गुरुवार, 19 अक्टूबर 2017

आयुर्वेदिक क्वाथ/कषाय भाग २ !!* 🌺🙏🏻🌺

🌺🙏🏻🌺 *!! आयुर्वेदिक क्वाथ/कषाय भाग २ !!* 🌺🙏🏻🌺

          *!! प्रदरान्तक क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग : -* यह गर्भाश्य के रोगों को दूर करने वाला व रक्त प्रदर व श्वेत प्रदर में शीघ्र लाभ देने वाला है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

       *!! धान्यपंचक क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग : -*  इसके सेवन से भूख खुल कर लगती है व पाचन शक्ति को बढ़ाता है ! यह सभी प्रकार के आातिसात, रक्तातिसार व पित्तातिसार में लाभ प्रदान करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

       *!! धान्यसप्तक क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से भूख खुल कर लगती है ! व पाचन शक्ति को बढ़ाता है ! यह सभी प्रकार के आातिसात, रक्तातिसार व पित्तातिसार में लाभ प्रदान करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* चिकित्सक के परामर्स अनुसार !!

       *!! देवदार्वादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से श्वास, सिर का दर्द, खांसी, बेहोशी, आदि में लाभ मिलता है ! प्रसव के पश्चात् इसका सेवन विशेष रूप से उपयोग किया जाता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में बार !!

       *!! द्राव्यादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* इसके सेवन से सभी प्रकार के प्रदर रोग, कमजोरी, सिरदर्द, मंद ज्वर आदि में लाभ मिलता है ! यह गर्भाशय को ताकत प्रदान करता है !!

           *!! दशमूल क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* इसके सेवन से प्रसव के बाद की कमजोरी, खांसी, श्वास, चक्कत आना, सूजन, प्रसूत ज्वर, नींद न आना, खून की कमी, आदि !!

          *!! दाड़िम पुटपाक !!*

*गुण व उपयोग: -* इसके सेवन से अतिसार, प्यास, दाह, रक्तपित्त आदि रोगों में लाभ मिलता है !!

         *!! त्रिफलादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* यह पांडु रोग, कामला और हलीमक आदि रोगों में लाभदायक है !!

         *!! तारूण्यादि कषाय !!*

              *(दस्तावर)*
*गुण व उपयोग: -* यह दस्तावर है ! कोमल प्रकृति वालों के लिए यह पेट साफ करने की उत्तम औषधी है !!

       *!! त्रिकण्टकादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* इसके सेवन से पत्थरी टूटकर बाहर निकलती है व मूत्रकृचछ एवं मूत्रत्घात में लाभदायक है !!

         *!! तगरादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* यह सन्निपाद, पतले दस्त आदि में लाभदायक है !!

           *!! जन्मघूंटी !!*

*गुण व उपयोग: -* इसके सेवन से बच्चों के सभी प्रकार के रोग नष्ट होते हैं ! यह बच्चों के उल्टी, खांसी, जुकाम, सर्दी, दस्त, अपचन आदि !!

           *!! जात्यादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* इसके सेवन से मुंह के छाले, गले के जख्म, फोड़े-फुंसी व अन्य रक्त विकारों में लाभ मिलता है !!

       *!! गुलबनफ्सादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* इसके सेवन से सर्दी जुकाम, श्वास व कफ रोगों में ला मिलता है !!

         *!! गुडूच्यादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* इसके सेवन से सभी प्रकार के ज्वर, दाह, जी मिचलाना, वमन, अरूचि आदि में लाभ मिलता है !!

         *!! गोजिव्हादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* यह सर्दी, जुकाम, खाँसी, श्वास, कफ रोग आदि में लाभ करता है !!

*मात्रा व अनुपान: -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार !!

        *!! कमलादि फाण्ट !!*

*गुण व उपयोग: -* यह हृदय को लाभ देने वाला व पेशाब खुलकर लाने वाला है !!

