गुरुवार, 16 मई 2019

शिरोरोग

🌹✍🏻   शिरोरोग    ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________

🌻शिरो रोग पर शास्त्रोक्त व् अनुभूत जानकारी उपलब्ध करवाने हेतु शार्ङ्गधर विचार मंच निम्न विद्वज्जनों का हार्दिक आभार व्यक्त करता है-----
सर्व श्री डॉ अम्बाशंकर जी दवे, डॉ जगदीश जी शर्मा, डॉ  रमेश जी भूतिया,डॉ विजय प्रकाश जी गौतम,डॉ दया शंकर जी(पतंजलि योग पीठ हरिद्वार),प्रो दीप नारायण जी पांडेय,डॉ हरिओम जी शर्मा,डॉ शक्ति असेरी जी,डॉ ज्योति जी वर्मा,डॉ इंदुबाला जी,डॉ माणक जी गौड़, डॉ ब्रिज किशोर जी मिश्रा।

🌷निवेदन-----🌷
प्रस्तुत आलेख में समस्त जानकारी स्व अनुभूत व् विभिन्न स्रोतों से प्राप्त की गयी है जिसका उद्देश्य मात्र स्वस्थ भारत निर्माण हेतु ज्ञान वर्धन व् आयुर्वेद का प्रचार प्रसार है। इसमें प्रदान की गयी चिकित्सा आदि का प्रयोग स्वविवेक व् योग्य चिकित्सक के परामर्श उपरान्त ही करें। किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव होने वाली हानि के लिए ये मंच या मंच का सदस्य उत्तरदायी नहीं होगा।

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

                        🌻*शिरो रोग*🌻
शिरो रोग के लिये
      शिर शूल
      शिरोेभि ताप
      शिरो वेदना
शब्द का व्यवहार होता है। आयुर्वेद इसे अन्य रोगो के लक्षणो के साथ स्वतंत्र रोग भी मानता है।आधुनिक विद्वान इसे मात्र एक लक्षण मानते हैं जो अनेक व्याधियॉ में मिलता है।

🍀 आधुनिक दृष्टिकोण से

सिर के निम्न भागो में दबाव पडने से शिर शूल की उत्पत्ति होती है।
🌻 *करोटिबहिर्गत कारण*
इसमें कपालास्थि तथा उसकी पेशियॉ
ओर रक्त वाहिनी सिराओं पर दबाव पडने से शिर शूल होता है।

🌻 *कपालान्तर्गत कारण*
कपालास्थि व बडी बडी रक्त वाहिनीयो तथा पंचम, नवम, व दशम
शीर्षण्य नाडीयो पर प्रभाव होने से शिरःशूल होता है।

🌻मस्तिष्क के निम्न रोगो में शिरःशूल पाया जाता है।
Ceribral tumour
Meningitis
Ceribro spinal fluid की वृद्धि
नेत्र, नासिका, कर्ण, तथा दॉतो के व्रण शोथ पुरकपालवायुविवरशोथ अस्थि शोथ,प्रतिश्याय,तारामंडलशोथ, अधिमंथ दंतगतशोथ मध्य कर्ण शोथ

Nervous headache
त्रिशाखा नाडी शूल
मस्तिष्क गत फिरंग
मस्तिष्कावरणशोथ
विद्रधि

जीर्ण वृक्क शोथ
मूत्र विषमयता
उच्च रक्त चाप
योषापस्मार
ऑत्रिकज्वर
मसूरिका आदि
           रोगो के कारण शिरःशूल होता है।

🍀 *शिरो रोगो के कारण*🍀
अविधि धूमपान
धूप या अग्नि सेवन
तुषार सेवन
देर तक जल क्रीडा
अधिक सोेने से
अधिक जागने से
अधिक स्वेदन
अधिक मन संताप
पूर्वी हवा से
ऑसुओ के वेग रोकना से
अधिक रोने से
अधिक जल या मद्य पीने से
सिर के भीतर कृमि होने से
पुरुष मूत्र वेग धारण से
ऊंचा तकिया लगाने से
अस्वच्छता
अभ्यंग नहीं करने से
लगातार नीचे देखने से
असात्म्य गंध सूंघने से
दूषित जल पीने से
आम दोष से
अधिक बोलने से
       शिर प्रदेश में कुपित दोष
शिरो रोगो को उत्पन्न करते हैं।

🌼 *शिरो रोग संख्या मे मतभिन्नता*🌼
चरक   ----- ---5
सुश्रुत.    -------11
अष्टॉग ह्रदय---10

