाद पथ्यादि काढ़ा
रात्रि में कब्ज नाशक चूर्ण।

🌻चिंता आदि के कारण जीर्ण शिरः शूल में
शंखपुष्पी
शतावर
ब्राह्मी
जटामांसी

संभाग लेकर मिश्री के साथ 3 से 5 ग्राम का सेवन विशेष लाभदायक है ।
अन्य औषधियों का प्रयोग आवश्यकतानुसार कर सकते हैं।

🍀प्रातः उठते ही यदि सिर दर्द हो तो उक्त प्रयोग में जलेबी के ऊपर वचा का चूर्ण 2 से 5 ग्राम तक डॉलकर जलेबी खाएं तथा थोड़ी से जलेबी की ही चाशनी पीएं।

🍀Ardh- avbhedk मे मुख्यता सिर मे आरी से काटने समान आधे सिर मे वेदना होती है अधिक दिन रहने पर नेत्र व कान का नाश करता है

🌻त्रिभुवनकीति रस सूतशेखर रस वातविंध्वसक रस सरपगंधा वसन्तमालती का योग रोगी की अवस्थानुसार देने से लाभ

🌺 *विशेष अनुभूत चिकित्सा*🌺
(डॉ अम्बाशंकर जी दवे)

*सूर्यावर्त*---–-----
(1)गोदन्तिभस्भ-----------1gr
प्रवालभस्म--–-----------500mg
एला--------------------2नग

दधि के अनुपानसे  सूर्योदय से एक घंटा पूर्व सेवन करे। सात दिन तक।प्रथम दिन से ही लाभ मिलना प्रारंभ होगा।।

(2)नारियलगोला-----1
कायफल ---------------25ग्राम
बादाम----------------100ग्राम
फीकामावा------------500ग्राम
गोघृत --------------------200ग्राम
केशर------------------1 ग्राम
शक्कर---–-------–-----250ग्राम
1---से--4 तक को मिलाकर घृत में सेके लाल होने तक।शक्कर की चासनी बना केशर मिला कर सब को मिला कर चक्की जमा दे।
प्रातः सूर्योदय पर 20ग्राम रोज सेवन करे।
जीर्णोद्धार से जीर्ण शिरः शूल त्रिदोषज भी अवश्य ठीक होगा।
।।शतसोनुभूत।।

🍀 (अनुभूत डॉ जगदीश जी शर्मा)
*Ardhavbhedak*

Pratah early morning me jaldi uth kar rogi ko
Tab Cephagraine ( charak)2
Taja makkhan se deejiye

Patient ko rogi pareekhshan Table per lita kar Cephgraine Nesal drop dono nathuno me daliye

Shirshshooladi vajr ras 125 mg + Godanti bhashm 250 mg  with honey

Night ko .
Trifgol  ( Dabur) 20 gm gungune pani se

🌹 *गोदन्ती भस्म बेसन के हलवे के साथ तथा मालपुआ भी शिरः शूल में अत्यंत लाभदायक हैं*

🌺 *गोदन्ती मिश्रण*🌺
Godanti mishran 3 type k h....
(1)Godanti bhasm 125 mg
     shring bhasm 62.5 mg 
     pippali mool 31.25 mg
     karpoor 31.25mg.....2.G

(2)godanti bhasm--- 200mg
     jaharmohra khatai pishti
     50mg
     Rasaadi ras 50mgI

(3)Godanti bhasm 200mg
     jaharmohra pishti 50mg
    Raasnaadi vati---50mg

*inme se kis mishran ko konse shirahsool mai Dena h*

✅ नं1- प्रतिश्यायज शिरः शूल।
✅नं2- ज्वरजन्य शिरःशूल मे।
वैसे दोनो ही योग  ज्वर प्रतिश्याय कास जन्य अन्य वेदनाओ यथा अंगमर्द आदि मे भी उपयोगी है।




------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
7985817113👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-

_____________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
7985817113
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
______________________________

नाखून सड़ना ,पेरोनिसिया ,हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना.

  पेरोनिसिया  हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना. आयुर्वेदिक  मुलेठी 50ग्राम बडी सोफ 50 ग्राम  अच्छी हळदी 50 ग्राम  नीम पत्ते चुर्ण 50 ग्राम  ...