*मात्रा व अनुपान: -* ३० से ६० ग्राम, दिन में दो बार !!

         *!! अमृताष्टक क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* यह पित्त एवं कफजन्य ज्वर, जी मिचलाना, अरूचि, वमन, अधिक प्यास लगना, पेट, हाथ-पैर और आँखों में जलन आदि में लाभ करता है !!

        *!! आरग्वधादि क्वाथ !!*

            *(दस्तावर)*
*गुण व उपयोग: -* पुरानी कब्ज, पेट की सूजन, शरीर की सूजन, हल्का बुखार, पेट का कड़ापन, वायु भरना, भूख की कमी आदि !!

        *!! अभयादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* यह पाचन, दीपन, मल-मूत्र एवं वायु के विबंध (कब्ज) को दूर करने वाला, श्वास, तन्द्रा, वमन, मुँह का सुखना, प्यास, खाँसी, आदि !!

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आयुर्वेदिक क्वाथ भाग १

🌺🙏🏻🌺 *!! आयुर्वेदिक क्वाथ भाग १ !!* 🌺🙏🏻🌺

          *!! सारिवादि हिम !!*

*गुण व उपयोग : -*  इसके सेवन से गप्तांगों की फोड़े-फुंसियां, चकत्ते, खारिश आदि में लाभ मिलता है ! यह चर्म रोगों में लाभ प्रदान करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ३० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

        *!! षडंगपानिय !!*

*गुण व उपयोग : -*  यह सब प्रकार के ज्वरों में लाभकारी है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ३० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

        *!! रज:प्रवर्तक कषाय !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से लम्बे समय से रूका हुआ मासिक धर्म खुलकर आता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ३० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

         *!! रास्नासप्तक क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग : -* यह आमवात, कमर, जांघ, पीठ व पसली का दर्द एवं वात-संबंधी पेट दर्द में लाभ प्रदान करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ३० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

         *!! मूत्रल कषाय !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से गुर्दे की तकलीफ के कारण शरीर में आर्इ सूजन में विशेष लाभ मिलता है ! पथरी के कारण होने वाले दर्द व पेशाब की तकलीफ में यह लाभदायक है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ३० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

       *!! महामंजिष्ठादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग : -* यह महाकुष्ठ, क्षुद्र कुष्ठ, वातरक्त, घाव, जलन, उपदंश, पक्षाघात, नेत्ररोग, श्लीपद (फीलपाँव), शरीर पर लाल-लाल चकत्ते पड़ जाना, अर्दित तथा रक्त मंडल आदि रोगों में उत्तम लाभदायक है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

        *!! महारास्नादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग : -* यह सर्वांग वात, अर्धांग वात, आध्मान, अर्दित, एकांग वात, शुक्रदोष, सन्धिवात, मेदागत वात, कम्प वात, श्लीपद, अपतानक, अन्त्रवृद्धि, ग्रध्रसी, आमवात, योनिरोग और बांझपन आदि रोगों में लाभ करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

      *!! मांस्यादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* यह हिस्टीरिया, आक्षेप, अनिद्रा, मस्तिष्क क्षोभ आदि में लाभदायक है !!

*मात्रा व अनुपान: -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

        *!! मधुकादि हिम !!*

*गुण व उपयोग: -* इसके सेवन से आधे सिर का दर्द, पित्तवृद्धि-जनित शिर:शूल, मन्द ज्वर, जुकाम, सिर -दर्द, श्वास, कास, कफ वृद्धि विकार में उत्तम लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान: -* चिकित्सक के निर्देसानुसार !!

       *!! भार्ग्यादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* इसके सेवन से कफ, ज्वर, न्यूमोनिय, श्वास, सन्निपात ज्वर, सूखी खांसी आदि में लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान: -* २० से ३० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

       *!! भूनिम्बादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग: -* यह मातीझारा, मन्दज्वर, मधु ज्वर, अतिसार, श्वास, कास, रक्तपित्त आदि रोगों में शीघ्र लाभ करता है !!