🌺 *वातिक शिरो रोग*
शंख प्रदेश में सूचि भेदन वत पीडा
घाटा(ग्रीवा का पिछला भाग) में आरी
से चीरने के समान पीडा
दोनो भ्रू के बीच  व ललाट में तीव्र वेदना
कानो में अत्यंत शब्द
नेत्र बाहर खींच रहा है वेदना
भ्रम
क्लम
शिर प्रदेश की सभी संधिया अलग होने जैसी पीडा
शिरा घमनी स्फुरण
मन्यास्तंभ

🍀 *पैत्तिक शिरःशूल*
शिरो दाह वेदना
नेत्र दाह
तृष्णाः
स्वेदाधिक्य

🍀 *श्लेष्मिक शिरःशूल*
मंद वेदना
शिर स्तैमित्य
शिरो गौरव
अरुचि
आलस्य

🍀 *कृमिज शिरःशूल*
व्यधवत पीडा
छेदन वत पीडा
कंडू
शोफ
दुर्गंध

🍀 *शंखक शिरःशूल*
शंख प्रदेश में तीव्र पीडा
लालिमा
भंयकर शोथ

🍀 *अर्द्धावभेदक*
शिर के १/२ प्रदेश में तीव्र पीडा
कर्ण, नेत्र पीडा
शस्त्र से काटने जैसी पीडा

🍀  *सूर्यावर्त*
सूर्योदय से सूर्यास्त तक तीव्र पीडा

🍀 *अनन्तवात*
मन्या,पृष्ठ, घाटा में तीव्र पीडा
नेत्र रोग
हनुग्रह
कम्प

🌺 *शिरोरोग चिकित्सा*🌺

🍀वातज शिरो रोग चिकित्सा
वातध्न नस्य
स्नेहन
स्वेदन
वात दोष नाशक अन्नपान

🍀 पित्तज शिरःशूल चिकित्सा
घृत पान
दुग्ध पान
नस्य
शीतल परिशेक
शीतल लेप
पित्त नाशक अन्नपान

🍀कफज शिरो रोग
स्वेदन
घूमपान
नस्य
कफघ्न प्रलेप
कफघ्न अन्नपान
पुराना घृत पान
शिरोबस्ति

🍀आचार्य वाग्भट के अनुसार
पुरुष शरीर अश्वत्थ वृक्ष के समान है।
इस वृक्ष का मूल मस्तिष्क रुपि प्रधान अंग सिर उपर
हस्तपादादि शाखायें नीचे।
अतः मूल प्रहार कारी रोगो को शिघ्र
नष्ट करने का प्रयत्न करना चाहिये।

🍀यद्यपि शिरो रोग प्रायः त्रिदोषज होते है तथापि दोषो की प्रधानाप्रधान का विचार कर प्रथम उल्वण रोग की चिकित्सा करना चाहिये।

🍀शिरो विरेचन
दोषो की उर्ध्व गति होने से मस्तिष्क में लीन हो जाते हैं इस दृष्टि से स्वेदन तथा उपनाह करने से अवस्थित गाढे पिधलकर स्राव के रुप में पिघलकर
स्राव के रुप में बाहर निकल जाते है।
आमज अव स्थान मे शुष्क स्वेद दे।
बंधन वातज शिरो रोग में  पट्टी बॉधने से लाभ मिलता है।
कवल गंडूष
      इसे करने से प्रसृत दोष मुख से बाहर निकल जाते हैं।
लेप लगाने से स्थानिक शान्ति मिल जाती है।
शीत ऋतु मे उष्ण उपक्रम
उष्ण ऋतु मैं शीत उपक्रम हितकारी होता है।

🍀नस्य कर्म की विशिष्टता
शिरो रोग या उर्ध्व जत्रुगत रोगो में नस्य कर्म प्रधान माना जाता है।
चरक के अनुसार
नियमित नस्य लेने से
नेत्र,नासा कर्ण, की शक्ति अक्षुण्ण
रहती है। सिर के बाल समय से पूर्व
श्वेत व कपिल वर्ण के नहीं होते।गिरते भी नहीं है।
नस्य कर्म से सिर तथा कपाल कीसिराए, संधियॉ, स्नायु, कंडराए तर्पित होकर  बलशाली हो जाती है।
इन्द्रियॉ निर्मल हो जाती है।
नस्य कर्म से
शिरःशूल
मन्या स्तंभ
अर्दित
हनुग्रह
पीनस
अर्द्धावभेदक
शिरकंपन रोग नष्ट होते है।

ऩासा शिर का द्वार है। इस लिये  मार्ग से पंहुचायी ओषध समस्त सिर में व्याप्त होकर वहॉ के रोगो को नष्ट कर देती है।

🍀शिर पर तैल प्रयोग
शार्गंधर मतानुसार शिर पर तैल लगाने की चार विधिसॉ है।
अभ्यंग
परिशेक (शिरोधारा)
पिचुधारण
शिरोबस्ति
        उत्तरोत्तर लाभ दायक है।

🌻agar koi bhi sirasool hai usmai agar dosh  ka ansha ansh kalpana kar kai treatment kia jai to safalta nischai hi prapt hoga,

🌻Agar result nahi milta hai to nasyam, sirodhara, talam , yognindra in sab  treatment procedure add karnai sai  to sure success mil jayiga.

🌻Lakin in sab  treatment procedure mai medicine Jo use hoga WO bhi dosh  kai ansha ansha kalpna sai  hi hoga

🌻सूर्यावर्त  मे मुख्य निदान.  वेगसंधारण व अजीण होते है  चिकित्सा मेधृतपान शिरोविरेचन सिचन उपनाह नस्य

🍀 *अनुभव जन्य चिकित्सा*🍀

🌻वातिक शिरोरोग मे वात विध्ंवसक रस उष्णोदक के साथ देने से लाभ होता है

🌻ज्वर, द्वन्दज.-विषम ज्वर आदि अनेक दूसरे रोगो के कारण शिरशूल अवश्य होता है कास विशेषकर जीर्ण कास में, अजीर्ण में, स्त्रियों के गर्भाशय में पीडा होने पर, मासिक धर्म के समय... शिरशूल होता है

Ardhavibhedak shul
त्रिफला चूर्ण ले ते रहने से भी लाभ होता  है।

🌻कफज शिरोरोग मे वमन त्रिकटुक्वाथ का गण्डूष  धृतपान. त्रिभुवनकीति शहद से सेवन

🌻पैतिक व रक्तज मे दुध से सिचंन    लालकमल शवेतचदंन नागरमोथा यष्टि को घी के साथ पीसकर सिर पर लेप

🌻Srpghn+sutshekhr rs milk k sath

🌻Suryavrt मे मुख्य निदान.  वेगसंधारण व अजीण होते है  चिकित्सा मेधृतपान शिरोविरेचन सिचन उपनाह नस्य

🌻भल्लातक अवलेह दूध के साथ देने से जीर्ण शिरः शूल में लाभ

🌻प्रतिश्याय जनित शिर:शूल मे   निम्न व्यवस्था पत्रक/----

सितोपलादि चूर्ण 2 gm
गोदंती भस्म 500 mg
शिरः शुलादि वज्र रस 250 mg
-----+----------------------
bd sahd से देवे
वात शुलानतक बाम  extranl use कराए 4 head

🍀 *सामान्य सिर दर्द की अनुभूति चिकित्सा*🍀
(गैस,वात, पित्त प्रकोप,कब्ज,तनाव,बीपी आदि कारणों से)

सुतशेखर रास--------10ग्राम
गोदन्ती भस्म---------10ग्राम
शिरः शुलादि वज्र रास---10ग्राम
लक्ष्मी विलास रस--------10ग्राम(अभ्रक युक्त)

सभी को मिलाकर 40 पुड़िया बनाएं।
सुबह शाम (या आवश्यकतानुसार दोपहर को भी) शहद से

भोजन के बाद पथ्यादि काढ़ा
रात्रि में कब्ज नाशक चूर्ण।

🌻चिंता आदि के कारण जीर्ण शिरः शूल में
शंखपुष्पी
शतावर
ब्राह्मी
जटामांसी

संभाग लेकर मिश्री के साथ 3 से 5 ग्राम का सेवन विशेष लाभदायक है ।
अन्य औषधियों का प्रयोग आवश्यकतानुसार कर सकते हैं।

🍀प्रातः उठते ही यदि सिर दर्द हो तो उक्त प्रयोग में जलेबी के ऊपर वचा का चूर्ण 2 से 5 ग्राम तक डॉलकर जलेबी खाएं तथा थोड़ी से जलेबी की ही चाशनी पीएं।

🍀Ardh- avbhedk मे मुख्यता सिर मे आरी से काटने समान आधे सिर मे वेदना होती है अधिक दिन रहने पर नेत्र व कान का नाश करता है

🌻त्रिभुवनकीति रस सूतशेखर रस वातविंध्वसक रस सरपगंधा वसन्तमालती का योग रोगी की अवस्थानुसार देने से लाभ

🌺 *विशेष अनुभूत चिकित्सा*🌺
(डॉ अम्बाशंकर जी दवे)

*सूर्यावर्त*---–-----
(1)गोदन्तिभस्भ-----------1gr
प्रवालभस्म--–-----------500mg
एला--------------------2नग

दधि के अनुपानसे  सूर्योदय से एक घंटा पूर्व सेवन करे। सात दिन तक।प्रथम दिन से ही लाभ मिलना प्रारंभ होगा।।