*मात्रा व अनुपान: -* चिकित्सक के निर्देसानुसार !!

         *!! वरूणादि कषाय !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से पथरी, मूत्रकृच्छ, वृक्कशूल, बस्तिशूल आदि में लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ३० से ४० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

       *!! पुनर्नवाष्टक क्वाथ !!*

         *(पुनर्नवादि क्वाथ)*

*गुण व उपयोग : -*   इसके सेवन से सूजन, पेट के रोग, जोड़ों का दर्द, यकृत एवं प्लीहा की वृद्धि में शीघ्र लाभ मिलता है ! यह दस्त व पेशाब के साथ सूजन उतारने वाला है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

       *!! पथ्यादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग : -* इसका सेवन मुख्यत: सिरदर्द में किया जाता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

       *!! पटोलादि क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग : -* यह मुख्यत: ज्वर नष्ट करने में उपयोग किया जाता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

      *!! प्रतिश्यायघ्न क्वाथ !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से सभी प्रकार के जुकाम शीघ्र ठीक होते हैं ! व इसकी वजह से हुए ज्वर में भी लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार अथवा आवश्यकतानुसार !!

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आयुर्वेदिक मलहम

🌺🙏🏻🌺 *!! आयुर्वेदिक मलहम !!* 🌺🙏🏻🌺

            *!! हरा मलहम !!*

*गुण व उपयोग :-* यह मलहम घावों का शोधन कर, फोड़े को पका कर फोड़ने वाला (विदारक) है ! यदि व्रणशोथ पक जाने पर भी नही फूटता हो, तो इसकी पट्टी लगाने से जल्द फूट कर मवाद बाहर आ जाता है !!

       *!! बिरोजे का लाल मलहम !!*

*गुण व उपयोग :-* यह जख्मों को शुद्ध कर उन्हे भरने का काम करता है ! दर्द वाले स्थान पर इस मलहम की पट्टी लगाने से पूर्व उस स्थान के बाल साफ कर लेने चाहिए एवं गर्म चाकू से पट्टी पर मलहम फैलाकर दर्द वाले स्थान पर बांधने से लाभ मिलता है !!

       *!! शीतल मलहम !!*

*गुण व उपयोग :-* इसके लगाने से पानी वाली खुजली की फुंसीयाँ तत्काल फूट जाती हैं ! व बार- बार इसी को कुछ रोज तक लगाने से आराम होकर सूख जाती है ! फोड़े, फुंसी, जले हुए घाव में भी लाभदायक है !!

        *!! श्वेत मलहम !!*

*गुण व उपयोग :-* बच्चों की गुदा एवं मूत्रेन्द्रिय आस-पास के स्थान की सूजन व पाक में तथा अन्य फोड़े, फुंसी, बवासीर आदि में इससे लाभ मिलता है !!

       *!! महात्मा जी का मलहम !!*

*गुण व उपयोग : -* महात्मा जी के मलहम को जिस फोड़े पर लगाना हो, पहले कपड़ेकी गोलाकार उतनी ही बड़ी पट्टी काट लें, बीच में जरा-सा छेद रहने दें ! फिर मलहम को उस कपड़े पर लगा कर आग की सहायता से जरा तपा कर फोड़े पर चिपका दें ! इससे फोड़ा बहुत जल्दी बह जाएगा ! यदि सूजन होगी, तो वह भी ठीक हो जाएगी !!