(2)नारियलगोला-----1
कायफल ---------------25ग्राम
बादाम----------------100ग्राम
फीकामावा------------500ग्राम
गोघृत --------------------200ग्राम
केशर------------------1 ग्राम
शक्कर---–-------–-----250ग्राम
1---से--4 तक को मिलाकर घृत में सेके लाल होने तक।शक्कर की चासनी बना केशर मिला कर सब को मिला कर चक्की जमा दे।
प्रातः सूर्योदय पर 20ग्राम रोज सेवन करे।
जीर्णोद्धार से जीर्ण शिरः शूल त्रिदोषज भी अवश्य ठीक होगा।
।।शतसोनुभूत।।

🍀 (अनुभूत डॉ जगदीश जी शर्मा)
*Ardhavbhedak*

Pratah early morning me jaldi uth kar rogi ko
Tab Cephagraine ( charak)2
Taja makkhan se deejiye

Patient ko rogi pareekhshan Table per lita kar Cephgraine Nesal drop dono nathuno me daliye

Shirshshooladi vajr ras 125 mg + Godanti bhashm 250 mg  with honey

Night ko .
Trifgol  ( Dabur) 20 gm gungune pani se

🌹 *गोदन्ती भस्म बेसन के हलवे के साथ तथा मालपुआ भी शिरः शूल में अत्यंत लाभदायक हैं*

🌺 *गोदन्ती मिश्रण*🌺
Godanti mishran 3 type k h....
(1)Godanti bhasm 125 mg
     shring bhasm 62.5 mg 
     pippali mool 31.25 mg
     karpoor 31.25mg.....2.G

(2)godanti bhasm--- 200mg
     jaharmohra khatai pishti
     50mg
     Rasaadi ras 50mgI

(3)Godanti bhasm 200mg
     jaharmohra pishti 50mg
    Raasnaadi vati---50mg

*inme se kis mishran ko konse shirahsool mai Dena h*

✅ नं1- प्रतिश्यायज शिरः शूल।
✅नं2- ज्वरजन्य शिरःशूल मे।
वैसे दोनो ही योग  ज्वर प्रतिश्याय कास जन्य अन्य वेदनाओ यथा अंगमर्द आदि मे भी उपयोगी है।




------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
7985817113👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-

_____________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
7985817113
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
______________________________

 सिद्ध मकरध्वज

🌹✍🏻    सिद्ध मकरध्वज  ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________

सिद्ध मकरध्वज 
(इसके बराबर दुनिया में कोई दूसरी दवा नहीं)

आज हम आपको आयुर्वेद की एक ऐसी बेजोड़ औषधि के बारे में बता रहे हैं जिसकी शक्ति बेजोड़ है.. जिसका नाम है सिद्ध मकरध्वज और मकरध्वज. और हमारी हर दवाई में इसका प्रयोग होता है.. इसे ध्यान से पढ़े और जानकारी ले.

मकरध्वज आयुर्वेद की महौषधि है इसके समान सर्व रोग नाशिनी कोई दवा संसार में किसी भी पैथी में नहीं है. बड़े बड़े डॉक्टर्स ने भी यह बात मान ली है के मकरध्वज के बराबर दुनिया में कोई दूसरी दवा नहीं है. इसके द्वारा अनगिनत प्राणी काल के मुंह से बचते है. बंगाली डॉक्टर्स सबसे ज्यादा इसका ही व्यव्हार करते हैं.

एक ही मकरध्वज से बहुत सारे रोगों में आराम

यह कोई विज्ञापन नहीं है, युक्तिसंगत और हज़ारों डॉक्टर्स और लोगों का अनुभव है. मकर ध्वज के सेवन से मनुष्य की ताक़त बहुत बढती है.

यह हृदय और स्नायुमंडल (दिमाग) को इंजेक्शन कि तरह पांच मिनट में ताक़तवर बनाता है. मकरध्वज खाने से शरीर का वजन निश्चित रूप से बढ़ता है. यह बल वीर्य कान्ति शक्ति

पुरुषार्थ आदि के लिए सर्व श्रेष्ठ है. शीघ्रपतन की तो ये अजूबा दवा है. नपुंसकता के लिए मकरध्वज महा गुणकारी है. गोद के बच्चे से लेकर 100 वर्ष तक के आदमी को मकर ध्वज एक सा फायदा करती है.

लोगों में ग़लतफ़हमी है के मकर ध्वज या चंद्रोदय सिर्फ मरते समय ही दी जाती है जिस से व्यक्ति के प्राण बचने के चांस बन जाते हैं. यह तो सही है के सबसे अच्छी दवा होने के नाते यह मरते व्यक्ति को भी जिंदा कर देती है.

अब जो दवा मरते व्यक्ति को जिंदा कर प्राण दान दे सकती है वो दवा साधारण दिखने वाले रोगों में तो जादू मन्त्र की तरह फायदा करती है. बंगाल में इसका बहुत प्रयोग होता है. वहां के धनी व्यक्ति बारहों महीनों बिना रोग के मकर ध्वज को खाते हैं और बहुत ही तंदुरुस्त बने रहते हैं.

भैषज्य रत्नावली में लिखा है

एतदभ्यासतश्चैव जरामरण नाश्नामः
अनुपान विधानेन निहन्ति विविधान गदान

अर्थात – इसके सेवन से बुढापा चला जाता है और अचानक मौत (जैसे हार्ट फेल) नहीं होती. अनुपान भेद से मकरध्वज बहुत सी बीमारियों को दूर करता है.

मकरध्वज के लाभकारी अनुपान –

नए बुखार में अदरक का रस या परवल का रस और शहद.

मियादी बुखार में पान का रस या शहद.

सन्निपात में ब्राह्म रस के साथ.

निमोनिया में अडूसे का रस और शहद.

मोतीझरा में शहद और लौंग का काढ़ा.

मलेरिया बुखार में करंज का चूर्ण और शहद.

पुराने बुखार में पीपल का चूर्ण या शेफाली का रस और शहद.

ज्वारातिसर में शहद और सौंठ का पानी.

आंव के दस्तों में बिल्व (बेल) कि गिरी का चूर्ण और शहद

खून के दस्त में कुडे की छाल का काढ़ा और शहद.

पतले दस्त में जीरे का चूर्ण और शहद के साथ मकरध्वज

पुराने दस्त में चावल का धोवन और शहद के साथ मकरध्वज

संग्रहणी में जीरा का चूर्ण और शहद के साथ मकरध्वज

बवासीर में जिमीकंद का चूर्ण या निमोली का चूर्ण और शहद के साथ मकरध्वज

खूनी बवासीर में नागकेशर का चूर्ण और शहद के साथ मकरध्वज

हैजे में प्याज का रस और शहद के साथ मकरध्वज

कब्जियत में त्रिफला का पानी और शहद के साथ मकरध्वज

अमल्पित्त में आंवले का पानी और शहद के साथ मकरध्वज

पांडू (पीलिया) में पुराने गुड के साथ के साथ मकरध्वज

राजयक्ष्मा में सितोपलादि चूर्ण, गिलोय का सत्व अथवा बासक (अडूसे) का रस और शहद के साथ मकरध्वज

खांसी में कंटकारी का रस या पान का रस और शहद के साथ मकरध्वज

दमे में बेल के पत्तों का रस या अपामार्ग का रस और शहद के साथ मकरध्वज

स्वरभंग में मुलेठी चूर्ण और शहद के साथ मकरध्वज

अरुचि में निम्बू का रस और शहद के साथ मकरध्वज

मिर्गी में बच का चूर्ण और शहद के साथ मकरध्वज

पागलपन में कुष्मांडाव्लेह या ब्राहम रस और शहद के साथ मकरध्वज

वातव्याधि में अरंड की जड़ का रस और शहद के साथ मकरध्वज

वातरक्त में गिलोय का रस और शहद के साथ मकरध्वज

आमवात में शहद से खाकर ऊपर से सने, बड़ी हरड और अमलतास का काढ़ा लें.

वयुगोले में भुनी हुई हींग का चूर्ण और गर्म पानी .

हृदय रोग में अर्जुन की छाल का चूर्ण और शहद.

मूत्रकच्छ और मुत्रघात में गोखरू का काढ़ा और शहद.

सुजाक में जवाखार और गर्म पानी.

पथरी में कुल्थी की दाल का काढ़ा और शहद.

प्रमेह (धातु स्त्राव) में कच्ची हल्दी का रस या आंवले का रस अथवा नीम गिलोय का रस और शहद.

मधुमेह में जामुन की गुठली का चूर्ण और शहद.

दुर्बलता में असगंध का चूर्ण और शहद.

उदर रोग और शौथ में शहद और शुद्ध रेंडी का तेल.

गर्मी में अनंतमूल का काढ़ा और शहद.

शीतला (चेचक) में करेले की पत्ती का रस और शहद.

मुख रोग में गिलोय का रस और शहद.

रक्तप्रदर में अशोक की छाल का चूर्ण या उससे पकाया हुआ दूध और शहद.

सफ़ेद प्रदर में चावल का धोवन (मांड) या राल का चूर्ण और शहद.

सूतिका रोग में शहद और दशमूल का काढ़ा.

नाडी छूटने पर तुलसी का रस शहद.

कफ रोग में अदरक का रस और शहद.