       *!! नासूरनाशक मलहम !!*

*गुण व उपयोग : -*आवश्यकता पड़ने पर नासूर के मुख पर लगा कर ऊपर से आक के पत्ते तीन दिन के लिए बांध दें ! तीन दिन के बाद पट्टी खोलने पर नासूर घाव के अन्दर एक पतला डोरा रहता है, यही इस घाव में प्रधान उपद्रव-कारक है ! इसके निकल जाने पर घाव बहुत जल्दी भर जाता है ! इसमें किसी प्रकार की पीड़ा नही होती है ! प्राय: एक ही पट्टी में यह कार्य हो जाता है ! यदि कुछ बचा रह जाए, तो तीन दिन के बाद फिर दूसरी पट्टी बांध दें ! पट्टी के दौरान स्नान नही करना चाहिए !!

       *!! नेत्ररोगहर मलहम !!*

*गुण व उपयोग : -* आँख आने पर नेत्ररोगहर मलहम का उपयोग करने से शीघ्र लाभ मिलता है !!

        *!! जीवन्त्यादि मलहम !!*

*गुण व उपयोग : -*जीवन्त्यादि मलहम को खारीश, घाव, बवासीर के मस्से, हाथ- पाँव के तलवे फटने एवं पाँव की अंगलियों के पके हुए हिस्सों पर लगाने से लाभ मिलता है !!

      *!! चर्मरोगनाशक मलहम !!*

*गुण व उपयोग : -*इसके लगाने से दाद, खाज, नासुर, भगन्दर, छोटी-छोटी फुंसीयां, फोड़े-फुंसी आदि ठीक हो जाते हैं !!

        *!! घाव की उत्तम मलहम !!*

*गुण व उपयोग : -* यह मलहम सब तरह के घावों में फायदा करती है ! नीम के पत्तों के पानी से घावों को अच्छी तरह धोकर दिन में दो बार मलहम को लगाने से कठिन व पुराने घाव भी ठीक हो जाते हैं !!

       *!! गुलाबी मलहम !!*

*गुण व उपयोग : -* इस मलहम के उपयोग से खाज, खुजली, आग से जला हुआ घाव व बवासीर के मस्से ठीक हो जाते हैं व दर्द और जलन में भी आराम मिलता है !!

       *!! काला मलहम !!*

*गुण व उपयोग : -*मवाद वाले फोड़ों पर इस मलहम की मोटे कपड़े पर पट्टी बनाकर लगाने से मवाद बाहर निकल आता है व आगे बनना बंद हो जाता है !!

      *!! उपदंशहर मलहम !!*

*गुण व उपयोग :-* गर्मी (उपदंश), आतशक के कारण जननेन्द्रिय के ऊपर या भीतर हुए घावों व चकतों पर लगाने से जल्दी ठीक हो जाते हैं !!

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आयुर्वेदिक तेल भाग ३

🌺🙏🏻🌺 *!! आयुर्वेदिक तेल भाग ३ !!* 🌺🙏🏻🌺

          *!! गर्भविलास तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* यह गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द होने की दशा में इस तेल की मालिश धीरे-धीरे पेट पर करने से आराम मिलता है ! इसकी लगातार मालिश से गर्भ पुष्ट होता है !!

        *!! चन्दनादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* यह सिर दर्द, उन्माद, जीर्ण ज्वर, रक्त पित्त, क्षय आदि में लाभदायक है !!

          *!! गन्धकपिष्टी तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* यह प्रत्येक प्रकार की नर्इ-पुरानी खारिश में लाभ प्रदान करता है !!

         *!! ग्रहणीमिहिर तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* यह ग्रहणी, अतिसार, ज्वर, तृष्णा, हिक्का व उदर रोगों में लाभ करता है ! असमय बाल पकने व ढीली चमड़ी को सख्त करने में गुणकारी है ! यह ३ से ६ ग्राम की मात्रा में पिलाना चाहिए या मालिश करनी चाहिए !!

         *!! खदिरादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* यह दांतों की सड़न, मुँह का पकना, मसूढ़ों का पकना, मवाद निकलना, दाँतों में छिद्र होना, दाँतों में कीड़े लगना, मुँह की दुर्गन्ध आदि में लाभ प्रदान करता है !!