पित्त रोग में शहद, सौंफ और धनिये का पानी.

ताक़त बढ़ाने के लिए वेदाना का रस, मलाई मक्खन, अंगूर का रस, शतावर का रस या पान का रस और शहद.

स्तंभक शक्ति के लिए माजूफल तथा जायफल का चूर्ण और शहद.

विशेष

इतनी  गुणकारी  होने  की  वजह से मकरध्वज थोड़ी महंगी होती है, और लोग इसमें मिलावट भी कर देते हैं, इसलिए जब भी मकरध्वज खरीदना हो तो बैद्यनाथ कंपनी की ही लीजिये.

बैद्यनाथ कई दशकों से क्वालिटी और सही दाम में ये सब चीजें मुहैया करवाता है. बैद्यनाथ की मकर ध्वज एक ही खुराक में अपना असर दिखा देती है. रोगों में इसके सही उपयोग की विधि आप वैद के परामर्श से ही करें. और बिना रोग के अगर आप इसको लेना चाहें तो भी आप इसको नियमित सेवन कर सकते हैं.

मकरध्वज की सेवन की मात्रा

मकरध्वज आधी रत्ती से  एक रत्ती (62 से 125 मि. ग्रा.) तक आवश्यकतानुसार दें.

सिद्ध मकरध्वज

राजा महाराजा और धनी व्यक्ति ही इसका व्यव्हार करते हैं. मकरध्वज के सम्पूर्ण गुण सिद्ध मकरध्वज में पाए जाते हैं. यह मकरध्वज से अधिक शक्तिशाली होती है.

सिद्ध मकरध्वज स्पेशल

सिद्ध मकरध्वज स्पेशल अष्ट दश संस्कारित एवं षडगुण बलिजारित पारद से निर्मित मकर ध्वज, स्वर्ण भस्म, कस्तूरी और मोती भस्म आदि से निर्मित किया जाता है.

यह औषध शारीरिक एवं मानसिक दुर्बलता को मिटा कर शरीर में नवीन शक्ति एवं स्फूर्ति को उत्पन्न करती है. इसके अतिरिक्त ज्वर, निमोनियां, सर्दी, जुकाम खांसी, कफ, श्वांस, फेफड़ों के रोग, राजयक्ष्मा, उर:क्षत, नाडी क्षीणता, शीतांग, आदि रोगों में इस औषध का सफल प्रयोग होता है. शरीर में किसी भी कारण वश खून की कमी हो जाए तो इसके सेवन से अमृत के समान लाभ होता है. बालक, वृद्ध, युवा, स्त्री, पुरुष सबके लिए समान रूप से लाभकारी है. शीतकाल में इसका निरंतर सेवन किया जा सकता है.

सिद्ध मकरध्वज स्पेशल मात्रा और अनुपान

1-1 रत्ती (125 मि.ग्रा.) सिद्ध मकरध्वज दिन में दो बार सुबह और शाम. बच्चो को उनकी आयु के अनुसार कम मात्रा में दें. आवश्यकतानुसार दिन में दो से अधिक बार भी दिया जा सकता है. अनुपान में मधु, मक्खन मिश्री, मलाई मिश्री, दूध या पान का रस और मधु, या अदरक का रस और शहद के साथ या रोगानुसार उचित अनुपान के साथ रोगी को दें.

मधु मकरध्वज

मकरध्वज को शहद के साथ अच्छी तरह घोंट कर बनाया जाए तो यह मधु मकरध्वज कहलाता है. मकरध्वज को असली शहद के साथ एक घंटा खूब अच्छी तरह घोंटना चाहिए, नहीं तो पूरा फायदा नहीं करती. यह बना बनाया मिल जाता है.

मकरध्वज षडगुणबलिजारित (भैषज्यरत्नावली)

मकरध्वज षडगुणबलिजारित में गंधक ६ गुणा ज्यादा डाली जाती है, इसलिए ये साधारण मकरध्वज से अधिक प्रभावशाली होती है. इस मकरध्वज के निर्माण में उपयोग किये जाने वाले पारद को अष्ट संस्कारित कर, इसके बाद में षड्गुण गंधक जारित किया जाय और इसके बाद षड्गुणबलजारित मकरध्वज तैयार किया जाए तो बहुत ही श्रेष्ठ चमत्कारिक गुणों से पूर्ण मकरध्वज तैयार होता है.

विशेष नोट

आपको यह सब मकरध्वज बैद्यनाथ स्टोर से मिल जाएँगी. और किसी रोग के उपचारार्थ अनुभवी वैद का परामर्श ज़रूर लेवें. यह जानकारी सिर्फ आपको मकरध्वज के फायदों से अवगत करवाने के लिए है.