          *!! इरिमेदादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* इस तेल के कुल्ले करने से मसूढ़ों की सढ़न, पीप, दाँतों का हिलना व जीभ व तालू की पीड़ा व मुँह के अन्य रोगों में लाभ मिलता है !!

         *!! कुष्ठाराक्षस तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* यह सफेद कुष्ठ, खारिश व अन्य रक्त विकारों में लाभ करता है !!

         *!! कासीसादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* इस तेल को बवासीर के मस्सों पर लगाने से ये जल्दी ठीक हो जाते हैं ! यह इन मस्सों को काट कर गिरा देता है !!

             *!! कुम्भी तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* कुम्भी तेल का उपयोग कान के दर्द, कान से मवाद आना, कान के भीतर फोड़े-फुंसी आदि में किया जाता है !!

            *!! अणु तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* यह सिर दर्द, आधे सिर का दर्द, वात नाड़ियों की कमजोरी से सिर का हिलना आदि में लाभ करता है ! इसका नस्य लेने से कान, नाक व आँखों की इन्द्रियों को बल मिलता है !!

*!! आयुर्वेदिक तेल प्रकरण और भी हैं ! पर इसी पोस्ट के साथ विराम देतें हैं !!*

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आयुर्वेदिक तेल भाग २

🌺🙏🏻🌺 *!! आयुर्वेदिक तेल भाग २ !!* 🌺🙏🏻🌺

         *!! बृहद् विष्णु तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* बृहद् विष्णु तेल लकवा, नसों की कमजोरी, वातरक्त, शुक्र की कमी के कारण आर्इ कमजोरी में यह आशातीत लाभकारी है !!

          *!! विपरीतमल्ल तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* विपरीतमल्ल तेल खुजली, दाद, कुष्ठ के घाव, कटे के घाव, फोड़े, उपदंश के घाव व सभी प्रकार के घावों में इस्तेमाल से लाभदायक है !!

         *!! बिल्व तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* बिल्व तेल कान में डालने से कान का दर्द, कम सुनार्इ देना, सांय-सांय की आवाज होना आदि में लाभ प्रदान करता है !!

        *!! व्रणराक्षस तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* व्रणराक्षस तेल चर्मरोग, व्रण, नाड़ीव्रण (नासूर), माँस-वृद्धि, विचर्चिका (एक्जिमा) , दाद, अपची आदि में लाभ प्रदान करता है !!

       *!! बाधिर्य नाशक तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* कान में मैल जम जाने या कान के छेद किसी कारण बन्द हो जाने या सुनने की शक्ति कम हो जाने या सुनार्इ कम देने में बाधिर्य नाशक तेल का उपयोग लाभदायक है !!

           *!! वासाचन्दनाद्य तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* वासाचन्दनाद्य तेल कास, ज्वर, रक्तपित्त, पांडु, हलीमक, कामला, क्षतद्वाय, राजयक्ष्मा व श्वास में लाभकारी है ! यह मालिश से बल-वर्ण की वृद्धि कर लाभ प्रदान करता है !!

             *!! ब्राह्मी तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* ब्राह्मी तेल सौम्यगुणयुक्त, शीतलतादायक, बुद्धिवर्द्धक व केश वद्धक है ! सिर में इस तेल की मालिश करने से दिमागी कमजोरी दूर होती है ! व नेत्र ज्योति बढ़ती है !!

          *!! ब्राह्मी-आँवला तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* ब्राह्मी-आँवला तेल बालों को झड़ने व सफेद होने से रोकता है व बालों में वृद्धि करता है ! यह तेल ब्राह्मी व आँवला के क्वाथ द्वारा निर्माण किया जाता है ! अत: यह ब्राह्मी तेल की अपेक्षा अधिक सौम्य, शीतलता प्रदान करने वाला व अधिक गुणकारी है !!