------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
7985817113👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-

_____________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
7985817113
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
______________________________

 नागफनी का शर्बत

🌹✍🏻   नागफनी का शर्बत     ✍🏻🌹
जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार
🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________

नागफनी के फलों को तोड़कर उनके कांटे तोड़कर गूदा को मथ कर कपड़े से निचोड़कर उसका रस निकाल ले और उसमें मिश्री मिलाकर  शहद की तरह गाढ़ा सरवत बना ले ।

सेवन बिधि - 10 gm शर्बत दूध से सुबह शाम दे ।

लाभ - इससे प्रमेह , प्रदर , स्वांस , कास , शीघ्रपतन , व जिन स्त्रियों को दूध कम उतरता हो इसके सेवन से खूब दूध उतरता है ।

------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
7985817113👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-

_____________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
7985817113
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
______________________________

नपुंसकता

🌹✍🏻      नपुंसकता  ✍🏻🌹
जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________
नमस्कार दोस्तो आज मैं गुरुवेन्द्र सिंह शाक्य संजीवनी परिवार के सौजन्य से नपुंसकता के ऊपर ये योग दे रहा हूँ इसके लाभ यहाँ लिखना सम्भव नही है । योग निम्न है -

योग -
रस सिंदूर
अफीम
लौह भस्म
अभ्रक भस्म  (100 पुटी)
वंग भस्म
कपूर
गुर्च का सत
मुक्ताशुक्ति भस्म

सभी  दवाओं को हम बजन लेकर ग्वार पाठे के रस में जोरदार हाथो से 3 दिन तक खरल करे और 3-3रत्ती की गोली बना ले ।

सेवन विधि - एक एक गोली सुबह शाम दूध से दे ।

लाभ - इससे स्वप्नदोष , प्रमेह ,नपुंसकता में विशेष लाभ होता है ।

note - ये दवा खुद की बनी हुई हो ओर पूर्ण शुद्ध हो तभी लाभ मिलेगा ।
पेट साफ होना चाहिए अगर नही होता है तो अरंड तेल या कोई चूर्ण का सेवन कर पेट साफ रखें ।

मौषम व रोगी के अनुसार खुराक , अनूपान बदले जा सकते है इसलिए बैद्य की सलाह से ही सेवन करे ।

------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
7985817113👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-

_____________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
7985817113
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
______________________________

कुछ अमूल्य नुक्से

🌹✍🏻  कुछ अमूल्य नुक्से      ✍🏻🌹
जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________

बेल इन्द्रयव मोचरस ,मोथा सम घृत खाय ।
अतिसार संग्रहणी अरु , रुधिर आँव मिटजाय ।।

कूटि आमले काढ़ि रस, मधु अरु हरदी मिलाय ।
मिटे बीस प्रमेह दुःख , यह थोरे दिन जो खाय ।।

शहद संग गुरच को , खाय प्रात दिन सात ।
मिटे बीस प्रमेह दुःख नर सुख पावे गात ।।

आम मिगी अरु जायफल ,कुड़ा अफीम मंगाय ।
लेपै जल घिस नाभि पर , अतिसार थम जाय ।।

जवाखार सम सोंठ लै, प्रातः घी सों खाय ।
भूख लगे अति रुचि बड़े , अन्न तुरत पच जाय ।।

आक पत्र लहसुन मिले, बाँटि काढ़ि रस लेय।
तातो डारे कान में , पीर बिदा कर देय ।।

आक पत्र तिलपत्र पुनि , लहसुन घृत सब संग ।
मीजि निचोड़े कान में , पीर बधिरता भंग ।।

त्रिफला कटू चिरायतो, बांसा नीम गिलोय ।
या काढ़े के पियत ही , नाश पांडु को होय ।।

वच मुलेठी सारिवा , कूट पिपरै आनि।
कांजी सो लेपन करे , अर्धशीश दुख हानि ।।

मिश्री शीतल नीर सों , घोर पियावे कोय।
आधा शीशी पीर पुनि , ताको कबहु न होय ।।

शहद संग वच लीजिए,खुरासान दो टंक ।
दूध भात पथ दीजिए , मृगी रहे नहि अंग ।।

सेहुड में  मिर्चे धरे , दिन इक्कीस बिचारि ।
नास दीजिए नीर सों, मृगी रोग को टारि ।।

------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
7985817113👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-

_____________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
7985817113
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
______________________________

  दाद की दवा 

🌹✍🏻   दाद की दवा    ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________

अमलासार गन्धक
सिंदूर
मुर्दासंख
फिटकरी
मैनसिल
इन सभी दवाओं को लेकर पीस के कपड़छन चूर्ण तैयार कर दाद खाज खुजली पर लगाये सरसो के तेल में या तेल में मिला के । ये दवा हजारो बार की अनुभूत है खुद बनाये ऒर लाभ दे पोस्ट को शेयर कर अन्य लोगो को भी लाभांवित करे ।