            *!! प्रसारिणी तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* प्रसारिणी तेल नसों में रक्त का संचार बढ़ाता है ! व शारीरिक अंगों की कमजोरी को दूर करता है ! नसों व हड्डियों के विकारों को ठीक करता है !!

          *!! पुनर्नवादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* पुनर्नवादि तेल की मालिश करने से शोथ, कामला, पांडुरोग, हलीमक, रक्तपित्त, भगन्दर, प्लीहा रोग, उदर रोग, जीर्ण ज्वर आदि रोग नष्ट होते हैं !!

           *!! पंचगुण तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* पंचगुण तेल सभी प्रकार के दद्र में मालिश से व कान में डालने से एवं जले हुए स्थान पर लगाने से आराम देता है ! चोट व मोच के दर्द में भी लाभकारी है !!

          *!! प्रमेहमिहिर तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* इसकी मालिश से वात- विकार व वातज, पित्तज, कफज, सन्निपातज, मेदागत व माँसगत ज्वर नष्ट होते हैं ! यह प्रमेह रोगों में भी फायदा देता है !!

         *!! नासार्शोहर तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* रूर्इ का फाहा बनाकर इस तेल में डुबोकर नाक में टपकाने से नाक में होने वाले मस्से दूर हो जाते हैं !!

           *!! निर्गुण्डी तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* निर्गुण्डी तेल गण्डमाला, अपची, नाड़ीव्रण आदि रोगों में नस्य लेने व लगाने से लाभ करता है !!

         *!! दशमूल तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* इससे जोड़ों व अस्थिगत और सिर व वात रोगों में शीघ्र लाभ मिलता है ! कान व नाक के दर्द में भी तीन-तीन बूंदे डालने से लाभ मिलता है !!

         *!! नारायण तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* यह पक्षाघात, कमर दर्द, कान का दर्द, पसली का दर्द, शरीर के किसी हिस्से का सुखना, लंगड़ापन व सिर दर्द आदि में इससे लाभ मिलता है !!

           *!! तुबरक तेल !!*
         *( चालमोंगरा तेल )*

*गुण व उपयोग : -* यह सब प्रकार के कुष्ठ रोगों के लिए उत्तम औषधी है ! कम मात्रा से शुरू कर धीरे-धीरे मात्रा बढ़ानी चाहिए ! कुष्ठ रोग में लगाने व खाने के काम आता है !!

         *!! जात्यादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* यह घाव, चेचक, खुजली (सूखी व गीली दोनों तरह की), विसर्प, कटे का घाव, अग्नि से जलने आदि में लाभकारी है !!

          *!! चन्दन-बला-लाक्षादि तेल )*

*गुण व उपयोग: -* यह तेल शिरोरोग, नेत्रदाह, शरीर का दाह, क्षय, छर्दि, रक्तप्रदर, रक्तपित्त, कफ रोग, दाह, कंडू, विस्फोटक, सूजन, खाँसी, श्वास, कामला, पांडु आदि रोगों में लाभ करता है !!

     
          *!! गुडूच्यादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* यह खुजली, जलन, कुष्ठ रोग व वात रक्त में लाभकारी है !!

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आयुर्वेदिक तेल भाग १

🌺🙏🏻🌺 *!! आयुर्वेदिक तेल भाग १ !!* 🌺🙏🏻🌺

               *!! क्षार तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* क्षार तेल कान के समस्त प्रकार के रोगों जैसे कान में मवाद आना, कान का दर्द, कान में आवाजें आना आदि में लाभ प्रदान करता है !!

        *!! हिमसागर तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* हिमसागर तेल के प्रयोग से गुमचोट, वात रोग, जलन, सूजन, कमजोरी मस्तिष्क की खुश्की व गर्मी आदि में लाभ मिलता है !!

          *!! शुष्कमूलादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* शुष्कमूलादि तेल की मालिश करने से शोथ रोग (सूजन), यकृत्वृद्धिज्नय शौथ, प्लीहावृद्धिजन्य शोथ, पांडु, कामला, हलीमक आदि से उत्पनन शौथ शीघ्र नष्ट होते हैं !!

            *!! सोमराजी तेल !!*

*गुण व उपयोग : -*सोमराजी तेल की मालिश करने से समस्त प्रकार के कुष्ठ, नाड़ीव्रण, दुष्टव्रण, पीलिका, व्यंग, गम्भाी वात रोग, कण्डू, कच्छू, दाद, पामा आदि को नष्ट करता है !!

         *!! सप्तगुण तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* सप्तगुण तेल वात विकार, आग से जला, चोट, मोच, गठिया, फोड़ा, सूजन आदि में प्रयोग से लाभ करता है !!

           *!! सैंधवादि तेल !!*
                  *( बृहत् )*

*गुण व उपयोग :-* इस तेल का खाने और लगाने दोनों प्रकार से उपयोग में लाया जाता है ! यह अण्डवृद्धि, सन्धिशूल, जंघाशूल, बाह्ययाम, हृदय, पाश्र्व व पृष्ठ का शूल, मूत्रकृच्छ, अश्मरी का दर्द, अन्त्रवृद्धि, कटिशूल, जानुशूल, अर्दित रोग आदि में आशातीत लाभ प्रदान करता है !!

          *!! षड्बिन्दु तेल !!*

*गुण व उपयोग :-* सिरदर्द, जुकाम आदि में षड्बिन्दु तेल को नाक में डालने से लाभ मिलता है ! सिर में कहीं-कहीं बाल उड़ जाने (गंज) आदि में यह लाभ प्रदान करता है !!

           *!! श्रीगौपाल तेल !!*

*गुण व उपयोग :-* श्रीगौपाल तेल की लिंगेद्रिय पर मालिश करने से विशेष लाभ मिलता है ! नंपुसकता व कमजोरी दूर होकर यौवन प्राप्त होता है !!

          *!! शंखपुष्पी तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* शंखपुष्पी तेल की मालिश से बच्चों के समस्त रोग दूर हो जाते हैं व यह कांति, मेधा, धृति व पुष्ठि की वृद्धि करता है ! ज्वर व दुर्बलता को मिटाता है ! बच्चों के सूखा रोग में इस तेल के उपयोग से विशेष लाभ होता है !!

          *!! शोथशार्दूल तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* शोथशार्दूल तेल शरीर के समस्त प्रकार के सूजन को हटाने में गुणकारी है ! इसके अलावा सभी प्रकार के घावों में लाभ प्रदान करता है !!

         *!! लक्ष्मीविलास तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* लक्ष्मीविलास तेल की मालिश करने से मस्तिष्क रोग, स्नायु रोग, स्नायविक दुर्बलता, प्रमेह, वात-व्याधि, मूर्छा, उन्माद, अपस्मार, ग्रहणी, पांडु रोग, शोथ, नंपुसकता, वातरक्त, मूढ गर्भ, आर्तव व शुक्रगत दोषों में लाभ मिलता है !!

          *!! महासुगन्धित तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* महासुगन्धित तेल को माथे में लगाने से गर्मी के कारण होने वाले सिर दर्द, दिमाग की गर्मी, बेचैनी, ज्यादा गर्मी लगना, माथा बराबर गर्म रहना आदि दूर हो जाते हैं। जिसके सिर में आधाशीशी का दर्द होता हो, उसको सीधा लेटा कर गर्दन के नीचे तकिया लगाकर, मस्तक को तकिये के पीछे झुका दें, जिससे नाक के छेद आसमान की तरफ हो जाएं, फिर २-२ बूंद नासिका में यह तेल डालें व जोर से ऊपर को खींचने के लिए रोगी को कहें, जिससे तेल मस्तक में चढ़ जाए ! एक-दो बार डालने में ही दो-चार दिन में आधाशीशी का दर्द दूर हो जाता है ! यह अत्यन्त सुगन्धित है !!