------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
7985817113👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-

_____________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
7985817113
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
______________________________

निम्बादि चूर्ण  

🌹✍🏻 निम्बादि चूर्ण       ✍🏻🌹
जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________

नमस्कार दोस्तो  आज बैद्य गुरुवेन्द्र सिंह जी आपको निम्बादि चूर्ण   बनाने की बिधि दे रहे है बनाये ओर लाभ ले

सामिग्री -
नीम 40 gm
गिलोय -40 gm
हरड़ 40 gm
आमला 40gm
बावची 40 gm
सोंठ 10 gm
वायबिडंग 10 gm
कसोंधि के बीज 10 gm
पीपरी 10 gm
अजबाइन 10 gm
बच 10 gm
कुटकी 10 gm
जीरा 10 gm
सफेद खैर 10gm
सेंधा नमक 10 gm
जवाखार 10 gm
हल्दी 10 gm
दारुहल्दी 10 gm
नागर मोथा 10 gm
देवदारु 10 gm

बिधि - समस्त बुटियों को अलग अलग खरल में डाल के कपड़छन चूर्ण बना के कांच की शीशी में रख ले ।

सेवन बिधि - गुर्च के काढ़े से प्रतिदिन 4 से 5 gm ले दिन में दो बार ।

लाभ - एक माह में शरीर सोने के समान चमकने लगता है और अतिउग्र महा  असाध्य वातरक्त व सफेद कोड व उदुम्बर और चर्मदल कोढ से हुआ दाद , खाज , खुजली , विचर्चिका, मंडल , चकत्ता ,आमबात की शूजन , जलोदरादि आठो उदर रोग पीड़ा बायु गोला , पांडुरोग , कामला , सर्व व्रण इतने रोगों का नास होता है । ये निम्बादि चूर्ण   रुधिर बिकार के नाश के लिए सर्वोत्तम दवा है ।

------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
7985817113👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-

_____________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
7985817113
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
______________________________

  तंदुलादि वटिका

🌹✍🏻     तंदुलादि वटिका  ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________

योग -

चावल - 10 gm
चूना कलई 10gm
गंधक  10 gm
नोसादर 10gm
मूली के बीज 10 gm
भुनी हुई हींग 1 gm

निर्माण विधि - सबको पीसकर ऐलोवेरा के रस में अच्छी तरह खरल करे और लगभग 100gm रस खपा दे फिर चने बराबर गोली बना ले ।

सेवन विधि - एक एक गोली सुबह शाम जल से सेवन करे ।

लाभ - इससे पित्त की ठंडी कै ठीक होती है, पेट दर्द ,उबकाई , छाती की जलन ठीक होती है

------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
7985817113👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-

_____________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
7985817113
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
______________________________

लिसोड़ा पाक

🌹✍🏻   लिसोड़ा पाक      ✍🏻🌹

जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार

तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार

🌳🌺महिला संजीवनी 🌺🌳

____________________________

योग -

लिसोड़ा के सूखे फल -1 kg
मिश्री 1kg
दाल चीनी 15gm
इलाइची 15 gm
कायफल 15 gm
लोंग 15 gm

बिधि - सबको महीन पीस कपड़छन कर  2kg शहद में अच्छी तरह मिला ले । ओर खूब घुटाई करे

सेवन विधि - 10 से 20 gm तक सुबह शाम सेवन करे ।

लाभ - इससे स्वांस , कफ की खुश्की , कमर दर्द , वीर्य का पतलापन , शारीरिक निर्बलता , पेट की गर्मी  दूर होती है

------::-----------::--------::-------
किसी को भी बाल उगाने की दवा , झड़ने की दवा , गठियावाय , साइटिका , सेक्स संमस्या , शुगर, bp , नीद न आना , हैड्रोशील , हर्निया , पथरी कही भी हो , दाद खाज खुजली , लिकोरिया , दमा , अस्थमा की दवा मंगाने के लिए संपर्क करे ।
7985817113👌👌👌👌👍👍👍👍👍
  ------::--------::-----------::--------::-

_____________________________
🌳🕉🌺महिला संजीवनी 🌺🕉🌳
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
7985817113
🌳🕉🌺संजीवनी परिवार 🌺🕉🌳
______________________________

नाखून सड़ना ,पेरोनिसिया ,हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना.

  पेरोनिसिया  हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना. आयुर्वेदिक  मुलेठी 50ग्राम बडी सोफ 50 ग्राम  अच्छी हळदी 50 ग्राम  नीम पत्ते चुर्ण 50 ग्राम  ...