          *!! महालाक्षादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* महालाक्षादि तेल की मालिश से जीर्ण ज्वर, विष ज्वर, रस-रक्तादि धातु ज्वर, गर्भावस्था में होने वाला गर्भिणी का ज्वर, दाह, अनिद्रा आदि में लाभ मिलता है !!

          *!! भृंगराज तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* भृंगराज तेल से बालों का गिरना, असमय बालों का सफेद होना, कमजोर बाल व पकने-झड़ने की तकलीफ से छुटकारा मिलता है !!

         *!! महामाष तेल !!*
          *( निरामिष तेल )*

*गुण व उपयोग :-* महामाष तेल पक्षाघात, अर्दित, अपतन्त्रक, अपबाहुक, विश्वाची, खंज, पंगुता, सिर का जकड़ना, गर्दन का जकड़ना, वातिक अधिमांद्य, शुक्रक्षय, कर्णनाद आदि में लाभ प्रदान करता है !!

          *!! महाचन्दनादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* महाचन्दनादि तेल की मालिश करने से राजयक्ष्मा, जीर्ण ज्वर, दाह, श्वास, शारीरिक क्षीणता आदि विकारों में उत्तम लाभ मिलता है !!

          *!! महानारायण तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* महानारायण तेल की मालिश से जोड़ों के दर्द, कुबड़ापन, कंपन, वात व्यादि आदि में लाभ मिलता है !!

          *!! महामरिच्यादि तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* महामरिच्यादि तेल कुष्ठ, सूजन, वात, घाव, जले का घाव, फोड़े-फुंसी, सुखी व गीली खुजली आदि में लगाने से लाभ मिलता है ! ऋतु काल में स्त्रियों के पेट में दर्द होने पर नाभि क्षेत्र में ८ से १० बूंदें इस तेल की मालिश करने से लाभ मिलता है ! इस तेल को आँखें से दूर रखना चाहिए !!

         *!! महाभृंगराज तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* महाभृंगराज तेल को सिर में लगाने से बालों का असमय झड़ना व सफेद होन, बालों की कमजोरी दूर होकर बाल काले व चमकदार बनते हैं !!

         *!! महाविषगर्भ तेल !!*

*गुण व उपयोग : -* महाविषगर्भ तेल की मालिश से जोड़ों की सूजन, गृध्रसी, सिर-दर्द, समूचे शरीर में हडफूटन होना, कान में आवाज होना, आधा शरीर सूख जाना आदि रोगों में लाभकारी है !!

            *!! मल्ल तेल !!*
        *( संखिया का तेल )*

*गुण व उपयोग : -* मल्ल तेल बहुत उग्र व तत्काल फल दिखाने वाला है ! वात वेदना में इस तेल की १० बूंद को अन्य तेल में मिलाकर मालिश करने से आश्चर्यजनक लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान :-* २ से ४ बूंद तेल मिलाकर लगावें !!

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मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017

काजल


दीपावली पर घर बनाये काजल
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कल जो घी के दिये जले तो एक दिये मै आप आक के दूध से रूई भिगो दें फ़िर सूखा ले ऐसा सात बार करे और वो रूई गाय के घी मे जलाये और उसके ऊपर को बर्तन लोहे का उल्टा रखे और थोड़ी नीचे जगह रखे ताकि दीपक को आक्सीजन मिलती रहे बुझे नही और बाद मे वो काजल लगाए आँखो के रोगॊ को दूर करता है
गुरुवेँद्र सिंह
9466623519
संजीवनी ग्रूप

नाखून सड़ना ,पेरोनिसिया ,हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना.

  पेरोनिसिया  हात पैर के नाखून सडणा/ खराब होना. आयुर्वेदिक  मुलेठी 50ग्राम बडी सोफ 50 ग्राम  अच्छी हळदी 50 ग्राम  नीम पत्ते चुर्ण 50 ग्राम  ...